दस्यु सुंदरी : 11 साल में रेप, 33 साल में बीहड़ से निकल संसद तक पहुंची महिला

फूलन को याद करने का एक संयोग यह भी है कि पहली बार फूलन का अपहरण करने वाले डकैत की 69 साल की आयु में उनके जन्मदिन से दो दिन पहले मौत हो गई। इस रिपोर्ट में दस्यु सुंदरी फूलन से सांसद फूलन तक का सफर- dasyu sundari phoolan d

नई दिल्ली, 10 अगस्त : आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे करने वाला है। हम बेटियों के पराक्रम से अभिभूत हो रहे हैं। इंग्लैंड की धरती पर अभी-अभी समाप्त हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भी भारत की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर ऐसा एहसास कराया मानो भारत की झोली में पदकों की बरसात हो रही हो, लेकिन आज से 47 साल पहले का समय एक बेटी के लिए सुनहरा नहीं स्याह था। 25 जुलाई 2001 को मौत की नींद सुला दी गईं फूलन ने अपने 38 साल के जीवन में ऐसा क्या किया जिससे आज भी उनका नाम लोगों की जुबान पर है ? ये जानना-समझना एक दिलचस्प किरदार के साथ सफर करने जैसा है। फूलन के जन्मदिन- 10 अगस्त के मौके पर वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में दिलचस्प लहजे में जानिए दस्यु सुंदरी फूलन से सांसद फूलन तक का सफर-

फूलन का अपहरण करने वाले की मौत

फूलन का अपहरण करने वाले की मौत

फूलन को याद करने का एक संयोग यह भी है कि पहली बार फूलन का अपहरण करने वाले डकैत की 69 साल की आयु में उनके जन्मदिन से दो दिन पहले मौत हो गई। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 69 वर्षीय छेदा सिंह की मौत सोमवार देर रात उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई मेडिकल कॉलेज में हुई। छेदा के बारे में माना जाता था कि वे उन डकैतों में शामिल थे, जिन्होंने 1980 में दस्यु रानी फूलन देवी का महज 16-17 साल की उम्र में अपहरण किया था। औरैया पुलिस ने इसी साल 5 जून को छेदा सिंह को उसके पैतृक गांव भसौन के बाहर से गिरफ्तार किया था। बीमारी के कारण छेदा को इटावा जेल में भेज दिया गया। तबीयत बिगड़ने पर पहले इटावा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर सैफई मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इटावा जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक, राम ढाणी ने छेदा सिंह की मृत्यु की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि शव को अंतिम संस्कार के लिए परिवार के सदस्यों को सौंप दिया जाएगा।

42 साल पहले दस्यु रानी का अपहरण

42 साल पहले दस्यु रानी का अपहरण

लापता होने के 24 साल बाद गिरफ्तार हुए छेदा सिंह ने खुद अपने सिर पर 50,000 रुपये का नकद इनाम रखा था। छेदा सिंह पर मध्य प्रदेश और कानपुर देहात, जालौन, औरैया और इटावा सहित उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में फिरौती, हत्या, डकैती के लिए अपहरण के 24 मामले दर्ज थे। माना जाता है कि फूलन देवी का अपहरण और उनके कथित प्रेमी विक्रम मल्लाह की हत्या में छेदा सिंह भी शामिल था। पुलिस के मुताबिक छेदा ने आधिकारिक दस्तावेजों में खुद को मृत दिखाया। अपनी पूरी संपत्ति अपने भाई अजैब सिंह के नाम कर दी। गिरफ्तार होने पर वह इलाज के लिए अपने पैतृक गांव आया था।

बेटी से तंग आकर पिता ने पुलिस को सौंपा

बेटी से तंग आकर पिता ने पुलिस को सौंपा

संयोग देखिए कि शायद ये 1975 का साल रहा होगा जब 11 साल की उम्र में ये मासूम फूलन शादी के बंधन में बांध दी गई। आजाद भारत में एक नाबालिग के साथ अधेड़ पति ने जबरदस्ती की। ससुराल से भागकर घर आई बेटी से तंग आकर पिता ने चोरी का आरोप लगाकर हवालात में बंद करा दिया। ये वक्त ऐसा था जब लोग बालिका शिक्षा या अन्य अधिकारों पर जागरुक नहीं थे और शायद यह भी एक संयोग ही कहा जाएगा कि लड़कियों की कम उम्र में शादी या बाल विवाह जैसी चीजें ऐसे दौर में हो रही थीं, जब देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर भी एक बेटी यानी इंदिरा गांधी आसीन थीं।

