कैसा होगा बजट,दिन–रात चलता काम

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) ब्रिटिश आर्किटेक्ट हरबर्ट बेकर ने जिस राजधानी नार्थ ब्लाक को डिजाइन किया था, उसमें दिन-रात आगामी आम बजट बनाने के लिए काम चल रहा है। वित्त मंत्रालय के अफसर देर रात तक काम में जुटे रहते हैं।

Day-night work is on to complete the general budget. Arun jaitely to present it.

उसी बजट को ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस द्वारा डिजाइन किए संसद भवन में वित्त मंत्री अरुण जेटली 29 फरवरी को पेश करेंगे वह पहले के मुकाबले अधिक अहम होगा। कायदे से ये नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार का पहला वास्तविक बजट होगा। जुलाई 2014 में पेश किया गया बजट सरकार बनने के छह सप्ताह के भीतर पेश किया गया था और इसलिए उसे उतनी तवज्जो नहीं दी गई।

हालांकि दिसंबर 2014 में वित्त मंत्री की मध्यवार्षिक समीक्षा में विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक निवेश को बल देने की बात कही गई थी लेकिन कमजोर और अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल के मद्देनजर इसे सही नहीं ठहराया जा सकता है।

खर्चों को तर्कसंगत बनाना

संकेत मिल रहे हैं कि वित्त मंत्री अरूण जेटली तेज आर्थिक वृद्धि और खर्चों को तर्कसंगत बनाने के लिए बजट में कुछ बड़े प्रस्ताव ला सकते हैं। वे मानते हैं कि जहां तक सरकार का सवाल है, वह खर्चों को तर्कसंगत बनाने की कोशिश कर रही हैं क्योंकि वह नहीं चाहती कि सरकार अनिश्चितकाल तक उधार के पैसे पर चले। कमाई से ज्यादा खर्च करके अगली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ छोड़ने की पूरी सोच, जिस तरह आज हम अधिक खर्च कर रहे हैं कभी भी विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति नहीं कही जा सकती।

स्थर कर प्रणाली

बजट में स्थिर कर प्रणाली की शुरुआत करने के भी संकेत मिल रहे हैं। इसके साथ ही अधिक राजस्व जुटाने के लिये केंद्र और राज्य कोई भी अनुचित प्रयास नहीं करेंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि कराधान नीति वास्तव में निवेशकों के अनुकूल नहीं रही है। पिछले कुछ महीनों में हमने कर विवादों और ऐसे मुद्दे जिनकी वजह से भारतीय राजस्व ढांचे की बदनामी हुई है उनमें सरलता का प्रयास किया है।

सुधारों वाला बजट

आगामी बजट बिजली, उर्जा, रेलवे और बंदरगाह क्षेत्र में सुधारों पर केंद्रित होगा और साथ ही इन क्षेत्रों में और सार्वजनिक निवेशक का भी संकेत मिला है। वित्त मंत्री का पद संभालने के बाद जेटली अब तक योजना व्यय में 10 प्रतिशत कटौदी कर चुके हैं और ऐसी खबरें आ रही हैं कि योजना के अनुरूप यदि कर संग्रह नहीं बढ़ा तो आगे और कटौती की जा सकती है। इसके अलावा विनिवेश से भी अब तक तय लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी हासिल नहीं किया जा सका है।

बर्बाद हुए दस साल

बीते 10 साल मौके गंवाने का दशक रहा है। लेकिन अब सरकार सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दृढ़ लगती है। ‘यदि हमने 1991 से 2004 की गति को बरकरार रखा होता तो हम तेज गति से आगे बढ़ रहे होते। लेकिन अनिर्णय और गलत निर्णय की श्रृंखला के कारण हमारे सामने ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई जहां हम मौके गंवाते रहे।

इसके साथ ही ये भी उम्मीद करनी चाहिए कि वित मंत्री अरुण जेटली राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और संग्रहालय के लिए अलग से राशि आवंटित करेंगे। उन्होंने अपने पहले बजट में इस बाबत 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा था। जाहिर है, वित मंत्री की इस घोषणा से उन तमाम सैनिकों और देश वासियों को राहत मिलेगी जो स्मारक का इंतजार कर रहे हैं। पर ये राशि पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

इसके साथ ही देश के रीयल एस्टेट क्षेत्र को भी वित मंत्री से बहुत उम्मीदें हैं। उन्हें कोशिश करनी होगी ताकि रीयल एस्टेट सेक्टर में बुजुर्गों के हित सुरक्षित रहें। वित्त मंत्री अरुण जेटली,जो बेहद संवेदनशील इंसान हैं, देश के करोड़ों बुजुर्गों और विकलांगों के मन-माफिक घर के सपने को पूरा करने की दिशा में बड़ी पहल करेंगे। वे रीयल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी उन कंपनियों को टैक्स या अन्य तरीकों से प्रोत्साहित करेंगे अपने बजट प्रस्तावों से ताकि वे बुजुर्गो तथा विकलांगों के मन के घर बनाना चाहते हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ये बेहद बजट होने जा रहा है देश के लिए। बस अब तो इसे आने में बहुत दिन भी नहीं बचे हैं।

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