ड्रोन अटैक रोकने के लिए बड़ा कदम, स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम के लिए BEL के साथ बड़ी डील
नई दिल्ली, 3 सितंबर: जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर हाल ही में 27 जून को हुए ड्रोन अटैक के बाद ऐसे हमलों से सुरक्षा के लिए सरकार लगातार नए कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसी के तहत कुछ दिन पहले भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम को लेकर इंडियन नेवी ने भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड के साथ डील की है। वहीं अब सुरक्षा के लिए लिहाज से सेना, नौसेना और वायु सेना ने डीआरडीओ द्वारा विकसित एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

दरअसल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) के लिए 'हार्ड किल' और 'सॉफ्ट किल' क्षमताओं के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एंटी-ड्रोन सिस्टम को खरीदने के सौदों पर 31 अगस्त को हस्ताक्षर किए गए थे, जो रक्षा मंत्रालय द्वारा सौदों को पूरा करने की अंतिम तिथि थी।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना DRDO की तकनीक पर आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम की आपूर्ति के लिए BEL के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। DRDO द्वारा विकसित और BEL द्वारा निर्मित ड्रोन डिटेक्ट, डिटर एंड डिस्ट्रॉय सिस्टम (D4S) है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने वाला पहली स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-ड्रोन सिस्टम होगा।
सरकारी अधिकारी के अनुसार जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकवादी हमले के बाद आपातकालीन प्रक्रियाओं के तहत इन सिस्टम को प्राप्त करने की बेहद जरूरत महसूस की गई, जिसमें दो से तीन छोटे ड्रोन का इस्तेमाल जम्मू एयरबेस पर विस्फोटक गिराने के लिए किया गया था।
इस डील पर सशस्त्र बल के वरिष्ठ अधिकारियों और डीआरडीओ के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। भारतीय सशस्त्र बलों ने अपना समर्थन दिया है और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और बीईएल के साथ एंटी ड्रोन सिस्टम के संयुक्त विकास में नेतृत्व किया है। वहीं DRDO ने बताया कि D4 सिस्टम माइक्रो ड्रोन का तुरंत पता लगा सकता है और जाम कर सकता है और टारगेट को खत्म के लिए एक लेजर-आधारित किल तंत्र का उपयोग कर सकता है।












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