चंबल की बेटी, अद्वितीय किरदार

चंबल की बेटी, अद्वितीय किरदार

बुंदेलखंड इलाके से आने वाली इस कहानी का किरदार में जो बेटी है, उसे चंबल की बेटी भी कहा जाता है। इसके अलावा लोगों ने इसे बैंडिट क्वीन और दस्यु सुंदरी जैसे नाम भी दिए। चंबल के बीहड़ों ने निकलने वाली ये बेटी देश की संसद तक पहुंची। जनसरोकार का जीवन जीने वाली इस बेटी को नागपंचमी के दिन मौत की नींद सुला दिया गया। आज इसकी बात इसलिए, क्योंकि 10 अगस्त के दिन पैदा हुई फूलन देवी भारतीय इतिहास का अद्वितीय किरदार हैं।

कहानी फूलन देवी की

कहानी फूलन देवी की

फूलन के जीवन का स्याह पक्ष उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ नरसंहार और लूट-पाट की घटनाएं जरूर हैं, लेकिन भारत के चेतनासंपन्न नागरिक होने के नाते फूलन की लाइफ की पृष्ठभूमि जाने बिना फूलन को केवल डकैत या अपराधिक कृत्यों वाले चश्मे से देखना ठीक नहीं। शायद इसलिए तत्कालीन प्रशासन और सरकारों ने फूलन को समाज की मुख्यधारा में लाने का हरसंभव प्रयास किया। हालांकि, आंख के बदले आंख वाले सिद्धांत पर फूलन का भी संभवत: वही हश्र हुआ जो बीहड़ की जिंदगी जीने वाली फूलन की बंदूकों से निकली गोलियों से न जाने कितने लोगों का हुआ होगा।

क्यों मर जाएं किस लिए मर जाएं

क्यों मर जाएं किस लिए मर जाएं

11 साल की उम्र में 25-30 साल बड़े शख्स से शादी हुई। पति यौन शोषण करने लगा। 1979 में डकैतों ने दबंग गैंग के कहने पर फूलन का उनके घर से अपहरण कर लिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीहड़ में कई दिनों तक फूलन के साथ दुष्कर्म हुआ। फूलन के जीवन में यहीं से प्रताड़ना, कष्ट, बलात्कार घृणा और नरसंहार का सिलसिला शुरू हुआ। बीबीसी की रिपोर्ट में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा "हमने भी सोचा... इतने बुरे-बुरे अत्याचार हुए मेरे साथ तो हम क्यों मर जाएं.. जिन्होंने मेरे साथ अत्याचार करा, हम क्यों न उन्हें बता दें कि अगर किसी के साथ तुम ऐसा करोगे तो तुम्हें भी जवाब मिलेगा, क्यों मर जाएं किस लिए मर जाएं।" इसी जिद और आवेश का परिणाम बेहमई हत्याकांड है।

सांसद फूलन देवी की हत्या

सांसद फूलन देवी की हत्या

मीडिया रिपोर्ट में फूलन के दूसरे पति उम्मेद सिंह याद करते हैं कि फूलन ने एकलव्य सेना नाम का संगठन बनाया था। इसकी अध्यक्ष के साथ मिलकर शेर सिंह राणा फूलन के घर आने-जाने लगा। जिस दिन फूलन की हत्या हुई, नागपंचमी का दिन था। उन्होंने बताया कि फूलन ने अपने हाथ से बनाई खीर खिलाई। खीर खिलाने के बाद 11 बजे वह पार्लियामेंट निकल गईं। उन्होंने कहा कि हमारी गाड़ी वर्कशॉप में थी, ऐसे में फूलन शेर सिंह की गाड़ी से संसद पहुंचीं। फूलन के संसद के भीतर जाने के बाद शेर सिंह प्लान बनाते रहे। अपनी गाड़ी फूलन के घर के बाहर गेट के पास खड़ी की। संसद से लौटीं सपा सांसद फूलन, दरवाजे पर खड़ी गाड़ी देखने के बाद गाड़ी से उतर कर अंदर जाने लगीं, उसी समय उन्हें नकाबपोश लोगों ने गोलियों से भून दिया।

पुलिस पर फूलन की मां के आरोप

पुलिस पर फूलन की मां के आरोप

लल्लनटॉप के एक इंटरव्यू में फूलन की मां बुंदेली भाषा में बताती हैं कि फूलन स्वभाव में तेज थीं। गेहूं को लेकर विवाद होने पर फूलन के चचेरे भाई मइयादीन ने कालपी थाने में डकैती की शिकायत की। मइयादीन ने फूलन पर डकैतों से संपर्क होने का आरोप लगाया। मां का आरोप है कि इसके बाद पुलिस फूलन के पीछे पड़ गई। दस्यु सुंदरी और रॉबिनहुड की छवि बनने के बाद पुलिस ने कई बार फूलन को एनकाउंटर में ढेर करने का प्रयास किया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बाद फूलन को पकड़ने में असफल रही पुलिस और प्रशासन ने सरेंडर कराने का प्लान बनाया।

