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स्मार्टफ़ोन से सीआईए तक पहुंच रहा है भारतीयों का डाटा?

मोबाइल इस्तेमाल कर रही युवती
Getty Images
मोबाइल इस्तेमाल कर रही युवती

पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति को बताया है कि स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले 40 फ़ीसदी लोग और चर्चित ऐप जाने-अनजाने पूरी दुनिया के साथ डाटा शेयर करते हैं, जिनमें अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए भी शामिल है.

गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति आधार को विभिन्न सेवाओं से जोड़े जाने से निजता को लेकर पैदा होने वाले ख़तरों पर रिपोर्ट तैयार कर रही है.

इस मामले में बीबीसी ने इस समिति के सदस्य और एनसीपी सांसद माजिद मेमन से बात की. उनका कहना था कि संसदीय समिति ने इस सिलसिले में सवाल उठाए हैं लेकिन इनके बारे में वह तब तक जानकारी नहीं दे सकते, जब तक कि रिपोर्ट को तैयार करके संसद में पेश नहीं कर दिया जाता. मगर उन्होंने कहा कि इतने सारे लोगों की जानकारियां लीक होने से बहुत नुक़सान हो सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Getty Images
प्रतीकात्मक तस्वीर

माजिद मेमन जाने-माने वकील भी हैं. उन्होंने कहा, "मैं एक वकील होने के नाते बताना चाहूंगा कि देश में 125 करोड़ में से 100 करोड़ लोग ऐसे हैं जो अनपढ़ हैं या बहुत थोड़े पढ़े-लिखे हैं या इस हद तक ही पढ़े हैं कि उन्हें अपने अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं है."

उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया है. अब चूंकि यूनियन होम सेक्रेटरी ने कहा है कि इतने लोगों की जानकारी लीक हो सकती है, तो यह आर्टिकल 21 का उल्लंघन है."

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'मोबाइल का डेटा लीक होना ख़तरनाक'

मोबाइल का डेटा लीक होने की बात को माजिद मेमन ने चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा, "आजकल मोबाइल इतना कॉमन हो गया है कि हर कोई इसे इस्तेमाल करता है. देश में करीब 100 करोड़ लोग इसे इस्तेमाल कर रहे होंगे. और अगर इनमें से 40 फ़ीसदी की जानकारी का दुरुपयोग हो रहा है तो इसपर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है."

उन्होंने आशंका जताई, इससे बड़े गुनाह हो सकते हैं, कई साज़िशें रची जा सकती हैं यहां तक कि देशद्रोही या आतंकवादी इसे इस्तेमाल कर सकते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Getty Images
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कैसे लीक हो सकता हो मोबाइल का डेटा?

क्या स्मार्टफ़ोन का डेटा लीक होकर सीआईए तक पहुंच सकता है? अगर इसका जवाब हां है तो यह सब कैसे होता है और इससे कैसे बचा सकता है? बीबीसी ने इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की.

डिजिटल सिक्युरिटी कंपनी लूसीडियस के सीईओ और साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट साकेत मोदी ने बताया कि यह आशंका सच हो सकती है, मगर कितने प्रतिशत लोगों का डाटा लीक हो रहा है, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्टफ़ोन के ज़रिये जानकारियां लीक होने की बात सिर्फ़ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप, अमरीका, रूस या चीन में भी यह बात लागू होती है.

स्मार्टफोन्स
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स्मार्टफोन्स

इसकी वजह पर बात करते हुए मोदी ने कहा, ''स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने वाले ज़्यादातर लोग उसे ब्लैक बॉक्स की तरह इस्तेमाल करते हैं. यानी आपको यह पता नहीं होता कि फ़ोन के अंदर क्या चीज़ें चल रही हैं और इसे किस तरह से बनाया गया है. इसे समझाने की औपचारिक ट्रेनिंग भी कभी किसी को नहीं मिलती."

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क्या डेटा सीआईए तक पहुंच रहा है?

साकेत ने कहा कि 'स्मार्टफ़ोन हमारी प्राइवेट और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. अब हम जो एप्लिकेशन डाउनलोड करते हैं, उन्हें इस्तेमाल करने के लिए एसएमएस, तस्वीरों, लोकेशन, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और कॉल लॉग्स का एक्सेस दे देते हैं. इससे इन एप्स को इस पूरे डेटा को अपने सर्वर पर ले जाने का कानूनी अधिकार मिल जाता है.'

उन्होंने कहा कि यह डाटा सीआईए के पास पहुंच रहा है या नहीं, इस सवाल पर विवाद हो सकता है. उन्होंने कहा, "मुझे यकीन है कि सारे ऐप ऐसा नहीं करते हैं. मगर सीआईए के पास जितना बजट होता है, एडवर्ड स्नोडन और जूलियन असांजे बता चुके हैं कि अमरीका मास सर्विलांस करने की कोशिश करता रहता है, ऐसे में यह हैरानी की बात नहीं होगी कि उन्होंने लोकप्रिय एप्स के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बैक डोर से सेंध लगाने का इंतज़ाम किया हो."

प्रतीकात्मक तस्वीर
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हाल ही में हुए वॉनाक्राई अटैक का उदाहरण देते हुए साकेत बताते हैं कि सरकारी एजेंसियां भी ज़ीरो डेज़ बना रही हैं, जिनका मकसद विभिन्न स्रोतों के डाटा में सेंध लगाना होता है.

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बचने के लिए क्या करना चाहिए?

साकेत बताते हैं लोगों को लगता है कि उन्होंने पैटर्न लॉक या बायोमीट्रिक लॉक लगा दिया तो उनका स्मार्टफ़ोन सुरक्षित है, मगर असल में ऐसा नहीं होता.

उन्होंने कहा, "अगर आपका स्मार्टफ़ोन इंटरनेट से जुड़ा हुआ है तो वह ख़तरे में है. लॉकस्क्रीन सिर्फ़ एक दरवाज़ा है, मगर हैकर अन्य दरवाज़ों से दाख़िल हो सकते हैं."

वह सलाह देते हैं-

  • स्मार्टफ़ोन में कम से कम एप्लिकेशन रखें.
  • कम इस्तेमाल होने वाले एप को इस्तेमाल करके अनइंस्टॉल कर दें.
  • वक्त-वक्त पर यह मॉनिटर करें कि एप्स किस-किस डाटा का परमिशन दिया है.
  • वॉट्सएप वगैह से आए संदिग्ध लिंक, फ़ाइल, म्यूज़िक और वीडियो ओपन न करें.
  • स्मार्टफ़ोन को समझदारी से इस्तेमाल करें.
प्रतीकात्मक तस्वीर
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फ़ोन को सूझबूझ के साथ इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए साकेत कहते हैं, "ध्यान रखें कि कोई भी टेक्नोलॉजी ऐसी नहीं बनी है जिसका तोड़ नहीं निकला. इंटरनेट यही सोचकर इस्तेमाल करें कि उसे हैक किया जा सकता है.

कोई ईमेल लिखते समय, तस्वीर खींचते समय यह सोचें कि कल को यह लीक हो सकती है. अगर इन बातों को ध्यान में रखते हुए आप अपनी सोच बदलेंगे तो ख़तरा नहीं होगा. जब आप ऐसा कोई काम ही नहीं करेंगे तो कल को आपका डाटा लीक हो भी जाए, तब भी आपको दिक्कत नहीं होगी."

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