दिल्ली ब्लास्ट साजिश में ‘टेरर डॉक्टर’ का खुलासा, सीरियल ब्लास्ट की थी तैयारी, 2 साल से चल रही थी प्लानिंग!
Delhi Blast Update News: दिल्ली में 10/11 को हुई ब्लास्ट घटना की जांच में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जांच में पता चला है कि जैश से जुड़े एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ने देश के कई शहरों में सीरियल ब्लास्ट की बड़ी साजिश रची थी। रेड फोर्ट के पास i20 में हुआ धमाका दरअसल एक 'पैनिक डेटोनेशन' था, जबकि योजना इससे कहीं बड़े पैमाने पर धमाके की थी।
दो साल से चल रही थी तैयारी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सामने गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुज़म्मिल शकील ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह पिछले दो साल से इस साजिश में शामिल था। इसी दौरान वह लगातार विस्फोटक, रिमोट और ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स इकट्ठा कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल को खासतौर पर यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट खरीदने का जिम्मा दिया गया था। ये दोनों मिलकर बाहरी डेटोनेशन से भारी धमाका कर सकते हैं।

मुजम्मिल ने गुरुग्राम और नूंह से 3 लाख रुपये देकर 26 क्विंटल NPK फर्टिलाइजर खरीदा था। वहीं नूंह से अन्य विस्फोटक सामग्री ली गई और फरीदाबाद के दो बाजारों से इलेक्ट्रॉनिक सामान। इतना ही नहीं, रसायनों को सुरक्षित रखने के लिए उसने एक डीप फ्रीजर भी खरीदा था।
🟡 आत्मघाती बमबाज उमर की भूमिका
मुजम्मिल के साथी उमर मोहम्मद को फर्टिलाइजर प्रोसेस करने और बाकी रसायन जुटाने की जिम्मेदारी थी। जांच में वह फ्लोर मिल भी बरामद हुई है जहां यूरिया को पीसा जाता था ताकि उसे ब्लास्ट में इस्तेमाल होने योग्य बनाया जा सके। यही उमर बाद में दिल्ली ब्लास्ट के दौरान खुद भी उड़ गया।
🟡 खुद ही जुटाए थे 26 लाख रुपये
इस मॉड्यूल ने धमाके के लिए पैसा विदेश से नहीं, बल्कि खुद ही इकट्ठा किया था। कुल 26 लाख रुपये जुटाए गए, जिसमें उमर ने 2 लाख दिये और मुज़म्मिल ने 5 लाख। आदिल राथर ने 8 लाख, मुज़फ्फर राथर ने 6 लाख और लखनऊ का शाइन सईद 5 लाख रुपये लाया। पैसों को लेकर उमर और मुज़म्मिल के बीच अल फला यूनिवर्सिटी में झगड़ा भी हुआ था।
बाद में उमर ने अपनी रेड ईकोस्पोर्ट कार मुज़म्मिल को दे दी थी जो बाद में फरीदाबाद से बरामद हुई। अल फला यूनिवर्सिटी भी अब जांच के घेरे में है क्योंकि सभी आरोपी वहीं काम करते थे और संस्थान पर वित्तीय गड़बड़ियों के भी आरोप हैं।
🟡 हथियारों का सौदा और तुर्की का सफर
पूछताछ में मुजम्मिल ने ये भी स्वीकार किया कि उसने 6.5 लाख रुपये में एक AK-47 खरीदी थी जो बाद में आदिल राथर के लॉकर से बरामद हुई। उसने बताया कि उसका हैंडलर मंसूर था जबकि उमर का हैंडलर हाशिम। यह पूरा मॉड्यूल 'इब्राहिम' नाम के व्यक्ति के निर्देश पर काम कर रहा था।
मुजम्मिल, आदिल और मुजफ्फर तुर्की भी गए थे। यह यात्रा 'ओकासा' नाम के व्यक्ति के कहने पर की गई थी जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। योजना थी कि वहां से अफगानिस्तान में दाखिल हों, लेकिन हैंडलर ने अचानक प्लान बदल दिया और तीनों एक हफ्ते तक इंतजार के बाद वापस लौट आए।
🟡 इंटरनेट से सीखा बम बनाना
NIA की जांच में पता चला है कि उमर इंटरनेट से बम बनाने के वीडियो और टेक्स्ट पढ़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह पूरा नेटवर्क कई शहरों में एक साथ धमाके करने की तैयारी कर रहा था और दिल्ली ब्लास्ट उसकी शुरुआती कड़ी थी जो हादसे की वजह से पहले ही फट गया।
🟡 जांच में उभर रही कई विदेशी कड़ियां
कई विदेशी लिंक और घरेलू मॉड्यूल सामने आने के बाद अब एजेंसियां गहराई से जांच कर रही हैं कि आखिर इस साजिश का मास्टरमाइंड कौन है और असल मकसद क्या था। फिलहाल उमर को छोड़कर बाकी सभी आरोपी हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है। यह साफ है कि दिल्ली ब्लास्ट के पीछे सिर्फ एक धमाका नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की खतरनाक योजना छिपी थी, जिसे समय पर उजागर करना देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था।
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