जानिए चलन से बाहर हुए नोट छापने में लगेंगे कितने महीने
सरकार का दावा है कि जल्द ही नए नोट बाजार में छा जाएंगे।
नई दिल्ली। नए नोटों के बाजार में आने पर सरकार का दावा और हकीकत एक दूसरे से उलट है। अगर देश भर की करेंसी प्रिंटिंग प्रेसों की क्षमता की बात करें तो बाजार में 500 रुपए की नई नोट कम से कम 6 महीने में पूरी तरह से आएंगी।
500 रुपए की नोट की संभवतः 10 नवंबर के बाद शुरू हुई है।
जब तक ये नोट समुचित मात्रा में बाजार में नहीं आ जाती तब तक 'करेंसी पेन' उठाना पड़ेगा क्योंकि 2,000 की नोट छोटी खरीददारी के दौरान उनका भुनना मुश्किल है।

2,000 की नोट छप चुकी है नोट!
हालांकि, एक आकलन के अनुसार 2,000 की नई नोट पर्याप्त मात्रा में छप चुकी है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 500 और 1,000 की नोट को 8 नवंबर को विमुद्रीकृत कर के देश को परेशानी में डाल दिया था।
बैंकों के बाहर लंबी लंबी ललाइनें रोज लग रही हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त मात्रा में करेंसी उप्लब्ध नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार यह दावा करने में काफी आशावान है कि पर्याप्त मात्रा में करेंसी जल्द ही चलन में आ जाएगी।
ऐसा इसिलए है क्योंकि देश में प्रिंटिंग प्रेसों की क्षमता ऐसे किसी औचक समय के लिए सीमित है। देश में 4 करेंसी प्रेस हैं। एक महाराष्ट्र स्थित नासिक, दूसरा मध्य प्रदेश स्थित देवास, तीसरा पश्चिम बंगाल स्थित सलबोनी और चौथा कर्नाटक स्थित मैसूर में।
पहले दो यानी नासिक और देवास के प्रिंटिंग प्रेस केंद्र सरकार के अधीन हैं वहीं बाकी दो सलबोनी और मैसूर के प्रेस भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL)के हैं जो परा तरह के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की पूर्णत: स्वाधिकृत सहायक संस्थाएं हैं।
नासिक और देवास के प्रिटिंग प्रेसों की क्षमता देश के चलन में कुल छपी मुद्रा की 40 फीसदी हैं वहीं अन्य दो, सलबोनी और मैसूर की क्षमता 60 फीसदी है।
छाप सकते हैं 16 बिलियन नोट
BRBNMPL की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार ये 2 शिफ्ट में करीब 16 बिलियन नोट छाप सकते हैं। इस हिसाब से देश की सभी प्रिंटिंग प्रेसों की नोट छापने की क्षमता 26.66 बिलियन नोट है।
अगर सभी तीन शिफ्ट चलाए जाते हैं तो चारों प्रेस एक साल में 40 बिलियन नोट छापने में सक्षम होंगे।
अब सरकार के अनुसार 500 और 1,000 की नोट को विमुद्रीकृत करने के बाद 17.54 लाख करोड़ रुपए अवैध हो गए।
कुल विमुद्रीकृत की गई राशि में से 45 फीसदी 500 के नोट थे। जिसका मतलब करीब 7.89 लाख करोड़ रुपए, 500 के नोट के थे। वहीं 1,000 रुपए की नोट कुल विमुद्रीकृत की गई राशि का 39 फीसदी है यानी 6.84 लाख करोड़ रुपए विमुद्रीकृत हुए।
तब भी लगेगा समय
यदि 2,000 रुपए की नोट 1,000 रुपए की जगह छापी जा रही है तो भी उन्हें 1,000 से विमुद्रीकृत हुए कुल राशि का सिर्फ आध यानी 3.42 लाख करोड़ नोट छापनी होगी।
जैसा कि कुछ प्रिंटिंग प्रेस अधिकारियों की ओर से यह दावा किया गया कि नोट छापने का काम सितंबर से ही शुरू हो गया था तो अब तक 2,000 के सारे नोट छापे जा चुके होंगे।
10 नवंबर को शुरू हुई छपाई
लेकिन सवाल 500 रुपए की नोट का है जो जिसकी छपाई संभवतः 10 नवंबर को शुरू हुई है।
अगर यह माना जाए कि मशीन चलने का 80 फीसदी समय 500 रुपए की नई नोटों को छापने में लगाया जाए तो भी कम से कम 5.9 महीने लगेंगे। बाकी के 20 फीसदी समय 5 से 100 रुपए तक की नोट को छापने में लगेंगे।
इसलिए अभी के लिए यह माना जाना चाहिए कि अप्रैल तक नए नोट सर्कुलेशन में आ सकेंगे।
सूरजेवाला ने कहा...
इसी मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला कहना है कि मिन्ट 1 महीने में सिर्फ 300 करोड़ रुपए नोट छाप सकता है। इस गति से कम से कम 7 महीने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 500 और 1,000 को विमुद्रीकृत कर 2100 करोड़ रुपए निकाल लिए। भारतीय प्रिंटिंग प्रेसों 300 करोड़ नोट प्रति माह छाप सकते हैं।
ट्विटर पर सूरजेवाला ने लिखा है कि मोदी सरकार की ओर से योजना की कमी और कुप्रबंधन के चलते ऐसा हो रहा है।
#DeMonetisation.Evidence of lack of planning & mismanagement by Modi Govt galore!Stop living in denial Jaitleyji &act now for heaven's sake.
— Randeep S Surjewala (@rssurjewala) November 17, 2016












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