लद्दाख में सेना हर स्थिति के लिए तैयार, डि-एस्कलेशन में लगेगा समय-CDS जनरल रावत
नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को सांसदों की कमेटी को जानकारी दी है कि लद्दाख में डे-एस्कलेशन में समय लग सकता है। यह एक लंबी प्रक्रिया है और देश की सेनाएं हर स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उनके साथ टॉप मिलिट्री ऑफिसर्स की तरफ से सांसदों को जानकारी दी गई है कि लद्दाख में शुरू होने वाली सर्दी के लिए भी सेना पूरी तरह से तैयार है और उसने यहां की खून जमा देने वाली सर्दी से बचने के लिए सारी तैयारियां कर ली हैं।

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CDS रावत ने दी सांसदों को जानकारी
पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) का वेस्टर्न सेक्टर है। मई माह से ही यहां पर चीनी सैनिकों का जमावड़ा है। कई दौर की बातचीत के बाद भी चीनी जवान कुछ हिस्सों पर अड़े हुए हैं। इसकी वजह से एलएसी पर तैनाती में भारी इजाफा किया गया है। सोमवार को हुई मीटिंग में टॉप जनरल मौजूद थे। इस मीटिंग में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सेना किसी भी स्थिति से निबटने के लिए तैयार तो है ही साथ ही चीन के साथ भरोसे में कमी की खाई को भी पाटने की कोशिशें की जा रही हैं। 15 जून को गलवान घाटी में टकराव हिंसक हो गया था और इस टकराव में इंडियन आर्मी के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। जनरल रावत के अलावा मीटिंग में कम से कम चार थ्री स्टार जनरल भी मौजूद थे जिसमें उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी भी शामिल हैं।
टकराव को 100 दिन पूरे
भारत और चीन के बीच जारी टकराव को 100 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। दो अगस्त को भारत और चीन के बीच पांचवें दौर की कोर कमांडर की वार्ता मोल्डो में हुई थी। 10 घंटे तक चली और इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका था। सूत्रों के मुताबिक चीनी सेना, पैंगोंग के उत्तरी किनारे पर स्थित फिंगर 4 और फिंगर 5 से पीछे हट गई थी। यहां तक कि भारत की तरफ से भी फिंगर 2 से कुछ दूरी तक पीछे हटने पर रजामंदी जताई गई थी। लेकिन भारत का मानना है कि अब अगर और पीछे हटते हैं तो इसका मतलब भारतीय पोस्ट्स को खाली करना होगा और इस बात पर सेना बिल्कुल भी तैयार नहीं है।












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