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नूह में वारिस की मौत, गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग या हादसा - ग्राउंड रिपोर्ट

28 जनवरी, 2023 हरियाणा के नूह ज़िले में हुई एक घटना की कुछ तस्वीरें अचानक सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं.

मामला एक वायरल वीडियो के ज़रिए सामने आया, कुछ कथित गोरक्षकों ने तीन मुस्लिम युवकों को मारा पीटा, वायरल वीडियो में युवक अपना नाम वारिस, शौकीन और नफ़ीस बता रहे थे.

Death of man mob lynching or accident in the name of cow in haryana

वायरल वीडियो में तीन घायल युवक कार में बैठे हुए दिखाई दे रहे थे. घटना से जुड़े वायरल वीडियो में पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति युवकों को कमर में कोहनी मारता दिख रहा है और कुछ लोग घायल युवकों को सड़क पर नीचे बिठाकर तस्वीरें खींचते दिखते हैं.

इस घटना का फ़ेसबुक लाइव भी किया गया और इसके पाँच घंटे बाद तीनों घायल युवकों में से एक, वारिस ने दम तोड़ दिया.

उठ रहे हैं कई सवाल?

वारिस के परिवार का आरोप है कि बजरंग दल से जुड़े गोरक्षकों ने उनके बेटे की पीटकर हत्या की है और इसे मॉब लिंचिंग बताया.

इस घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे.

क्या नूह की ये घटना मॉब लिंचिंग की थी? क्या वारिस की मॉब लिचिंग में मौत हुई? क्या वारिस को बजरंग दल के कथित कार्यकर्ताओं ने मारा? और सबसे बड़ी बात ये कि नूह की घटना को लेकर पुलिस पर क्यों उंगलियां उठ रही है?

दिल्ली से क़रीब 75 किलोमीटर दूर बसा नूह पहले भी गोकशी, पशु तस्करी, वाहन चोरी जैसे अपराधों लिए सुर्ख़ियों में रहा है. राजस्थान की सीमा से सटे नूह ज़िले की आबादी क़रीब 11 लाख है, जिसमें 80 प्रतिशत जनसंख्या मुसलमानों की है.

जब बीबीसी की टीम नूह के हुसैनपुर गाँव पहुँची तो जहाँ वारिस की मौत का मातम पसरा हुआ था. वहाँ हमारी मुलाक़ात वारिस की माँ हाज़रा से हुई.

बेटे के मौत के ग़म में डूबी हुई माँ ने कहा, "मेरा बेटा घट गयो, मेरा बेटा घट गयो, मेरा बेटा मिस्त्री है. वे मेरे बेटे को ले गए, मासूम बच्चा ले जाकर मार दिया. मेरा बेटा बेगुनाह है, इंसाफ़ करा दो."

परिवार के मुताबिक़ छह भाइयों में वारिस पाँचवें थे और कार मैकेनिक का काम करते थे. डेढ़ साल पहले उनकी शादी हुई थी, उनकी तीन महीने की बच्ची यतीम हो गई है.

यहाँ वारिस के भाई इमरान का कहना है कि बजरंग दल से जुड़े गोरक्षकों ने वारिस की पीट पीटकर मार डाला.

इमरान का कहना है, "बजरंग दल के मोनू मानेसर ने सुबह फ़ेसबुक लाइव किया तो गाँव वालों को पता चला कि उन्होंने बच्चे पकड़ रखे हैं, तब हमें जानकारी मिली."

"बच्चों को मोनू मानेसर की बोलेरो कार में बिठाया और अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर तीनों बच्चों को पीटा. जब वे बच्चों को लेकर जा रहे थे, तो बच्चे चलकर जा रहे थे लेकिन अगर हादसा हुआ तो चंद क़दम पर पुलिस चौकी थी, बच्चे वहाँ कस्टडी में देने थे, लेकिन पुलिस को बच्चे नहीं दिए गए."

इमरान का कहना है, "अगर कोई ग़लत कर रहा है तो हमारी पुलिस है ना, सरकार है ना, कोर्ट कचहरी है ना, तो तीसरे आदमी का क्या हक़ बनता है कि बच्चे को उठाकर ले जाए और उसे मार दे."

नफ़ीस के परिवार का क्या कहना है?

वारिस के अलावा दूसरा युवक नफीस नूह के ही रानियाकी गाँव का रहने वाला है.

