बढ़ते क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल के साथ बढ़ रहा है डिफॉल्ट का खतरा, RBI की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Credit Card Defaults: आजकल हर चीज डिजिटल हो रही है - खाना ऑर्डर करना हो या ऑनलाइन शॉपिंग, लोग अब कैश की जगह कार्ड स्वाइप करना ज्यादा पसंद करते हैं। खासकर क्रेडिट कार्ड का चलन तो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक बड़ी तेजी से बढ़ा है। एक ओर जहां यह सुविधा लोगों को आसान उधार और कैशबैक जैसे फायदों का लालच देती है, वहीं दूसरी ओर यह एक ऐसे जाल की तरह बनती जा रही है जिससे बाहर निकलना आसान नहीं होता।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। देश में क्रेडिट कार्ड से जुड़े डिफॉल्ट यानी NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। यानी लोग कार्ड से तो खर्च कर रहे हैं, लेकिन वक्त पर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। तीन सालों में ऐसे मामलों में 500% तक का इजाफा हुआ है, जो न केवल बैंकों के लिए, बल्कि पूरे आर्थिक ढांचे के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

एनपीए में बड़ी बढ़ोतरी
हालांकि, इस तेजी के साथ एक चिंता की बात भी सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPAs) यानी डिफॉल्ट की रकम दिसंबर 2024 तक के 12 महीनों में 28.42% बढ़कर ₹6,742 करोड़ हो गई है। दिसंबर 2023 में यह राशि ₹5,250 करोड़ थी। यानी एक साल में लगभग ₹1,500 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
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तीन साल में 500% की छलांग
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2020 में क्रेडिट कार्ड एनपीए ₹1,108 करोड़ थी। यानी तीन साल में इसमें 500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
बैंक कर रहे हैं रिकवरी की कोशिश, लेकिन चुनौती बरकरार
हालांकि, भारतीय बैंकों ने कुल एनपीए में कुछ हद तक कमी लाने में सफलता पाई है, लेकिन पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से जुड़े एनपीए लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
बिना सिक्योरिटी के होते हैं ये कर्ज
क्रेडिट कार्ड का बकाया पूरी तरह असुरक्षित (unsecured) होता है और उस पर ब्याज दरें भी बहुत ज्यादा होती हैं। यदि कोई ग्राहक 90 दिनों से ज्यादा समय तक अपना बिल नहीं चुकाता है, तो वह अकाउंट एनपीए माना जाता है। ऐसे मामलों में बैंक 42% से 46% सालाना तक की ब्याज दर वसूलते हैं और ग्राहक की क्रेडिट स्कोर पर भी बुरा असर पड़ता है।
बढ़ती संख्या में जारी हो रहे हैं कार्ड
जनवरी 2025 तक बैंकों ने 10.88 करोड़ क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं। यह आंकड़ा जनवरी 2024 में 9.95 करोड़ और जनवरी 2021 में 6.10 करोड़ था। सिर्फ जनवरी 2025 में ही क्रेडिट कार्ड से ₹1.84 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ, जबकि जनवरी 2021 में यह राशि ₹64,737 करोड़ थी।
लेकिन सतर्क रहना जरूरी
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अगर समय पर भुगतान न किया जाए तो यह एक बड़ी आर्थिक समस्या बन सकता है। बढ़ते एनपीए का मतलब है कि लोग ज्यादा उधार तो ले रहे हैं, लेकिन समय पर चुका नहीं पा रहे हैं, जो बैंकों के लिए चिंता की बात है।
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