आखिर डीडीसीए है क्या बला..जिसने जेटली की उड़ाई नींद

नई दिल्ली। इस समय दिल्ली की राजनीति में उबाल आया हुआ है, गुस्से में फड़फड़ाये सीएम केजरीवाल पीएम मोदी और उनके करीबी अरूण जेटली पर संगीन आरोप लगाये हैं। केजरीवाल ने दावा किया है कि जेटली को बचाने के चक्कर में उनके दफ्तर पर सीबीआई का छापा पड़ा है। सीबीआई वाले जानबूझकर उनके ऑफिस से डीडीसीए वाली फाइल लेकर गये हैं, जिससे जेटली का भ्रष्टाचार सबके सामने आ जाता इसलिए वो वित्तमंत्री से इस्तीफा मांग रहे हैं।

केजरीवाल के वार पर जेटली ने गु्स्से में कहा कि वो हर ऐरे-गैरे को सफाई नहीं देते लेकिन हद तो तब हो गई जब उन्हीं के पार्टी के सीनियर मेंबर कीर्ति आजाद ने जेटली की डीडीसीए भूमिका पर सवाल खड़े कर दिये हैं जिससे स्पष्ट हो गया कि केजरीवाल पूरी तरह से झूठे और जेटली पूरी तरह से सच नहीं बोल रहे हैं।

आखिर डीडीसीए है क्या बला?

दरअसल आप पार्टी ने कहा है कि डीडीसीए अध्‍यक्ष रहते हुए जेटली ने अपने पद का मिसयूज किया गया है। उन्होंने अरूण जेटली 1999 से 2013 तक दिल्‍ली के क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष थे, इस दौरान काफी अनियमिताएं पायी गई हैं इसलिए 12 नवंबर को दिल्‍ली सरकार ने डीडीसीए पर लगे आरोपों की जांच के लिए पैनल बनाया था। इस पैनल में प्रिंसिपल सेक्रेटरी चेतन बी. सांघी, सेक्रेटरी पुनया सलिल श्रीवास्‍तव और वरिष्‍ठ वकील राहुल मेहरा को शामिल थे जिन्होंने निम्नलिखित रिपोर्ट दी है जिसे पढ़ने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये।

जेटली की लापरवाही

जेटली की लापरवाही

1999 से 2013 तक दिल्‍ली के क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष के रूप में जेटली ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया।

चल संपत्तियों का हिसाब नहीं

चल संपत्तियों का हिसाब नहीं

डीडीसीए चल संपत्तियों का हिसाब नहीं।

नकद लेन देन

नकद लेन देन

20 हजार रुपए से ज्‍यादा के अहम लेनदेन नकद।

कोई हिसाब नहीं

कोई हिसाब नहीं

डायरेक्‍टर और सदस्‍यों को केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना ही भुगतान दिये गये उसका हिसाब भी नहीं।

पांच साल लग गए

पांच साल लग गए

फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम को नए सिरे से बनाने में पांच साल (2002-2007) लग गए।

फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम

फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम

फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम शुरुआती बजट 24 करोड़ रुपए था, जो बढ़ कर 114 करोड़ हो गया जिसका लेखा-जोखा नहीं है।

कोई रिकार्ड नहीं

कोई रिकार्ड नहीं

स्‍टेडियम बनाने से जुड़ा कॉन्‍ट्रैक्‍ट देने से संबधित रिकॉर्ड भी ठीक से नहीं रखा गया।

गैरकानूनी निर्माण

गैरकानूनी निर्माण

एमसीडी और डेल्‍ही अरबन आर्ट्स कमीशन की मंजूरी के बिना गैरकानूनी निर्माण किए गए।

कॉरपोरेट बॉक्‍सेज

कॉरपोरेट बॉक्‍सेज

डीडीसीए ने बिना परमिशन के कॉरपोरेट बॉक्‍सेज बनवाये।

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