22 साल के नफ़ीस सात भाई बहन हैं. नफ़ीस की पत्नी मुबीना घटना के बाद से बेसुध हैं. नफ़ीस का डेढ़ साल का बेटा और सात महीने की बेटी है.

नफ़ीस की माँ अफसाना कहती हैं, "मेरे बेटे का सारा मुँह सूजा हुआ था. बजरंग दल वालों ने ख़ूब मारा है. वह मरे जैसा ही हो गया है."

नफ़ीस के पिता जाहिद के मुताबिक़ उनके बेटे को पुलिस अस्पताल से जेल ले गई, लेकिन तबीयत बिगड़ने के बाद वापस उसे अस्पताल में भर्ती कराया है.

नफ़ीस और शौकीन के ख़िलाफ़ गो-तस्करी का मुकदमा दर्ज किया गया है लेकिन मारपीट और वारिस की मौत पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है.

गोरक्षकों का क्या कहना है?

दोनों पीड़ित परिवारों ने सीधा आरोप बजरंग दल से जुड़े मोनू मानेसर पर लगाया है. मोनू ख़ुद को हरियाणा में बजरंग दल से जुड़े गोरक्षा दल का प्रांत प्रमुख बताते हैं.

बीबीसी से बातचीत में मोनू मानेसर ने इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा, "हमारे गोरक्षा दल भिवाड़ी के साथियों को सूचना मिली कि एक सैंट्रो कार गोवंश है. सूचना सही पाई गई और देखा कि सैंट्रो तेज़ गति से भागने लगी और खोरी चौकी के पास एक टेंपो में टक्कर मार दी. कार में तीन तस्कर थे, तीनों घायल हो गए"

मोनू मानेसर का कहना है वे ख़ुद घटनास्थल पर 35 मिनट बाद पहुँचे थे.

उन्होंने कहा, "हमारे पास लड़के नहीं थे. पुलिस की मौजूदगी में थे. पुलिस की मौजूदगी में ही वो अस्पताल में गए थे. मैं उनके साथ नहीं था. न किसी ने मारपीट की है, न किसी ने कोई ग़लत व्यवहार किया है. मारपीट के सारे आरोप निराधार हैं. एक प्रतिशत भी सच्चाई नहीं है."

मारपीट के वीडियो में उनके दिखने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि "इसमें एक प्रतिशत भी सच्चाई नहीं है."

चश्मदीदों ने क्या देखा?

बीबीसी को मिले चश्मदीद मोनू मानेसर के इस दावे पर सवाल उठाते हैं. घटनास्थल के सामने मौजूद एक घर में रहने वाली महिला ने बताया, "जब मैं घर से निकलकर आई, तब बहुत जनता खड़ी थी. गाड़ी टूटी हुई पड़ी थी, सब्ज़ी बिखरी हुई थी."

चश्मदीद ने कहा, "भाई ख़ूब मारा उन्हें. खूब मारा. ख़ूब मारकर बिठाया. बहुत पीटा. एक लड़का बोल रहा था कि पेट में दर्द है, मुझे हॉस्पिटल में दिखा दो, मुझे कितने ही दिन जेल में रख लेना, पर मुझे हॉस्पिटल ले जाओ. मेरे पेट में बहुत दर्द है. उसे ख़ून की उल्टी आ रही थी, तो वे कह रहे थे कि इसने मांस खा रखा है. उसे ख़ून की उल्टी आ रही है."

घटनास्थल पर मौजूद दूसरे चश्मदीद ने बताया, "सुबह अजान लग रही थी. मेरा घर यहीं पास में है, हम आ रहे थे. देखा तो गाड़ी एक्सिडेंट हो रखी है. बजरंग दल वालों ने उन्हें निकालकर मारा पीटा. उनके पास लाठी भी थी और जो गन थी उससे भी उनके पेट में दो चार बार मारी."

इस मामले में नूह के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने कहा, "28 तारीख़ को हमें एक टेंपो ड्राइवर और कुछ गोरक्षकों से सूचना मिली थी कि एक सड़क दुर्घटना हो गई है. जिसमें तुरंत मौक़े पर पुलिस पहुँची थी, तीन घायल अभियुक्त गाड़ी में सुरक्षित बैठे थे, उनको तुरंत अस्पताल ले जाया गया. वहाँ से दो युवकों को सुपर स्पेशलिटी में रेफ़र किया गया. दो घायलों में से एक घायल की मौत हो गई थी."

पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस अधीक्षक ने दावा किया था उसका विवरण सीसीटीवी फुटेज के समय से मेल नहीं खाता है.

घटना के आठ दिन गुज़र जाने के बाद उनसे फ़ोन पर बात हुई तो उन्होंने इस मामले में कोई टिप्पणी से इनकार किया. जब उनसे पूछ गया कि गोरक्षकों के खिलाफ़ क्या कार्रवाई हुई है, इस पर उन्होंने कहा कि "अभी जाँच चल रही है".

जब उनसे पूछ गया कि घायल युवकों को अस्पताल पहुँचाने में ढाई घंटे से ज्यादा समय क्यों लगा, तो इसके जवाब में वरुण सिंगला ने फोन पर इतना ही कहा कि "टेम्पो चालक की शिकायत पर एक्सीडेंट और गोतस्करी के मामले में एफ़आईआर दर्ज हुई है वहीं परिजनों (वारिस के) की तरफ़ से शिकायत (गोरक्षकों के ख़िलाफ़) मिली है. उस पर जाँच की जा रही है."

इस मामले को समझने के लिए घटनाक्रम को समझना बहुत जरूरी है. एक्सीडेंट कब हुआ? पुलिस मौक़े पर कब पहुँची?

पुलिस ने शुरुआती पाँच घंटों में क्या किया? और कथित गो रक्षक मौक़े पर क्या कर रहे थे?

बीबीसी पड़ताल

घटनाक्रम: कब क्या हुआ?

इस घटनाक्रम को समझने के लिए सबसे अहम है सीसीटीवी फुटेज.

घटनास्थल के पास एक दुकान पर सीसीटीवी कैमरा लगा है. वहाँ मौजूद एक दुकानदार ने हमें 28 जनवरी को सुबह पाँच बजे से लेकर आठ बजे तक की सीसीटीवी फुटेज दिखाई, जो पुलिस के दावों पर सवाल खड़े करती है.

4 बजकर 56 मिनट- सीसीटीवी फुटेज देखने से पता चलता है कि नूह की तरफ़ जा रही तेज़ रफ़्तार सैंट्रो की टक्कर सामने से आ रहे टेंपो से होती है.

घटना स्थानीय पुलिस चौकी 'खोरी कलां' से क़रीब 200 मीटर दूर है.

4 बजकर 56 मिनट- टक्कर होने के पाँच सेकेंड के अंदर ही एक बोलेरो कार पुलिस चौकी के सामने से सायरन बजाते हुए घटनास्थल पर रुकती है.

बोलेरो कार में सवार कथित गो रक्षक, सैंट्रो कार से युवकों को बाहर निकालते हैं और उनके साथ मारपीट करते हुए दिखाई देते हैं.

चश्मदीद इरफ़ान ने बताया, "उनके पास लाठी भी थी और जो गन थी उससे भी उनके पेट में दो चार मारी."

5 बजकर 54 मिनट- कथित गो रक्षक सैंट्रो कार से गो वंश को निकालते हुए दिखाई देते हैं. कुछ दूसरे वायरल वीडियो और चश्मदीद भी कार में गाय होने की बात करते हैं.

हरियाणा के प्रांत गो रक्षा प्रमुख मोनू मानेसर जो उस समय घटना स्थल पर मौजूद थे, उनके मुताबिक़ गाय बहुत बुरी तरह घायल थी, जिसके लिए वहाँ पर एंबुलेंस बुलाई गई.

मोनू के मुताबिक़ गो वंश के लिए ये एंबुलेंस धारवेडा चिकित्सालय से आई थी.

6 बजकर 17 मिनट- एक्सीडेंट के क़रीब एक घंटा 21 मिनट बीत जाने के बाद पुलिस की पेट्रोलिंग कार पहुँचती है. कार से दो पुलिसकर्मी उतरते हुए दिखते हैं. एक पुलिसकर्मी उतरकर सबसे पहले फ़ोन से कुछ तस्वीरें लेने की कोशिश करता है.

घटना के समय वहाँ मौजूद चश्मदीद ने भी दावा किया कि पुलिस काफ़ी देर बाद पहुँची.

हालाँकि घटनास्थल से क़रीब 200 मीटर दूर पुलिस चौकी खोरी के रजिस्टर में लिखा हुआ है कि 6 बजकर 35 मिनट पर पुलिस की पेट्रोलिंग कार 0496 और उसके बाद 0495 गाड़ी पहुँची.

