मुंबई: धारावी में कोरोना वायरस संक्रमण हुआ कंट्रोल, इन कारगर तरीकों से मिली सफलता

मुंबई। एक समय पर धारावी में कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते मामले महाराष्ट्र सरकार के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। हालांकि जून की शुरुआत धारावी के लिए थोड़ी राहत लेकर आई है। यहां 30 मई से 8 जून के बीच में कोरोना वायरस से एक भी मौत नहीं हुई है। कभी कोरोना का हॉटस्पॉट रहे धारावी में 1 जून के बाद से संक्रमित मामलों में भी कमी आई है। बीएमसी और विशेषज्ञों के अनुसार बहुत सी वजहों से सफलता मिल पाई है। बीएमसी ने धारावी में क्लिनिक वाले निजी डॉक्टरों की मदद ली। इन्हें पीपीई किट उपलब्ध करवाई गईं और बाकी का सभी सामान भी दिया गया। इन्हें धारावी में अपने क्लिनिक खोलने को भी कहा गया।

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    इस दौरान सभी क्लिनिक की सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्था की गई। ऐसे में जब भी लोगों को खुद में कोई लक्षण दिखाई देते तो वो डॉक्टर के पास जाते। ये डॉक्टर यहां कई सालों से अपने क्लिनिक चला रहे हैं, ऐसे में लोगों को भी इनपर पूरा विश्वास रहा। जब डॉक्टर लोगों से क्वांरटाइन और अन्य उपाय अपनाने को कहते, तो लोग उसका बखूबी पालन करते। इन डॉक्टरों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कराने में भी मदद ली गई। ऐसे में लोग इन डॉक्टरों को अच्छे से जानते हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट जरूरी जानकारी भी इन्हें दी।

    इसके साथ ही वायरस से प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन का कार्य होता रहा। सार्वजनिक शौचालयों को नियमित तौर पर सैनिटाइज किया जाता। धारावी की 80 फीसदी जनसंख्या करीब 450 शौचालयों का इस्तेमाल करती है। ऐसे में इन्हें दिन में चार बार सैनिटाइज किया जाता। इससे हर घर में वायरस का संक्रमण रुक गया। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी झोपड़ पट्टी में शुमार धारावी में करीब 8.5 लाख लोग रहते हैं। यहां मामलों में कमी प्रवासियों के पलायन से भी आई। दूसरे राज्यों से आए लोग पैसे की तंगी के कारण अपने-अपने घरों को चले गए। बताया जा रहा है शहर से करीब दो लाख लोग गए हैं।

    बीएमसी का कहना है कि धारावी में करीब 6 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इससे संक्रमित या फिर लक्षण वाले मरीजों का पता चलने लगा। अप्रैल माह में बीएमसी ने हर केस मिलने पर एक से दो लोगों को क्वारंटाइन करना शुरू किया। फिर मई-जून में हर केस पर 10-15 लोगों को क्वारंटाइन किया गया। बीएमसी ये डाटा रिकॉर्ड करती रही और जिन लोगों को जरूरत होती थी, उनका इलाज किया जाता था। बीएमसी का कहना है कि क्वारंटाइन करने के कई स्थान होने के कारण भी उन्हें यहां वायरस को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

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