डेल्टा प्लस वेरिएंट वायरस बजा रहा है भारत में ख़तरे की घंटी

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भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप भले कम हुआ हो, लेकिन महाराष्ट्र में नए डेल्टा प्लस वेरिएंट के मामले सामने आए हैं. महाराष्ट्र में अब तक इस वेरिएंट के 21 संक्रमितों का पता चला है.

इन संक्रमितों का पता चलने के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हुआ है.

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राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया, "हम लोग इस वेरिएंट से संक्रमित लोगों के बारे में और उनकी यात्रा विवरणों के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं. यह भी पता लगा रहे हैं कि उन्होंने वैक्सीन ली थी या नहीं या फिर वे दोबारा संक्रमित हुए हैं."

भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के तेज़ी से फैलने की अहम वजह डेल्टा वेरिएंट को ही माना गया था, कोरोना संक्रमण के डबल म्यूटेंट यानी डेल्टा वेरिएंट का पहला मामला भी महाराष्ट्र में ही सामने आया था.

पूरे देश में कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, ऐसे में नए वेरिएंट डेल्टा प्लस का सामने आना चिंता को बढ़ा रहा है. एक सवाल यह भी है कि क्या यह वेरिएंट महाराष्ट्र के लिए ख़तरनाक साबित होगा.

कहाँ से आया है नया डेल्टा प्लस वेरिएंट

महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक़ डेल्टा प्लस वेरिएंट के संक्रमित राज्य के छह ज़िलों में मिले हैं.

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रत्नागिरी में सबसे ज़्यादा नौ संक्रमित हैं, जबकि जलगाँव में डेल्टा प्लस वेरिएंट के सात संक्रमित मिले हैं. मुंबई में अब तक दो और पालघर, ठाणे और सिंधुदुर्ग में एक-एक संक्रमितों का पता चला है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बीबीसी मराठी से कहा, "जो लोग डेल्टा प्लस संक्रमितों के संपर्क में आए हैं, हम उन सबकी जाँच कर रहे हैं."

इस सिलसिले में 7,500 लोगों के सैंपल्स की जाँच हो रही है. कोविड टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ. राहुल पंडित ने बताया, "प्रत्येक नए वेरिएंट को ख़तरे के संकेत के तौर पर देखना चाहिए."

माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के मुताबिक़ कोविड-19 एक आरएनए वायरस है, लिहाजा इसकी म्यूटेट करने की क्षमता बहुत ज़्यादा है. डॉ. लीना गजभर ने बताया, "डेल्टा वेरिएंट वायरस में काफ़ी ज़्यादा म्यूटेशन की वजह से ही यह नया डेल्टा प्लस वेरिएंट सामने आया है."

डेल्टा प्लस वेरिएंट में पहले के सभी म्यूटेशंस देखने को मिले हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक नए वेरिएंट में के417एन म्यूटेशन भी पाया गया है.

भारत में डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले पाया गया था, जिसे वैज्ञानिक तौर पर B.1.617.2 कहा जा रहा है. इस डेल्टा वेरिएंट में भी तेज़ी से बदलाव देखने को मिले हैं, इसी वजह से डेल्टा प्लस वेरिएंट सामने आया है. इसे B.1.617.2.1 कहा जा रहा है.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल डेल्टा प्लस वेरिएंट की शुरुआत के बारे में बताते हैं, "डेल्टा वेरिएंट के चलते ही भारत में दूसरी लहर का संक्रमण तेजी से फैला था. इस डेल्टा वेरिएंट में एक और म्यूटेशन पाया गया है, इसे डेल्टा प्लस वेरिएंट कहा जा रहा है."

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भारत सरकार के मुताबिक डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला यूरोप में देखने को मिला है.

डॉ. पॉल ने बताया, "इस वायरस का सामना करने के लिए इसकी उत्पत्ति के बारे में पता लगाना ज़रूरी है. यह स्पाइक प्रोटीन के ज़रिए शरीर की कोशिकाओं से चिपक जाता है. इसलिए इस वायरस में बदलाव का शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है, यही वजह है कि म्यूटेटेड वेरिएंट चिंता बढ़ाने वाले होते हैं."

डेल्टा वेरिएंट से महाराष्ट्र को ख़तरा?

डबल म्यूटेंट का पहला मामला महाराष्ट्र में ही देखने को मिला था, अब नए डेल्टा प्लस वेरिएंट के मामले भी भारत में सबसे पहले इसी राज्य में सामने आए हैं. रिसर्चरों के मुताबिक़ डेल्टा वेरिएंट की सावधानी से अध्ययन किए जाने की ज़रूरत है.