पुलिस चौकी खोरी के मुताबिक़ उन्हें टेंपो चालक ने फ़ोन कर एक्सीडेंट की सूचना दी थी.

6 बजकर 26 मिनट- कथित गो रक्षक सीसीटीवी फुटेज में सैंट्रो कार के सामने तस्वीरें लेते हैं और नारेबाज़ी करते हैं,

'हर-हर महादेव, जयकारा वीर बजरंगी, भारत माता की जय' जैसे नारे सीसीटीवी फुटेज में सुने जा सकते हैं.

घटना के समय मौजूद चश्मदीद महिला ने बताया, "उन्होंने कार पर खड़ा होकर बजरंग बली के, गो माता के नारे लगाए."

6 बजकर 41 मिनट- पुलिस की दूसरी पेट्रोलिंग कार आती है, बावजूद इसके घायल युवकों को अस्पताल नहीं पहुँचाया जाता.

7 बजकर 40 मिनट- घटनास्थल से क़रीब छह किलोमीटर दूर युवकों को पुलिस तावडू के लाला हरद्वारी लाल सामुदायिक केंद्र लेकर पहुँची.

अस्पताल के इमरजेंसी एंट्री रजिस्टर के मुताबिक़, "शौकीन, वारिस और नफ़ीस को 7 बजकर 40 मिनट पर अस्पताल लाया गया."

तावडू के लाला हरद्वारी लाल सामुदायिक केंद्र के मेडिकल ऑफ़िसर देवेंद्र शर्मा ने बताया, "7.40 पर पुलिस लड़कों को अस्पताल लाई थी, जिन्हें मैंने एग्जाइमन किया."

उन्होंने बताया, "वारिस की ठोड़ी पर हल्का सा कट था. पेट में वह बहुत ज़्यादा दर्द बता रहा था. उसे दर्द का इंजेक्शन दिया गया.

8 बजकर 20 मिनट- मेडिकल ऑफ़िसर देवेंद्र शर्मा के मुताबिक़ उन्होंने इस समय मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) तैयार की. उन्होंने बताया, "उस समय वह (वारिस) स्टेबल था. अल्ट्रासाउंड और सर्जन ओपिनियन के लिए उसे नलहड मेडिकल कॉलेज रेफ़र किया."

देवेंद्र शर्मा ने बताया, "ठोड़ी के अलावा कहीं और चोट के निशान नहीं थे. इंटरनल इंजरी का शक था इसलिए रेफ़र किया."

"नफ़ीस की राइट आइब्रो पर सूजन थी. उसे एक्स-रे कराने को कहा था. शौकीन की बाईं आँख पर कट था, जिसके चलते उसे टाँके लगाने पड़े. उसे थोड़ी चोट कोहनी और कंधे पर भी लगी थी."

9 बजकर 50 मिनट- तावडू के सरकारी अस्पताल की एंबुलेंस लॉग बुक के मुताबिक़ वारिस और नफ़ीस को अस्पताल की एंबुलेंस से क़रीब 15 किलोमीटर दूर नलहड़ के शहीद हसन खां मेवाती राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया.

एंबुलेंस ड्राइवर अलाउद्दीन के मुताबिक़ वारिस को जब नलहड़ के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया तब उसकी तबीयत ठीक थी, लेकिन जैसे ही हम उन्हें लेकर पहुँचे, तो वारिस बहुत धीरे धीरे मुश्किल से साँस ले पा रहा था."

10 बजकर 30 मिनट- जिस शहीद हसन खां मेवाती राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में वारिस और नफ़ीस को रेफ़र किया, वहाँ के एक डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कागजों को पलटते हुए कहा, "उसे 10 बजकर 30 मिनट पर यहाँ मृत अवस्था में लाया गया था."

वारिस की मौत के बाद परिवार ने कथित गो रक्षकों को मौत का ज़िम्मेदार बताते हुए पुलिस में शिकायत दी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई पुलिस की तरफ़ से नहीं हुई है.

घटनास्थल पर कथित गो रक्षकों की मौजदूगी, घायल वारिस, नफ़ीस और शौकीन को अपने कब्जे में लेना, चश्मदीदों के बयान और मौक़े पर मिले सबूत कथित गो रक्षकों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं.

सवाल है कि पुलिस ने इस मामले में गोरक्षकों की भूमिका की जाँच अभी तक क्यों शुरू नहीं की है?

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