Coromandel से पहले ऐसे कितने हादसे? अचानक मौत की नींद सो गए पहियों पर भागते लोग, Major Mishap पर एक नजर

साल के पांच महीने बीतने के बाद दो जून की शाम ओडिशा के बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस औऱ यशवंतपुर हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेनें बेपटरी हो गईं। ये 2023 में अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा साबित हुआ है।

Coromandel

Coromandel से पहले भी दर्जनों गाड़ियां हादसे का शिकार हो चुकी हैं। रेल हादसे कितने खौफनाक होते हैं, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक यात्री ट्रेन में सीधे तौर पर हजारों लोगों की जान खतरे में होती है।

दरअसल, भारतीय रेलवे की ट्रेनों में क्षमता के अनुसार यात्रियों की संख्या का अनुमान लगाया जाए तो लगभग 1000 से 1300 यात्री आधिकारिक टिकट पर सफर करते हैं। बता दें कि रिजर्व कंपार्टमेंट में 72, जबकि जनरल डिब्बों में 90 सीटें होती हैं। औसतन एक ट्रेन में 10-15 बोगियां जुड़ी होती हैं।

ऐसे में जब ट्रेन हादसों का शिकार होती है तो पहियों पर भागता लोगों की जिंदगी अचानक बेपटरी हो जाती है, यानी सैकड़ों लोग पलक झपकते मौत की नींद सो जाते हैं। कई लोगों को इंजरी दिव्यांग बना देती है। कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे के बहाने भारत के Major Mishap पर एक नजर

  • 7 जुलाई, 2011 को उत्तर प्रदेश में एटा जिले के पास छपरा-मथुरा एक्सप्रेस एक बस से टकरा गई थी। हादसे में 69 लोगों की जान चली गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा मानव रहित क्रासिंग पर देर रात करीब 1:55 बजे हुआ था। ट्रेन की तेज गति का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि बस करीब आधा किलोमीटर तक घिसटती रही।
  • वर्ष 2012 को भारतीय रेलवे के इतिहास में रेल दुर्घटनाओं के मामले में सबसे खराब में से एक माना गया था। इस वर्ष लगभग 14 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें ट्रेनों का पटरी से उतरना और आमने-सामने की टक्कर दोनों शामिल हैं।
  • 30 जुलाई, 2012 को दिल्ली-चेन्नई तमिलनाडु एक्सप्रेस के एक डिब्बे में नेल्लोर के पास आग लग गई, जिसमें 30 से अधिक लोग मारे गए।
  • 26 मई, 2014 को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर इलाके में गोरखपुर की ओर जा रही गोरखधाम एक्सप्रेस खलीलाबाद स्टेशन के पास रुकी मालगाड़ी से टकरा गई। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा घायल हुए।
  • 20 मार्च, 2015 को देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस में बड़ा हादसा हुआ। उत्तर में रायबरेली में बछरावां रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन का इंजन और दो बगल के डिब्बे पटरी से उतर गए। 30 से अधिक लोगों की मौत हुई, लगभग 150 अन्य घायल हुए थे।
  • 20 नवंबर, 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस 19321 कानपुर के पुखरायां के पास पटरी से उतर गई, जिसमें कम से कम 150 यात्रियों की मौत हो गई और 150 से अधिक घायल हो गए।
  • 19 अगस्त, 2017 को हरिद्वार और पुरी के बीच चलने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। ट्रेन की 14 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिसमें 21 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 97 घायल हो गए।
  • 23 अगस्त, 2017 को दिल्ली जाने वाली कैफियत एक्सप्रेस के नौ कोच उत्तर प्रदेश के औरैया के पास पटरी से उतर गए, जिससे कम से कम 70 लोग घायल हो गए।
  • 13 जनवरी, 2022 को बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस के कम से कम 12 डिब्बे पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में पटरी से उतर गए, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए।

बता दें कि 2023 में अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा कोरोमंडल एक्सप्रेस 120 से अधिक लोगों की मौत का कारण बना। 500 से अधिक घायल हुए। ट्रेन पश्चिम बंगाल के शालीमार से तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई को जोड़ती है।

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