कोरोना, आरोग्य, भारत
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आशंका यह भी जताई जा रही है कि भारत में जल्दी ही कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आएगी, ऐसे में क्या डेल्टा प्लस संक्रमितों की संख्या भी बढ़ेगी, इसके जवाब में डॉ. राहुल पंडित कहते हैं, "ख़तरे की घंटी तो है ही, इस वेरिएंट के संक्रमण और मरीज़ों में संक्रमण की तीव्रता पर अध्ययन करने की ज़रूरत है."

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इंस्टीट्यूट ऑफ़ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के प्रमुख डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा, "महाराष्ट्र में इस वेरिएंट के तेज़ी से फैलने के सबूत नहीं हैं. रिसर्च जारी है." स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इस नए वेरिएंट के संक्रमण की तीव्रता के बारे में सटीक जानकारी सामने आएगी.

क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन का असर होगा

डेल्टा प्लस वेरिएंट, पहले के डेल्टा वेरिएंट वायरस से ही निकला है, ऐसे में कोरोना वैक्सीन इस वेरिएंट पर कितनी कारगर होगी, ये सवाल पूछने पर डॉ. ईश्वर गिलाडा ने बताया, "वैक्सीन से मिलने वाली इम्यूनिटी का असर डेल्टा वेरिएंट वायरस पर नहीं दिखा है, तो संभव है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट पर भी वैक्सीन कारगर न हो."

हालांकि स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण का कहना है, "डेल्टा वेरिएंट पर भी कोविशील्ड और कोवैक्सीन कारगर हैं. आने वाले तीन चार दिनों में हम यह बता पाएँगे कि डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कारगर है या नहीं."

डेल्टा प्लस वेरिएंट का डर?

डॉ. लीना गजभर ने बताया, "विशेषज्ञों के मुताबिक़ डेल्टा प्लस वेरिएंट के संक्रमण की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है."

डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया, "डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता की वजह है. हमें बेहद सावधानी से इनका अध्ययन करना होगा. हालाँकि यह डेल्टा वेरिएंट से अलग है, ऐसा मानने की ठोस वजह उपलब्ध नहीं है."

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हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा वेरिएंट की तरह ही डेल्टा प्लस वेरिएंट पर इम्यूनिटी सिस्टम कारगर नहीं होंगे. वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील ने इंडिया टुडे से कहा है, "डेल्टा प्लस पर हो सकता है कि कोरोना वैक्सीन का असर नहीं हो और ना ही संक्रमण से मिलने वाली इम्यूनिटी का असर हो."

दिल्ली और मुंबई के कुछ कोरोना संक्रमितों को इलाज के दौरान एंटीबॉडी कॉकटेल दिया जा रहा है, लेकिन जानकारों ने आशंका जताई है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट पर यह कॉकटेल भी प्रभावी नहीं होगा.

हालाँकि डॉ. पंडित ने कहा, "मोनोक्लोनल एंटीबॉडी डेल्टा वेरिएंट पर प्रभावी नहीं है लेकिन कॉकटेल फॉर्म में एंटीबॉडी बनती है, मेरे ख़्याल से नए वेरिएंट पर भी उसे कारगर होना चाहिए."

डेल्टा प्लस वेरिएंट पर केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने अब तक डेल्टा प्लस वेरिएंट को चिंता की वजह नहीं माना है.

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नीति आयोग के डॉ. पॉल ने बताया, "इसे देखे जाने की ज़रूरत है, हम इसका वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं. वायरस में बदलाव को तो नहीं रोक सकते हैं, हमें उन बदलावों को समझने की ज़रूरत है."

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर बयान जारी किया है. स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के मुताबिक़ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल सरकार को डेल्टा प्लस वेरिएंट की रोकथाम के लिए क़दम उठाने के लिए पत्र लिखा गया है.

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दुनिया भर में क्या है स्थिति

ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक़ अभी तक दुनिया के 10 देशों में डेल्टा प्लस वेरिएंट के संक्रमित मिले हैं. इनमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, रूस और जापान जैसे देश शामिल हैं.

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इंस्टीट्यूट ऑफ़ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बॉयोलॉजी (आईजीआईबी) के विनोद सकारिया ने ट्वीट किया है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट की जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए सैंपल यूरोप, एशिया और अमेरिका के हैं.

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