Coronavirus: क्या है वेंटिलेटर, कोविड-19 में कैसे बचाता है जान, किस राज्य के पास कितनी संख्या
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के मामलों में अब तेजी से इजाफा होता जा रहा है। देश में 85, 960 संक्रमित मरीज हैं और 2,752 लोगों की मौत हो चुकी है। कहा जा रहा है कि आने वाले दो माह यानी जून और जुलाई बहुत ही नाजुक हैं। इन दो माह में कोरोना वायरस देश में अपने पीक यानी सर्वोच्च स्तर पर होगा। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो फिर हालात बेकाबू हो सकते हैं क्योंकि देश में आबादी को देखते हुए वेंटिलेटर्स की संख्या बहुत कम है। अमेरिका ने कहा है कि वह कोरोना के इलाज में मदद के मकसद से भारत को वेंटिलेटर्स देगा। आखिर क्या होते हैं वेंटिलेटर और क्यों यह कोरोना जैसी महामारी के समय अहम हो जाते हैं, जानिए इस रिपोर्ट में।

कोरोना में मरीजों के फेफड़ों को बड़ी मदद
जिन मरीजों में संक्रमण का सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव होता है, उनके लिए वेंटिलेटर वह आखिरी मौका हो सकता है जो उनकी जिंदगी बचा सकेगा। वेंटिलेटर वह मशीन होती है जो शरीर की सांस लेने की प्रक्रिया को उस समय नियंत्रण में लेती है जब महामारी की वजह से फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं या असफल रहते हैं। वेंटिलेटर की वजह से मरीज संक्रमण का सामना कर सकता है और ठीक हो सकता है। अलग-अलग मरीजों के लिए अलग-अलग प्रकार के मेडीकल वेंटिलेशन का प्रयोग किया जा सकता है।

कैसे काम करती है वेंटीलेटर मशीन
वेंटिलेटर दबाव से फेफड़ों में हवा को ब्लो करता है। इस दबाव या प्रेशर को पॉजिटिव प्रेशर के तौर पर जाना जाता है। मरीज आमतौर पर खुद सांस लेता लेकिन जब वह ऐसा नहीं कर पाता है तो फिर वेंटिलेटर इस काम को अंजाम देता है। वेंटिलेटर मशीन ऑक्सीजन को फेफड़ों तक लेकर जाती है और कार्बन डाई आक्साइड को फेफड़ों से बाहर करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक कोरोना वायरस के 80 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो अस्पताल के इलाज के बिना ही ठीक हो गए हैं। लेकिन छह में से एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाता है।

कम हो जाता है ऑक्सीजन का स्तर
कोविड-19 के कई केसेज में वायरस फेफड़ों को बहुत हद तक नुकसान पहुंचा देता है। इसकी वजह से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए वेंटिलेटर की मदद ली जाती है। शरीर में वेंटिलेटर से हवा को पुश किया जाता है और फेफड़ों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाया जाता है। वेंटिलेटर में ह्यूमिडफाइर भी होता है और इसकी मदद से एयर सप्लाई में गर्मी और नमी को जोड़ा जाता है। ऐसा करने से मरीज के शरीर का तापमान वेंटीलेटर से आने वाली एयर के बराबर हो जाता है।

आईसीयू में मरीजों को वेंटीलेटर की मदद
अगर कोई मरीज इंटेसिव केयर यूनिट यानी आईसीयू में है तो फिर आमतौर पर उसे वेंटिलेशन पर रख दिया जाता है ताकि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य रहे। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी वेंटीलेटर के प्रयोग से मरीज में उसका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है। इटली में करीब 50 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी थी। जिन मरीजों में कोविड-19 के लक्षण हल्के होते हैं, उनके फेफड़ों में फेसमास्क, नैसल मास्क यानी नाक पर लगने वाला मास्क के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है।

भारत के पास कितने वेंटिलेटर
अप्रैल माह में सीडीडीईपी इंडिया और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की तरफ से आई रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में करीब 19 लाख हॉस्पिटल बेड्स हैं। 95 हजार आईसीयू बेड्स हैं और करीब 48,000 वेंटिलेटर्स हैं। देश के सात राज्यों में बेड्स और वेंटिलेटर्स के बारे में भी बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक में जिन राज्यों में बेड्स और वेंटीलेटर्स सबसे ज्यादा हैं उनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। उत्तर प्रदेश में 14.8 प्रतिशत, कर्नाटक में 13.8 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 12.2 प्रतिशत, तमिलनाडु में 8.1 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 5.9 प्रतिशत, तेलंगाना में 5.2 प्रतिशत और केरल में 5.2 प्रतिशत बेड्स और वेंटिलेटर्स हैं।












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