कोरोना से ठीक हुए करीब आधे मरीजों में सामने एक और बड़ी दिक्कत, Lancet की रिसर्च में खुलासा
कोरोना से संक्रमण होने के दो साल बाद भी लोगों को वायरस से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
नई दिल्ली, 12 मई: कोरोना से संक्रमण होने के दो साल बाद भी लोगों को वायरस से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। संक्रमण के दो साल बाद भी अस्पताल में भर्ती लोगों में कम से कम एक लक्षण बचा हुआ है। मेडिकल जर्नल द लैंसेट के फोलोअप स्टडी में यह बात सामने आई है।

लक्षणों का असर अधिक रहा
लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन ने एक अध्ययन कहा कि सबूत बताते हैं कोविड से ठीक होने वाले लोगों के कई अंगों पर लंबे समय तक असर डालता है। लैसेंट ने अपने अध्ययन में कहा कि कोविड से ठीक होने वाले लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुए। अधिकांश लोग तो दो वर्षों के भीतर अपने मूल काम पर लौट आए लेकिन लक्षणों का असर काफी अधिकर रहा।
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ये करने की जरूरत
सामान्य आबादी की तुलना में कोरोना से उबरे लोगों की स्वास्थ्य स्थिति दो वर्षों में उल्लेखनीय रूप से कम थी। अध्ययन के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि लॉन्ग कोविड के लक्षणों का पता लगाने और लंबे कोविड के जोखिम को कम करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप विकसित करने की जरूरत है।
निगराणी बेहद जरूरी
लैंसेट के मुताबिक, तेज संक्रमण के बाद लंबे समय तक कोविड लगातार दो साल तक रह सकता है। इसकी निगराणी करना बेहद जरूरी है। जिससे पता लगाया जा सके कि कोविड से उबरे हुए मरीज कब पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे। साथ ही लैंसेट ने कहा कि भविष्य में इससे संबंधित और जानकारी जुटाएंगे, इससे ग्रसित लोगों को समय से पहले ठीक करने की रणनीति का पता लग सके।












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