डॉक्टरों और ममता बनर्जी के बीच गतिरोध जारी, लाइव स्ट्रीमिंग पर अड़े डॉक्टर, सीएम बोली-'दो घंटे से इंतजार'
Kolkata News: पिछले महीने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में अपने सहकर्मी के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों और ममता बनर्जी के बीच गतिरोध गुरुवार शाम को भी जारी रहा। 32 डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सचिवालय के बाहर डेरा डाल दिया। लेकिन अंदर जाकर बंगाल की मुख्यमंत्री से मिलने से इनकार कर दिया।
सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि हम अपने डॉक्टर भाइयों और बहनों से मिलने के लिए दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं। हमने उन्हें पत्र लिखा था और उन्होंने कहा था कि वे आएंगे और इसीलिए हमने ये व्यवस्था की है। मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव सभी यहां मौजूद थे।

राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए वीडियो में ममता बनर्जी लगभग खाली पड़े सभागार में बैठी हुई दिखाई दे रही हैं। जहां फर्श पर नीले रंग की मैट बिछी हुई हैं और उनके सामने की ओर कुर्सियां और मेज लगी हुई हैं। मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा कि गतिरोध बैठक को लाइव स्ट्रीम करने की मांग को लेकर था। जिसे राज्य सरकार ने अब तक अस्वीकार कर दिया है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की पांच प्रमुख मांगे हैं। उनकी मांगों में अपने सहकर्मी के बलात्कार और हत्या के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को जवाबदेह ठहराना और सबूतों को नष्ट करना शामिल है। वे आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रमुख डॉ. संदीप घोष के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं। जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है।
डॉक्टरों ने कोलकाता पुलिस प्रमुख के विनीत गोयल के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की है और स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप को बर्खास्त करने की भी मांग की है। इसके अलावा वे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। खास तौर पर सरकारी अस्पतालों में व्याप्त धमकी देने की प्रवृति को खत्म करने की मांग भी शामिल है।
इससे पहले आज डॉक्टरों को राज्य सरकार से मिलने और हड़ताल को समाप्त करने के लिए बातचीत करने के लिए तीसरी बार आमंत्रित किया गया था। जो अब लगातार 34वें दिन है। इस सप्ताह दो आमंत्रण अस्वीकार कर दिए गए। पहला इसलिए अस्वीकार कर दिया गया। क्योंकि इसे स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप ने भेजा था। जिनके इस्तीफे की मांग डॉक्टरों ने की है। दूसरे आमंत्रण को डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की सीमा और बैठक को लाइव-स्ट्रीम करने से इनकार करने के कारण अस्वीकार कर दिया गया।
तीसरा निमंत्रण मुख्य सचिव मनोज पंत की ओर से आया। जिसमें कहा गया कि सरकार डॉक्टरों के पक्ष के साथ बातचीत करने के लिए हमेशा तैयार है और डॉक्टरों से बातचीत की मेज पर आने का आग्रह किया। मुख्य सचिव पंत ने इस बात पर जोर दिया कि लाइव-स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन उन्होंने कहा कि रिकॉर्डिंग की जा सकती है और बातचीत का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हमने दोपहर में डॉक्टरों को ई-मेल किया और वे आए। हमने सभी 32 लोगों को बैठक में शामिल होने की अनुमति दी। लेकिन वे लाइव स्ट्रीमिंग की मांग कर रहे हैं। हमने कहा कि इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। हमने कहा है कि हम इसे रिकॉर्ड करेंगे। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने तब घोषणा करते हुए कहा कि वे तब तक बैठक में नहीं आएंगे। जब तक उनकी सभी पूर्व शर्तें पूरी नहीं हो जाती।
बंगाल के शीर्ष पुलिस अधिकारी राजीव कुमार ने कहा कि लाइव-स्ट्रीमिंग अनुचित लगती है। क्योंकि किसी भी औपचारिक बैठक का लाइव प्रसारण नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि अनुरोध के अनुसार सभी 32 डॉक्टरों को उपस्थित होने की अनुमति देने में कोई समस्या नहीं थी।
जूनियर डॉक्टर पिछले कई दिनों से राज्य के स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। जबकि उनके वरिष्ठ साथी सुप्रीम कोर्ट की याचिका के बाद काम पर लौट आए हैं। उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना की है कि उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई बैठक नहीं हुई।
डॉक्टरों को लिखे अपने पहले पत्र में मुख्य सचिव पंत ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा पार कर ली है। डॉक्टरों को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटना था। उन्होंने कहा कि आप निस्संदेह इस बात की सराहना करेंगे और सहमत होंगे कि कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अदालत के निर्देशों का पालन करना हर किसी का कर्तव्य है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया है। लेकिन इसे बंगाल सरकार पर छोड़ दिया। अब तक ममता बनर्जी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो इसके राजनीतिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।












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