झारखंड चुनाव: CRPF की ईकाई ने 'जानवरों जैसा बर्ताव' करने का लगाया आरोप, कही ये बात

रांची। झारखंड के विधानसभा चुनाव के लिए तैनात की गई सीआरपीएफ की एक ईकाई ने आरोप लगाया है कि यहां उनके साथ 'जानवरों की तरह बर्ताव' किया गया है। इन्होंने दावा किया है कि खाने और पीने के लिए इन्हें पानी भी टैंक से दिया गया। आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है।

कंपनी कमांडर ने खत लिखा है

कंपनी कमांडर ने खत लिखा है

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 222 वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट-रैंक कंपनी कमांडर ने इसे लेकर राज्य प्रशासन और दिल्ली के मुख्यालयों में खत भी लिखा है। उन्होंने दावा किया है कि सात दिसंबर को दूसरे चरण के मतदान में अपनी ड्यूटी खत्म करने वाले सैनिकों को पानी या फिर कोई स्थानीय सहायता उत्पन्न नहीं करवाई गई। ये लोग 17 किमी पैदल समेत 200 किमी की दूरी तय कर रांची पहुंचे थे।

झारखंड पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक ने आरोप खारिज किए

झारखंड पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक ने आरोप खारिज किए

हालांकि झारखंड पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक एमएल मीणा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, 'ऐसी कुछ परेशानियां थीं, लेकिन उन्हें जल्द ही सुलझा लिया गया। राज्य में चुनावी दलों और सुरक्षा बलों की भारी आवाजाही के कारण शुरुआत में कुछ समस्याएं थीं। राज्य में सुरक्षा बलों की 275 कंपनियां आई हैं। ये ईकाई ट्रांजिट कैंप में थी, उनकी समस्याओं का ध्यान भी रखा जा रहा था।'

प्रशासनिक व्यवस्था 'अत्यधिक अपमानजनक और दयनीय'

प्रशासनिक व्यवस्था 'अत्यधिक अपमानजनक और दयनीय'

जानकारी के मुताबिक 100 सैनिकों की गोल्फ कंपनी के निदेशक सीआरपीएफ अधिकारी ने दावा करते हुए कहा है कि प्रशासनिक व्यवस्था 'अत्यधिक अपमानजनक और दयनीय' थी। उन्होंने कहा कि जब उनके सैनिक रविवार रात रांची के खेलगांव परिसर पहुंचे तो वहां ना तो पीने के लिए और ना ही खाना पकाने के लिए पानी की कोई व्यवस्था थी। बाद में जब पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई तो उस टैंक से पानी दिया गया, जिसका आमतौर पर अग्निशमन और जमीनी रखरखाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

केवल खिचड़ी ही बन पाई

केवल खिचड़ी ही बन पाई

उन्होंने आगे बताया कि काफी देर हो गई और सैनिक भूखे भी थे, तो उनके पास इस पानी का इस्तेमाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। ये ईकाई केवल खिचड़ी ही बना पाई और वो भी आधी रात तक सैनिकों को परोसी गई। अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा, 'सैनिकों के साथ जानवरों की तरह बर्ताव किया गया, उनके सम्मान का कोई ध्यान नहीं रखा गया।'

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