Delta plus variant बन सकता है सबसे खतरनाक वायरस, 5 राज्यों में रिपोर्ट होने से बढ़ी चिंता
Delta plus variant बन सकता है सबसे खतरनाक वायरस, 5 राज्यों में रिपोर्ट होने से बढ़ी चिंता
नई दिल्ली, 22 जून: भारत में कम से कम 5 राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले सामने आए हैं। तेजी से फैलने वाला डेल्टा वैरिएंट अब डेल्टा प्लस में बदल गया है। महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश और झारखंड में मिलाकर 30 से अधिक डेल्टा वैरिएंट के मामले सामने आए हैं। जिसमें एक चार साल के बच्चे में भी डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण देखने को मिला है। केंद्र सरकार ने 16 जून को आधिकारिक तौर पर कहा था कि देश में डेल्टा वैरिएंट ने दस्तक दे दी है। नीति आयोग (स्वास्थ्य) के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा था कि डेल्टा प्लस वैरिएंट अब चिंता का कारण बन गया है। दुनियाभर में ये वायरस अपना पैर पसरा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक अभी तक जितने भी वैरिएंट सामने आए हैं, डेल्टा उनमें से सबसे तेजी से फैलता है। डेल्टा कप्पा और अल्फा वैरिएंट के मुकाबले 60 फीसदी अधिक संक्रामक है।
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महाराष्ट्र में मिले डेल्टा प्लस वैरिएंट के 21 मामले
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 21 मामले सामने आए है। राजेश टोपे ने कहा कि रत्नागिरी जिले से 9 मामले, जलगांव से 7, मुंबई से 2 और पालघर, सिंधुदुर्ग और ठाणे से एक-एक मामले सामने आए है। राजेश टोपे ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के हमने 7,500 से अधिक नमूने एकत्र किए थे, जिसमें से 21 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारी पॉजिटिव पाए गए लोगों के यात्रा विवरण का पता लगा रहे हैं।

केरल में मिला 4 साल के बच्चे में डेल्टा प्लस वैरिएंट के लक्षण
केरल में सोमवार (21 जून) को पहला डेल्टा वैरिएंट का मामला सामने आया है। केरल में पठानमथिट्टा में कडपरा पंचायत के वार्ड 14 में एक चार साल के बच्चे में डेल्टा वैरिएंट के लक्षण पाए गए हैं। बच्चा 24 मई को कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया था, अब उसमें डेल्टा प्लस संक्रमण विकसित हो गए हैं। वहीं पठानमथिट्टा के बाद पलक्कड़ में भी दो अन्य मामले सामने आए हैं।

मध्य प्रदेश: महिला में मिला डेल्टा प्लस वैरिएंट
मध्य प्रदेश के भोपाल में पिछले हफ्ते एक महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामलों का पता चला था। भोपाल के मुख्य चिकित्सा कार्यालय प्रभाकर तिवारी ने कहा है कि जिस महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट का पता चला है, उनका सैंपल गांधी मेडिकल कॉलेज के मरीजों में से लिया गया था। और जीनोम जांच के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भेजा गया था। प्रभाकर तिवारी ने कहा "हमें बुधवार (16 जून) को इस बात की सूचना मिली है कि भोपाल की महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट पाया गया है।''

पंजाब और तमिलनाडु में भी मिला डेल्टा प्लस वैरिएंट
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक डॉ सुजीत सिंह ने कहा है, ''अन्य राज्यों के अलावा तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब और मध्य प्रदेश से डेल्टा प्लस के 15-20 मामले मिले हैं। फिलहाल हमें इसे करीब से जांचने की जरूरत है। हालांकि अभी के लिए डेल्टा वैरिएंट प्रमुख और मजबूत ट्रांसमिशन का कारण बना हुआ है।''
हालांकि पंजाब और तमिलनाडु की सरकारों ने फिलहाल डेल्टा प्सल वैरिएंट के केस को लेकर आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

डेल्टा-प्लस वैरिएंट कितना खतरनाक?
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक डॉ सुजीत सिंह ने कहा है कि डेल्टा-प्लस वैरिएंट बाकी सारे वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हालांकि अभी इस मामले पर जांच जारी है। उन्होंने जानकारी दी है कि इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक कंसोर्टिया ट्रांसमिसिबिलिटी और डेल्टा-प्लस वैरिएंट की गंभीरता को देखते हुए इसके हर पहलुओं पर रिसर्च कर रहा है। हमने इसे बेहतर ढंग से समझने और जानने के लिए हर एंगल से देखना शुरू कर दिया है। हो सकता है कि केंद्र सरकार द्वारा डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर एक बयान भी जारी किया जाए।
डॉ सुजीत सिंह ने कहा, इस मामले में पिछले महीने के आए सैंपल की भी जांच करेंगे और ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि कहीं भारत में ये मार्च या उससे पहले से तो मौजूद नहीं है। यह वेरिएंट यूरोप में मार्च और अप्रैल से देखा जा रहा है। हालांकि ये पब्लिक डोमेन में इसे 13 जून को लाया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में डेल्टा प्लस के 7 जून तक छह मामले दर्ज किए थे।












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