कोरोना वायरस: बंदरों पर प्रभावी साबित हुई कोवैक्सीन, पहले चरण के ट्रायल में आए अच्छे परिणाम

नई दिल्ली। दुनियाभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामले बढ़ रहे हैं। इस महामारी के खातमे के लिए हर देश इस समय वैक्सीन पर काम कर रहा है। भारत में भी इस वक्त कई वैक्सीन विकसित हो रही हैं, जो ट्रायल के अलग-अलग चरण में हैं। इन्हीं में से एक कोवैक्सीन को लेकर खबर आई है कि ये वैक्सीन नॉन- ह्यूमन प्राइमेट्स (बंदर और गोरिला जैसे जानवर) पर प्रभावी साबित हुई है। वैक्सीन के भारत में हुए पहले चरण के क्लिनिकल ट्रायल में सामने आया है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में भी कारगर है। बता दें कोरोना वायरस के खिलाफ तैयार की गई कोवैक्सीन को आईसीएमआर (भारतीय चिकिस्ता अनुसंधान परिषद) और भारत बायोटेक इंटरनेशनल ने मिलकर विकसित किया है।

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    इस वैक्सीन को देश के 12 इंस्टीट्यूट में टेस्ट किया गया है। ट्रायल के पहले चरण के परिणाम उत्साहजनक हैं। इनएक्टिवेटेड कोरोना वायरस वैक्सीन की दो खुराक 20 जानवरों को दी गई थी। जिन्हें चार समूहों में बांटा गया। एक समूह पर प्लेसीबो का पालन किया गया। बता दें प्लेसीबो उस चिकिस्ता को कहते हैं, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता। इस तरह की पद्धति या तो प्रभावहीन रहती है और अगर सुधार दिखता भी है, तो उसका कारण कुछ और होता है। यानी दवा या इंजेक्शन तो इसमें दिए जाते हैं लेकिन उनमें असल में दवा नहीं होती।

    जबकि तीन समूहों को 0 और 14 दिनों में तीन अलग-अलग वैक्सीन दी गईं। इसके बाद रिजल्ट में पता चला कि वैक्सीन प्रभात्माक और सुरक्षात्मक है। इससे कोरोनो वायरस IgG बढ़ रहा है। साथ ही बंदर की नाक, गले और फेफड़े के ऊतकों में वायरस का असर कम हुआ है। प्लेसीबो समूह के विपरीत, जिन अन्य समूहों को वैक्सीन दी गई, उनमें हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन द्वारा निमोनिया नहीं मिला। इसके साथ ही वैक्सीन की दो खुराक दिए जाने पर जानवरों में कोई प्रतिकूल परिणाम नहीं देखा गया। शोधकर्ता ने कहा, 'संक्षेप में कहें तो वैक्सीन से प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ी है। जो कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए अहम है।'

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