मेट्रो स्टेशनों पर मुफ्त में पीने का पानी और टॉयलेट की सुविधाएं क्यों नहीं- हाई कोर्ट
नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों के अंदर मुफ्त में पीने का पानी और टॉयलेट की सुविधाएं न होने के कारण डीएमआरसी पर पटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने डीएमआरसी को नोटिस जारी करते हुए 9 मई तक जवाब मांगा है। साथ ही डीएमआरसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह यात्रियों को मुफ्त में पीने का पानी मुहैया नहीं कराने की नीति से जुड़े दस्तावेज भी अदालत में पेश करे।

डीएमआरसी पर लगाई फटकार
जस्टिस एस. रवींद्र भट और ए. के. चावला की बेंच ने डीएमआरसी से कहा कि ''क्या वह पानी और टॉयलेट की सुविधा मुहैया नहीं कराने की नीति वेस्ट से लेकर आए हैं? यहां ट्रैफिक का हाल देखिए। करोड़ों लोग मेट्रो में सफर करते हैं और यदि किसी को मेडिकल समस्या हो जाए, तो क्या होगा? वह कहां जाएगा?' 'बेंच ने आगे कहा कि वह जब तक स्टेशन से बाहर आएगा, तब तक काफी देर हो चुकी होगी। इस नीति के पीछे कौन-सी सोच है?

कोर्ट ने कही ये बात
लंदन का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि आप दुनिया में कहीं भी चले जाइए, मेट्रो स्टेशनों पर टॉयलेट्स होते हैं। लंदन में ट्रैफिक उतना ज्यादा नहीं है, जितना हमारे यहां है। हमें आंकड़े दिखाइए और ये सुविधाएं मुहैया नहीं कराने के कारण बताइए। आप पिछले पिछले 14 साल से इसी नीति पर काम कर रहे हैं।'

सिंगल बेंच के आदेश के बाद हो रही थी सुनवाई
दिल्ली कोर्ट में ये सुनवाई सिंगल बेंच के उस आदेश के बाद हो रही थी, जिसमें कहा गया था कि मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को मुफ्त में पीने का पानी पाने का अधिकार नहीं है। किसी व्यक्ति को पीने के पानी पाने का अधिकार है, लेकिन मुफ्त में नहीं है। हाई कोर्ट में ये अपील कुश कालरा ने की थी। कालरा ने कहा था कि मेट्रो में मुफ्त पानी पीने की सुविधा होनी चाहिए। वहीं उन्होंने साफ-सफाई का मुद्दा भी उठाया था।












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