ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली चुनाव में कालिंदी कुंज निवासियों की क्या है मांग, यमुना को लेकर क्या कहा?
Delhi Chunav 2025: दिल्ली के कालिंदी कुंज में रहने वाले 58 वर्षीय राम पासवान कहते हैं कि एक समय था जब यमुना का पानी साफ और पीने योग्य भी था। यमुना की अब स्थायी छवि पानी के अधिकांश हिस्सों को ढंकने वाली सफेद झाग की एक मोटी परत है, जिसके चारों ओर प्लास्टिक और अन्य कचरा बिखरा हुआ है।
दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही यमुना में प्रदूषण और नदी की सफाई में विफलता को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल फिर से शुरू हो गया है। दिल्ली में अगली सरकार बनाने के लिए आप, भाजपा और कांग्रेस त्रिकोणीय दौड़ में हैं। हालांकि, कालिंदी कुंज में नदी के पास की झुग्गियों के निवासी 5 फरवरी के चुनावों के बाद जो भी सत्ता में आएगा, उससे ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

कालिंदी कुंज के निवासी बोले- हम साफ घाट चाहते हैं
कालिंदी कुंज के निवासियों का कहना है, ''अधिकारियों को यमुना से जुड़ने वाले नालों के पास टैंक बनाने चाहिए ताकि नदी में जाने से पहले (अपशिष्ट) पानी को फिल्टर किया जा सके।"
पासवान ने पीटीआई से कहा, "हम साफ घाट, उचित प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा चाहते हैं। अभी, हम नदी में केवल प्लास्टिक और कचरा देख रहे हैं।"
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीसी) द्वारा 2022 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में यमुना से जुड़े कम से कम 25 नाले हैं। 23 दिसंबर 2024 की दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, 25 में से कम से कम 17 नाले 30 मिलीग्राम-बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) मानक को पूरा करने में विफल हैं, जिनमें से पांच 100 मिलीग्राम से अधिक हैं।
'प्रदूषण न केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है'
निवासियों ने कहा कि यमुना में प्रदूषण न केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है और उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो विभिन्न अनुष्ठानों के लिए नदी पर निर्भर हैं।
कालिंदी कुंज घाट पर अंतिम संस्कार की रस्म के लिए अपने दोस्त के साथ गए 36 वर्षीय मिथुन ने कहा, "इस इलाके में इतनी बदबू आती है कि आप यहां एक मिनट भी खड़े नहीं रह सकते।''
एक अन्य निवासी लंबू सिंह के लिए, स्वास्थ्य जोखिमों के बावजूद यमुना का पानी एक आवश्यकता है। उन्होंने पीटीआई को बताया, "हमारे पास नदी में नहाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह हमारी आँखों और त्वचा को प्रभावित करता है और हममें से कई लोगों को जाँच के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।"
लंबू सिंह ने दावा किया कि निवासियों को अक्सर नदी के किनारों की सफाई खुद ही करनी पड़ती है क्योंकि उन्हें अधिकारियों से कोई सहायता नहीं मिलती। उन्होंने कहा, 'हमने बार-बार कचरा साफ करने के लिए कचरा ट्रकों की मदद मांगी है, लेकिन कोई नहीं सुनता।"
उन्होंने कहा कि रसायन ले जाने वाले नाले स्थिति को और खराब कर देते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए व्यवस्थागत बदलाव की आवश्यकता है, खासकर अपशिष्ट जल प्रबंधन में। पर्यावरणविद् पंकज कुमार ने बताया कि दिल्ली के नालों से अनुपचारित अपशिष्ट जल नदी के क्षरण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कुमार ने कहा, "दिल्ली में उत्पन्न अपशिष्ट जल का उचित तरीके से उपचार नहीं किया जा रहा है, जैसा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है। अगली सरकार को यमुना को साफ करने से पहले इस अपशिष्ट जल के उपचार को प्राथमिकता देनी चाहिए।" एक अन्य पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने कहा: "यह केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह नदी दिल्ली के लिए जीवन रेखा है और पूरे शहर के स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित करती है।"












Click it and Unblock the Notifications