Coronavirus: हमें कैसे पता चलेगा कि कोई कोरोना वायरस-मुक्त है या नहीं?
बेंगलुरु। कोरोना वायरस का प्रकोप देश में लगातार बढ़ता जा रहा हैं। भारत में अब तक 10363 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए है वहीं 339 लोगों की इससे मौत हो चुकी है वहीं 1036 कोरोना से स्वस्थ्य हो चुके है। भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि हमें कैसे पता चलेगा कि कोई कोरोना वायरस-मुक्त है या नहीं? आइए जानते हैं इन्हीं सवालों के जवाब?

ऐसा मरीज जिसमें जब लक्षण खत्म हो जाता है
कोरोना पॉजिटिव का ऐसा मरीज जिसमें जब लक्षण खत्म हो जाता है और वो "बेहतर महसूस करता है" या ऐसे लोग जिनमें हल्के या कोई लक्षण नहीं होते हैं क्या वो संक्रमण से नहीं प्रभावित होते है इन विषयों पर अध्ययन अभी बहुत कम हुआ हैं। इसलिए अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है।

‘फॉल्स निगेटिव'मरीज
कोरोना के इलाज के दौरान कई ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमें कोरोना के लक्षणों के आधार पर स्वाब के लिए गले या नाक के अंदर से सैंपल लेकर टेस्ट किया गया लेकिन रिपेार्ट निगेटिव आई की पुष्टि नहीं हुई। जबकि उनमें खांसी, सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार जैसे कोरोना कोविड-19 के लक्षणों सारे लक्षण थे और वो उससे परेशान थे। विशेषज्ञों की माने तो शुरुआत लक्षण के 10 दिनों बाद भी किए गए परीक्षण में भी निगेटिव रिपोर्ट आयी जबकि वो कोरोना पॉजिटिव था। इतना ही नहीं ऐसे मरीज भी पाए गए जिनके कोरोना वायरस के लक्षण के शुरू होने के 37 दिनों बाद जो कोरोना टेस्ट करवाए गए वो निगेटिव आए। इन्हें ‘फॉल्स निगेटिव'मरीज कहा जाता हैं।

कोरोना मरीजों पर किया गया ये शोध
बता दें अमेरिकन जर्नल ऑफ़ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में 27 मार्च के एक अध्ययन के अनुसार कोविड -19 संक्रमण से मामूली रुप ये प्रभावित मरीजों के इलाज किए गए आधे लोगों में कोरोना लक्षणों के गायब होने के आठ दिनों बाद तक कोरोनोवायरस ने परेशान पाए गए।

रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी इस बात की गारन्टी नहीं कि
विशेषज्ञों ने ये भी कहा कि किसी मरीज की रिपोर्ट अगर निगेटिव आती है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वो बाद में कोरोना ग्रसित नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमितों में 30 फीसदी फॉल्स निगेटिव भी हो सकते हैं

इनसे कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना कम होती हैं
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे लोगा जिनको मामूली खांसी, जुकाम या सांस लेने में दिक्कत हो रही है उनसे कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना कम होती हैं लेकिन इस बात की पूर्ण रुप से पुष्टि नहीं हुई इस पर भी शोध चल रहा हैं।












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