नरेंद्र मोदी में अमेरिका को नजर आए रोनाल्ड रीगन
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी शायद अब दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हो गए हैं जिनके बारे में दुनिया की राय बंटी हुई है। कोई उनके पक्ष में कुछ बोलता है तो कोई उनके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने लगता है।
मोदी की आलोचनाओं और प्रशंसाओं के बीच ही अमेरिकी न्यूजपेपर डेली कॉलर में एक ऐसा आर्टिकल पब्लिश हुआ है जिसमें नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के साथ कर दी गई है।
इस आर्टिकल को अमेरिका के पूर्व उप सहायक डेविड कोहन ने लिखा है और इसका टाइटल है 'इज इंडिया अबाउट टू इलेक्ट इट्स रीगन।' यह आर्टिकल 14 अप्रैल को अमेरिका में पब्लिश हुआ है और आर्टिकल कोहन ने मोदी और रीगन के बीच कुछ समानताओं को लाने की कोशिश की है।
कोहन ने लिखा है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत पांच हफ्तों तक चलने वाली मैराथन चुनावी प्रक्रिया के बीच अपने अगले प्रधानमंत्री का चयन करने वाला है। हालांकि अभी प्रधानमंत्री कौन होगा इस बारे में कुछ भी कहना काफी मुश्किल है लेकिन ज्यादा विशेषज्ञों का अनुमान है कि नरेंद्र मोदी देश ही देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
इसके बाद ही कोहन ने मोदी और रीगन के बीच मौजूद कुछ समानताओं का जिक्र अपने इस आर्टिकल में किया है। आगे की स्लाइड्स में देखिए कि दोनों नेताओं के बीच आखिर ऐसी कौन सी बातें हैं जो कोहन को एक जैसी ही नजर आती हैं।

चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी
कोहन ने लिखा है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड विल्सन रीगन और नरेंद्र दामोदर दास मोदी दोनों की ही पारिवारिक पृष्ठभूमि एक जैसी है। जहां मोदी ने बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने का काम किया उसी तरह से रीगन भी साधारण तबके वाले नेता ही थे।

रीगन सफल गर्वनर तो मोदी सफल मुख्यमंत्री
कोहन ने अपने इस आर्टिकल में बताया है कि मोदी और रीगन दोनों का पूर्व कार्यकाल काफी सफल रहा है। जहां रीगन एक सफल गर्वनर के तौर पर मशहूर रहे तो वहीं मोदी भी महात्मा गांधी की धरती गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर काफी लोकप्रिय हैं।

मोदी का मोदीनॉमिक्स तो रीगन का रीगनॉमिक्स
कोहन के मुताबिक जिस तरह से रीगन खुली अर्थव्यवस्था के समर्थक थे, उसी तरह से मोदी भी इसका समर्थन करते हैं। खुली और भ्रष्टाचार मुक्त अर्थव्यवस्था की वजह से मोदी के लिए 'मोदीनॉमिक्स' शब्द का प्रयोग होता है तो वहीं रीगन के लिए 'रीगनॉमिक्स' शब्द का प्रयोग किया जाता था।

हमेशा रहते हैं लोगों के निशाने पर
कोहन के मुताबिक सबसे बड़ी बात जो दोनों एक जैसा बनाती है, वह है उनके आलोचक। अमेरिका की तरह भारत में भी काफी सांस्कृतिक भिन्नताओं वाले लोग रहते हैं। रीगन हमेशा ही ऐसे लोगों के निशाने पर रहे। रीगन के अलोचकों की ही तरह मोदी के आलोचक भी उन्हें हमेशा नीचा दिखाने की कोशिशों में लगे रहते हैं।

कैसे करेंगे देश का नेतृत्व
मोदी के आलोचकों को हमेशा लगता है कि कभी चाय बेचने वाला और मुश्किल से अंग्रेजी बोल पाने वाला यह नेता भला कैसे देश का नेतृत्व कर सकेगा। रीगन के लिए भी इस तरह की बातें की जाती थीं। उनके आलोचक मानते थे कि अनसोफेस्टिकेटेड और साधारण सा दिखने वाला यह व्यक्ति भला अमेरिका का नेतृत्व कैसे कर पाएगा।

मोदी की तरह रीगन भी विनाशकारी
कोहन ने लिखा है कि रीगन को लेकर देश में कई तरह की चेतावनियां दी गई थीं कि रीगन अगर देश के राष्ट्रपति बनें तो फिर अमेरिका का विनाश हो जाएगा और कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी के लिए कहा जा रहा है। लेकिन बाद में जो कुछ भी वह सबके सामने हैं और इतिहास का हिस्सा बन चुका है। सोवियत राज्य के पतन के साथ रीगन ने अपने आलोचकों गलत साबित कर दिया।

मोदी की तरह रीगन पर भी भेदभाव का आरोप
कोहन के मुताबिक रीगन को भी नरेंद्र मोदी की ही तरह नस्लभेद के आरोपों को झेलने को मजबूर होना पड़ा था। लोग मानते थे कि रीगन अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकते हैं और साथ ही वह अल्पसंख्यकों को भी नुकसान पहुंचाने वाले नेता बन सकते हैं। ठीक उसी तरह से नरेंद्र मोदी को भी ऐसे आरोप झेलने पड़ते हैं।












Click it and Unblock the Notifications