स्पुतनिक लाइट वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की DCGI ने दी अनुमति
नई दिल्ली, 15 सितंबर। कोरोना के खिलाफ महामारी में वैक्सीन सबसे कारगर हथियार है। देश में बड़ी संख्या में लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है। इस बीच बड़ी खबर यह सामने आई है कि रूस की स्पुतनिक वैक्सीन की सिंगल डोज क ट्रायल की डीसीजीआई न अनुमति दे दी है। स्पुतनिक लाइट वैक्सीन सिंगल डोज ही मरीज को दी जाएगी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने स्पुतनिक लाइट के तीसरे चरण के ट्रायल को अनुमति प्रदान कर दी है। डीसीजीआई की अनुमति के बाद भारत में लोगों पर इसका तीसर चरण का ट्रायल किया जाएगा।

इससे पहले जुलाई माह में सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ऑफ सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने स्पुतनिक लाइट वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। कमेटी ने कहा था कि स्पुतनिक लाइट स्पुतनिक V के कंपोनेंट 1 की ही तरह है। पहले ही इसके आंकड़ों को भारत की आबादी में ट्रायल किया जा चुका है।
बता दें कि डॉक्टर रेड्डी लैब ने रसियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के साथ साझेदारी की है और दोनों मिलकर स्पुतनिक V वैक्सीन के तीसरे चरण का भारत में ट्रायल किया था। डॉक्टर रेड्डी से कहा गया था कि वह सुरक्षित और बेहतर आंकड़े मुहैया कराएं। हाल ही में द लैंसेट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि स्पुतनिक लाइट कोरोना के खिलाफ 78.6-83.7 फीसदी सक्षम है जोकि कोरोना की दो वैक्सीन की तुलना में बेहतर है। यह स्टडी 40 हजार अर्जेंटीना निवासियों पर की गई थी। स्पुतनिक लाइट के इस्तेमाल से कोरोना के मरीज की अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 82.1-87.6 फीसदी तक कम हो जाती है।
बता दें कि देश में अभी तक कोरोना के तीन करोड़ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अच्छी बात यह है कि कोरोना की वैक्सीन आने के बाद संक्रमण की दर कम हुई है। देश में अभी तक 54 करोड़ से अधिक कोरोना के सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। देश में कोरोना से मरने वालों की दर 1.33 फीसदी है जबकि रिकवी द र97.62 फीसदी है।












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