Cough Syrup Row: MP से राजस्थान तक मासूमों की मौत का गुनहगार कौन? जहरीला सिरप या अंधा सिस्टम! अब तक क्या हुआ?
Cough Syrup Raw: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले में पिछले एक महीने में नौ मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। परिजनों का आरोप है कि इन बच्चों की जान उन खांसी की सिरप-'Coldrif' और 'Nextros DS'-से गई जो स्थानीय क्लीनिकों में बुखार और खांसी के इलाज के लिए दी गई थी।
इन घटनाओं ने भारत की दवा निगरानी प्रणाली और सरकारी जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश भर में सिस्टम की लापरवाही पर कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन बेगुनाह मासूमों की मौत का गुनहगार कौन हैं?

समय-समय पर दवां की जांच पड़ताल क्यों नहीं की गई? सवाल कई हैं लेकिन जवाब अब खामोशी है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले पर अब तक क्या-क्या हुआ...
Cough Syrup Deaths: अब तक क्या-क्या हुआ?
छिंदवाड़ा के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले बच्चों को पहले हल्का बुखार हुआ। स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हें खांसी-बुखार की दवा के रूप में 'Coldrif Syrup' या 'Nextros DS' दी। लेकिन सिरप पीने के कुछ ही दिनों बाद बच्चों में उल्टी, दस्त और पेशाब बंद होना जैसे लक्षण दिखने लगे - जो कि डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol - DEG) से ज़हरखुरानी के क्लासिक संकेत हैं। ही वही जहरीला केमिकल है जिसने 2022 में गाम्बिया में सैकड़ों बच्चों की जान ले ली थी।
🔶 केंद्र सरकार की सख्त एडवाइजरी
इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर दो साल से कम उम्र के बच्चों को कोई भी खांसी की सिरप न देने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी में कहा गया -"ये दवाएं आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सही नहीं हैं। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों में भी इनका उपयोग डॉक्टर से पूछ कर ही दें"
🔶 मध्य प्रदेश सरकार का रुख - 'रिपोर्ट का इंतज़ार'
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि अब तक की जांच में किसी जहरीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है। उनके मुताबिक, "जो सैंपल लिए गए हैं, उनमें ऐसा कोई तत्व नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि मौतें दवा की वजह से हुईं। बाकी रिपोर्ट का इंतज़ार है।"
लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना है कि बच्चों की किडनी फेल होने की वजह कोई टॉक्सिक सब्सटेंस है-संभवतः वही जहरीला तत्व जो खांसी की सिरप में मिला हुआ था। यानी राज्य सरकार के बयानों और अधिकारियों के निष्कर्षों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है।
🔶 तमिलनाडु का त्वरित एक्शन: 24 घंटे में जांच, रिपोर्ट और बैन
जहां मध्य प्रदेश में जांच 'रिपोर्ट का इंतज़ार' में अटकी है, वहीं तमिलनाडु ने प्रशासनिक फुर्ती दिखाते हुए सिर्फ 24 घंटे में कार्रवाई पूरी कर ली। 1 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सरकार ने तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट को पत्र भेजा, जिसमें बताया गया कि 'Coldrif Syrup' (Batch SR-13) - जिसे कांचीपुरम स्थित स्रेशन फार्मास्युटिकल्स ने बनाया था - बच्चों की मौत से जुड़ा हो सकता है।
तमिलनाडु की दवा नियंत्रण टीम उसी शाम फैक्ट्री पहुंची और निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि -
- फैक्ट्री में 39 गंभीर (Critical) और 325 बड़ी (Major) कमियां पाई गईं।
- Coldrif सहित पांच सिरप के सैंपल लिए गए।
- सभी स्टॉक फ्रीज़ कर दिए गए और चेन्नई की सरकारी लैब को भेजे गए ताकि DEG और Ethylene Glycol की जांच हो सके।
- "Coldrif Syrup (Batch SR-13) में 48.6% Diethylene Glycol मौजूद था।"
- यह वही जहरीला रसायन है जो पेंट और ब्रेक फ्लूड में इस्तेमाल होता है और किडनी फेल्योर का कारण बनता है।
इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने फौरन कार्रवाई करते हुए सिरप को 'Not of Standard Quality' घोषित किया गया। इसके साथ ही पूरे राज्य में इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई। कंपनी को उत्पादन बंद करने का आदेश (Stop Production Order) दिया गया। लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
पड़ोसी राज्यों ओडिशा और पुडुचेरी को भी अलर्ट जारी किया गया। तमिलनाडु की डिप्टी डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल एस. गुरुभारथी ने बताया -"यह भारत का पहला मामला है जहां सरकारी छुट्टी के बावजूद 48 घंटे में जांच, सैंपलिंग, टेस्टिंग और स्टॉप-प्रोडक्शन ऑर्डर पूरे किए गए।"
राजस्थान में भी गहराया खतरा: तीन बच्चों की मौत
इसी बीच राजस्थान के जयपुर में भी तीन बच्चों की मौत की खबर आई है।राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खीमसर ने पहले कहा कि "यह दवा किसी सरकारी डॉक्टर ने नहीं लिखी थी। माता-पिता ने खुद बाजार से खरीदी। विभाग की कोई भूमिका नहीं है।"
हालांकि बाद में जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं -ड्रग कंट्रोलर-II राजाराम शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर फार्मा कंपनियों को बचाने के लिए ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स में छेड़छाड़ की।
Kayson Pharma की दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन शुरू किया गया। मंत्री खीमसर ने सभी Dextromethorphan-आधारित दवाओं की बिक्री रोकने और सभी फार्मा कंपनियों की जांच के आदेश दिए।
देशभर में चिंता, लेकिन जवाब अब भी बाकी
11 बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं -जब तमिलनाडु छुट्टी के दिन भी 48 घंटे में जांच, रिपोर्ट और कार्रवाई कर सकता है, तो मध्य प्रदेश में "रिपोर्ट का इंतज़ार" क्यों चल रहा है? क्या ब्यूरोक्रेसी की सुस्ती इन बच्चों की मौत की जिम्मेदार है? क्या फार्मा कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसी त्रासदियाँ बार-बार दोहराई जा रही हैं?
इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। लेकिन इतना तय है कि यह मामला भारत की दवा निगरानी प्रणाली की खामियों का आईना है। कभी गाम्बिया, कभी उज्बेकिस्तान और अब भारत के भीतर ही बच्चों की मौतें... ये घटनाएँ बताती हैं कि दवाओं की सुरक्षा को लेकर हमारी प्रणाली अभी भी उतनी मजबूत नहीं हुई है जितनी होनी चाहिए थी।
छिंदवाड़ा से जयपुर तक फैली यह त्रासदी सिर्फ कुछ राज्यों की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। यह उन नीतिगत और प्रशासनिक कमियों की पोल खोलती है जिनकी वजह से हर कुछ महीनों में ऐसी 'सिरप त्रासदियाँ' सामने आती हैं।
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