राफेल डील: डसॉल्ट के सीईओ बोले-मोदी सरकार ने रिलायंस को पार्टनर बनाने के लिए नहीं डाला दबाव!
नई दिल्ली। फाइटर जेट राफेल बनाने वाली फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने डील को लेकर एक अहम बयान दिया है। ट्रैपियन ने सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कहा है कि कंपनी ने रिलायंस डिफेंस को डील के समय पार्टनर के तौर पर चुना था। भारत सरकार की ओर से कंपनी पर रिलायंस को बतौर पार्टनर चुनने का कोई दबाव नहीं डाला गया था। आपको बता दें कि इस डील को लेकर जुलाई माह से घमासान जारी है। सरकार के विपक्ष का आरोप है कि उसने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचाने के लिए उसे डील में पार्टनर बनाया। ट्रैपियर का यह बयान काफी हद तक सरकार के लिए राहत पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।

इसलिए रिलायंस को चुना था पार्टनर
ट्रैपियर ने कहा कि डसॉल्ट ने रिलायंस को अपना पार्टनर चुना क्योंकि अनिल अंबानी की कंपनी की जमीन नागपुर के बाहर एयरपोर्ट के करीब थी। यहां पर वह आसानी से फैक्ट्री सेट कर सकते थे। उन्होंने आगे कहा कि डसॉल्ट रिलायंस और हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) दोनों के साथ बातचीत कर रही थी। ट्रैपियर का दावा है कि एचएएल को इस बात के बारे में मालूम था कि उनकी कंपनी जेट की डील के लिए रिलायंस को पार्टनर बनाने पर चर्चा कर रही है। ट्रैपियर का बयान फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकोइस होलांद के उस बयान से एकदम अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डसॉल्ट एविएशन के पास रिलायंस डिफेंस को पार्टनर चुनने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।
क्या बोले थे पूर्व राष्ट्रपति
होलांद ने कहा थाकि भारत सरकार की ओर से रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया गया था और डसॉल्ट ने अंबानी के साथ बातचीत की। होलांद का बयान आने के बाद विपक्ष के तेवर केंद्र सरकार के खिलाफ और तेज हो गए थे। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'चोर' तक कह डाला था। बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यहां पर इन तीनों ने भारत और फ्रांस के बीच हुई राफेल डील पर एफआईआर तक दर्ज करने की मांग की है।












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