पूर्व रॉ अधिकारी पर गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप, जान पर खतरा, अदालत ने दी विशेष सुरक्षा
देश की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व अधिकारी विकास यादव इन दिनों गंभीर कानूनी और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन पर अपहरण और जबरन वसूली जैसे मामलों में आरोप हैं और इसके अलावा अमेरिका ने उन पर खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा दिसंबर 2023 में गिरफ्तार किए जाने के बाद यादव को जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
हालांकि विकास यादव का दावा है कि वह खतरनाक गुटों के निशाने पर हैं और उनकी जान को गंभीर खतरा है। इन हालात में उन्होंने अदालत से शारीरिक रूप से उपस्थित होने से छूट की मांग की थी। जिसे सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए स्वीकार कर लिया गया है। अदालत ने उनके तर्क को मान्य ठहराते हुए उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनिवार्यता को भी खारिज कर दिया है। क्योंकि इससे उनके स्थान का पता लगाने का जोखिम हो सकता है।

व्यक्तिगत जानकारी के सार्वजनिक होने से बढ़ा खतरा
विकास यादव के अधिवक्ता आरके हांडू और आदित्य चौधरी ने अदालत में तर्क दिया कि उनके पते, तस्वीरें और पृष्ठभूमि की जानकारी सार्वजनिक हो जाने के कारण उनकी सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि शत्रुतापूर्ण संगठनों द्वारा उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और इस वजह से वह एकांत में रहने के लिए मजबूर हैं। अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 फरवरी 2025 तय की है। जिससे यादव को अस्थायी राहत मिली है।
अमेरिकी अभियोग ने बदली दिशा
विकास यादव का मामला तब और पेचीदा हो गया। जब अक्टूबर 2024 में अमेरिका ने उन पर खालिस्तानी समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप लगाया। आरोप के मुताबिक यादव ने एक अन्य भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता के साथ मिलकर 100,000 अमेरिकी डॉलर के बदले पन्नू की हत्या की साजिश रची थी। हालांकि यह साजिश उस वक्त विफल हो गई। जब इस काम के लिए किराए पर लिया गया हत्यारा एफबीआई का मुखबिर निकला।
विकास यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को साजिश का शिकार बताया है। उनका दावा है कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है और वह इस मामले में निर्दोष हैं।
जासूसी और आतंकवाद-रोधी अभियानों की जटिलता
विकास यादव का मामला भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जासूसी और आतंकवाद-रोधी अभियानों की जटिलता को उजागर करता है। जहां सही और गलत के बीच की रेखाएं अक्सर धुंधली हो जाती हैं। यादव के खिलाफ आरोप और उनके द्वारा दी गई दलीलें अंतरराष्ट्रीय साजिश, व्यक्तिगत खतरे और कानूनी लड़ाई की एक जटिल तस्वीर पेश करती हैं।
जैसे-जैसे कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यादव के खिलाफ आरोपों की वास्तविकता और उनके द्वारा झेली जा रही सुरक्षा चिंताओं की वैधता क्या है। फिलहाल अदालत का शारीरिक उपस्थिति से छूट देना उनके लिए एक बड़ी राहत है। लेकिन उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों ने उनकी स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।












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