'40 साल और जिंदा रह सकता हूं', 90वें जन्मदिन पर बोले दलाईलामा, पीएम मोदी ने कही खास बात
Dalai lama 90th birthday: तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु और वैश्विक शांति के प्रतीक 14वें दलाई लामा आज भी करोड़ों लोगों के लिए एक आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्होंने जीते-जागते बोधिसत्व करुणा, प्रेम और सहिष्णुता को अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया है। तिब्बती समाज उन्हें श्रद्धा से "ग्यालवा रिनपोछे" कहते हैं, जिसका अर्थ है - सम्माननीय रक्षक।
उनकी 90वीं जयंती सिर्फ तिब्बत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव बन चुकी है। बीते छह दशकों से निर्वासन में रहकर, दलाई लामा ने जो शांति, दया और मानवता का संदेश दुनिया को दिया है, वह सीमाओं से परे जाकर हर दिल को छूता है।

तिब्बती धर्मगुरु ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। शनिवार को मैकलोडगंज के त्सुगलागखांग मंदिर में आयोजित एक दीर्घायु प्रार्थना समारोह में उन्होंने कहा कि "मैं अभी 30-40 साल और जी सकता हूं। मुझे विश्वास है कि बोधिसत्व अवलोकितेश्वर के आशीर्वाद से मिल रहा है।"
PM Modi ने खास अंदाज में दी बधाई
इस खास मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, महान 14वें दलाई लामा को उनके 90वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें प्रेम, करुणा, धैर्य और नैतिक अनुशासन का प्रतीक बताते हुए उनकी दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं 140 करोड़ भारतीयों की ओर से परम पावन दलाई लामा जी को उनके 90वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। वे प्रेम, करुणा, धैर्य और नैतिक अनुशासन के प्रतीक हैं। उनके संदेशों ने सभी धर्मों में सम्मान और प्रेरणा को जन्म दिया है। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं।"
धर्मशाला में भव्य आयोजन
दलाई लामा के जन्मदिन के मौके पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के निकट पंथाघाटी स्थित दोरजिडक मठ (Dorjidak Monastery) में निर्वासित तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएँ कीं। इस अवसर पर वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा से भर गया।
5 जुलाई को, यानी दलाई लामा के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर, धर्मशाला में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजय जॉली और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने दलाई लामा के योगदान की सराहना की और उनके शांतिपूर्ण दृष्टिकोण को भारत के लिए प्रेरणादायक बताया।
Dalai lama: करुणा के सागर, तिब्बत के आध्यात्मिक सिरमौर
तिब्बत के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता और दुनिया भर में शांति, करुणा और सहिष्णुता के प्रतीक 14वें दलाई लामा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उन्हें तिब्बती समुदाय में "ग्यालवा रिनपोछे" (अर्थात् सम्माननीय protector) के नाम से जाना जाता है। वे न केवल तिब्बत के धार्मिक प्रमुख हैं, बल्कि दलाई लामा परंपरा के वर्तमान उत्तराधिकारी भी हैं, जो बौद्ध दर्शन के अनुसार करुणा और बोधिसत्व के विचार को जीवन में उतारते हैं।
#WATCH | Dharamshala | Union Ministers Kiren Rijiju, Rajiv Ranjan (Lalan) Singh and Hollywood actor Richard Gere and others present rise to the Tibetan and Indian national anthems at the beginning of the 90th birthday celebrations of the 14th Dalai Lama pic.twitter.com/UC2DZcJrxu
— ANI (@ANI) July 6, 2025
14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के उत्तर-पूर्वी इलाके के ताक्सर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके जन्म के समय उनका नाम ल्हामो धोन्डुप रखा गया था। मात्र दो वर्ष की आयु में उन्हें 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म मानकर पहचान लिया गया। इसके बाद अक्टूबर 1939 में उन्हें तिब्बत की राजधानी ल्हासा लाया गया। फिर 22 फरवरी 1940 को उन्हें तिब्बत के राज्याध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख के रूप में औपचारिक रूप से प्रतिष्ठित किया गया।
उनका नया नाम तेनज़िन ग्यात्सो रखा गया और महज छह वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना धार्मिक और दार्शनिक शिक्षा का सफर आरंभ किया। दलाई लामा के जीवन की यह यात्रा न केवल एक आध्यात्मिक साधक की कहानी है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे एक साधारण बालक, समय के साथ एक वैश्विक शांति दूत और मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
दलाई लामा का जीवन संघर्ष और निर्वासन
1949 में जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया, तो उसके ठीक एक वर्ष बाद 1950 में दलाई लामा ने राजनीतिक जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। इसके बाद 1959 में तिब्बती लोगों द्वारा स्वतंत्रता की माँग को लेकर उठे राष्ट्रीय विद्रोह को चीन द्वारा बलपूर्वक कुचल दिया गया।
इस दमन के बाद 14वें दलाई लामा को लगभग 80,000 तिब्बती शरणार्थियों के साथ भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से लेकर आज तक, वे भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं और शांति, करुणा, अहिंसा और धार्मिक सहिष्णुता के संदेश को दुनिया भर में प्रचारित कर रहे हैं।
'दलाई लामा' का क्या है अर्थ ?
'दलाई लामा' शब्द मंगोलियन भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है - "बुद्धिमत्ता का महासागर" (Ocean of Wisdom)। दलाई लामा को 'बोधिसत्व अवलोकितेश्वर' का अवतार माना जाता है। बोधिसत्व वे प्रबुद्ध आत्माएँ होती हैं, जिन्होंने अपनी मोक्ष प्राप्ति को स्थगित कर, दूसरों की सेवा हेतु पुनर्जन्म लेना स्वीकार किया होता है - यही तिब्बती बौद्ध धर्म की परंपरा का मूल दर्शन है।
एक वैश्विक आध्यात्मिक युग की गूंज
पिछले छह दशकों से दलाई लामा मानवता, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देते आ रहे हैं। उन्होंने न केवल तिब्बती समुदाय, बल्कि पूरी दुनिया को यह सिखाया है कि सच्ची आध्यात्मिकता संघर्ष, सेवा और त्याग से जुड़ी होती है, न कि सत्ता या पद से। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए संदेश से यह स्पष्ट होता है कि भारत सरकार और जनता, दलाई लामा के योगदान को केवल तिब्बती समुदाय के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवता के वैश्विक प्रतीक के रूप में देखती है।
दलाई लामा का 90वां जन्मदिन न केवल तिब्बती समुदाय, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव है। प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाओं से यह स्पष्ट है कि भारत, उनके जीवन और कार्य को कितनी गहराई से सम्मान देता है। ऐसे व्यक्तित्व आज की दुनिया में शांति और समरसता की सच्ची प्रेरणा हैं।
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