INDIA bloc: कांग्रेस का अल्टीमेटम- नीतीश नहीं तो खड़गे भी नहीं, ममता के पेच में फंसा गठबंधन?
इंडिया ब्लॉक का गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम विपक्षी गठबंधन के चेयरमैन के तौर पर आए चार दिन गुजर चुके हैं, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा अभी भी बाकी है। अब कांग्रेस ने इसके लिए नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की शर्त लगा दी है।
कांग्रेस नेतृत्व इंडिया ब्लॉक में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं को यह समझाने की कोशिशों में जुटा है कि मल्लिकार्जुन का नाम चेयरमैन के तौर पर घोषित करने से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संयोजक बनाने पर सर्वसम्मति बनाई जाए।

नीतीश नहीं तो खड़गे भी नहीं
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को इंडिया ब्लॉक के चेयरमैन बनाए जाने का प्रस्ताव शनिवार को हुई गठबंधन की बैठक में ही आया था। लेकिन, इसकी औपचारिक घोषणा का अभी तक इंतजार है। गठबंधन के सबसे बड़े दल ने अब इस मसले को संयोजक पद से जोड़ दिया है।
इस बातचीत का हिस्सा रहे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ईटी से कहा है , 'कांग्रेस अध्यक्ष गठबंधन के चेयरमैन और कंवेनर पदों के मुद्दे को लेकर सहयोगियों के साथ चर्चा करने में जुटे हुए हैं। शनिवार की बैठक में ही कांग्रेस की ओर से स्पष्ट कर दिया गया था कि खड़गे जी उनकी अपील और चेयरमैन पद तभी स्वीकारेंगे जब संयोजक के नाम पर भी ऐसी ही सहमति बनेगी।'
कांग्रेस को अभी भी नीतीश के नाम पर आम सहमति की उम्मीद
जब उनसे ये पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी को यह लगता है कि संयोजक के तौर पर नीतीश के नाम पर सहयोगियों में आम सहमति बन जाएगी तो उन्होंने कहा, 'पिछली बैठक में यही नजरिया प्रमुख था। मुझे लगता है कि जल्द ही इसे व्यापक स्वीकार्यता मिल जाएगी।'
पिछली बैठक से गोल हो गए थे ममता, उद्धव और अखिलेश
माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इस प्रस्ताव को इसलिए ठुकराया था, क्योंकि वह इसपर सहयोगी दलों के बीच व्यापक सहमति चाहते थे। लेकिन, उस बैठक में तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव शामिल ही नहीं हुए थे।
जबकि, 19 दिसंबर को दिल्ली में हुई बैठक में ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने संयोजक पर चर्चा किए बगैर मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम गठबंधन के मुख्य चेहरे के तौर पर उछाल दिया था।
पिछल वर्चुअल बैठक में इंडिया ब्लॉक में सहयोगियों को जोड़ने की वजह से आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां स्पष्ट रूप से नीतीश को संयोजक बनाए जाने की हिमायती थीं। कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उन्हें मनाने की काफी कोशिश भी की थी। लेकिन, उसपर तब वे राजी नहीं थे।
कांग्रेस ने नीतीश को संयोजक बनाने की लगाई शर्त
यही वजह है कि कांग्रेस ने अब इसमें खड़गे के चेयरमैन पद स्वीकारने के लिए नीतीश को संयोजक पद देने की शर्त लगाकर इंडिया ब्लॉक के सभी बड़े सहयोगियों को आपसी सहमति बनाने की कोशिश की है।
इसके अलावा कांग्रेस इस वजह से भी चेयरमैन पद से हिचकिचा रही है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल को लेकर उनके बीच आपसी गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है और इसको लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक एक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
कांग्रेस नहीं चाहती की संयोजक पद का मामला सुलझे बिना, वह चेयरमैन की भूमिका में आ जाए और बाद में अजीबोगरीब स्थिति का सामना करनी पड़ जाए।
इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस की ओर से सहयोगियों के सामने रखी गई यह पहली शर्त नहीं है। इससे पहले सपा सुप्रीमो बसपा को गठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं के खिलाफ भी अल्टीमेटम दे चुके हैं।
उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी साफ कह चुकी हैं कि बंगाल में गठबंधन का मतलब सिर्फ टीएमसी है, जो बीजेपी के साथ लड़ सकती है; बाकी भारत में वह इंडिया ब्लॉक के साथ रहेंगी! वहीं जब गठबंधन में शामिल दलों ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भोपाल में संयुक्त रैली करने का फैसला कर लिया, लेकिन उसे कांग्रेस ने अल्टीमेटम देकर रद्द करा दिया।












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