फूलन देवी ने सरेंडर किया

फूलन देवी ने सरेंडर किया

भिंड में एंटी डकैती ऑपरेशन के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी को जिम्मेदारी मिली। बीहड़ों में खोड़न नाम की जगह पर 12 घंटे की पहली मुलाकात के बाद एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी ने भरोसा जीतने को तमाम जतन किए। पत्नी को भी मिलाने ले गए। पत्नी फूलन के लिए शॉल, लिप्सटिक जैसी चीजें ले गईं। फूलन काफी खुश थीं कि आईपीएस की बीवी मिलने आई है। 12 फरवरी 1983 को फूलन ने एमपी के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने सरेंडर कर दिया।

अपनी शर्तों पर सरेंडर करने वाली फूलन

अपनी शर्तों पर सरेंडर करने वाली फूलन

राजेंद्र चतुर्वेदी बताते हैं, डाकबंगले में फूलन को रखा गया। भिंड जाने के लिए गाड़ियों का इंतजाम हुआ। सरेंडर करने जा रहे डकैत पूरे रास्ते फायरिंग करते गए। सरेंडर कराने के समय, खुद सीएम अर्जुन सिंह मौजूद थे। गांधी की फोटो रखी गई थी। फूलन ने गांधी की फोटो स्पर्श करने के बाद 15 हजार लोगों के सामने हथियार ऊपर उठाया। फिर अर्जुन सिंह के पैरों पर हथियार रख दिया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक फूलन ने सरेंडर से पहले कई शर्तें रखीं-

  • यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं, सरेंडर कहीं और।
  • मध्य प्रदेश में सीएम अर्जुन सिंह के सामने सरेंडर, परिवार भी मौजूद रहे।
  • सरेंडर के समय देवी दुर्गा और गांधी की फोटो हो।
  • आत्मसमर्पण के बाद उन्हें या गैंग के किसी सदस्य को फांसी नहीं
  • गैंग मेंबर को 8 साल से अधिक जेल नहीं, रिहाई के बाद रहने के लिए जमीन
  • लंबे मंथन के बाद सरकार फूलन की शर्तों पर राजी
दूसरी फूलन पैदा ही न हो, निकाल दी बच्चेदानी

दूसरी फूलन पैदा ही न हो, निकाल दी बच्चेदानी

सरेंडर के 11 साल बाद तक फूलन जेल में रहीं। पहले ग्वालियर फिर तिहाड़ जेल। जेल में तबीयत खराब हुई, बच्चेदानी निकालनी पड़ी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कहा गया कि दूसरी फूलन पैदा न हो इसलिए बच्चेदानी रिमूव की गई। 1994 में मुलायम सिंह की सरकार में रिहाई हुई। 1995 में उम्मेद सिंह के साथ शादी की। फरवरी में नागपुर की दीक्षाभूमि में फूलन और उनके पति ने बौद्ध धर्म अपना लिया। 1996 और 1999 में मिर्जापुर से लोक सभा चुनाव जीतीं। तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने उन्हें पहली बार मिर्जापुर से टिकट दिया था। पहली बार 1996 से 1998 तक सांसद रहीं। 1999 के आम चुनाव में फूलन फिर से मिर्जापुर की सांसद बनीं।

फूलन और उनकी हत्या करने वाले पर फिल्म !

फूलन और उनकी हत्या करने वाले पर फिल्म !

बीहड़ का जीवन पीछे छोड़ने के बाद जनता के बीच लोकप्रिय हो रहीं फूलन 25 जुलाई 2001 को चिरनिद्रा में सो गईं। कथित तौर पर बेहमई हत्याकांड का बदला लेने के लिए शेर सिंह राणा ने फूलन के घर के सामने ही उनकी हत्या कर दी। पुलिस की थ्योरी के मुताबिक दो और लोगों ने हत्या में शेर सिंह का साथ दिया था। हालांकि, शेर सिंह खुद को बेगुनाह बताते हैं। फूलन को बैंडिट क्वीन का नाम बेहमई नरसंहार के बाद मीडिया ने दिया था। 1994 में शेखर कपूर ने इसी टाइटल से मूवी भी बनाई। फूलन की हत्या के दोषी पाए गए शेर सिंह राणा पर आधारित मूवी में विद्युत जामवाल अभिनय कर रहे हैं। श्रीनारायण सिंह के निर्देशन में बन रही फिल्म को विनोद भानुशाली बना रहे हैं।

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