कांग्रेस ने फेसबक को बताया ''फेकबुक'', लोकतंत्र का खतरा बताते हुए की JPC की मांग
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: कांग्रेस ने सोमवार को फेसबुक पर भारत के चुनावों को "प्रभावित" करने और लोकतंत्र को "कमजोर" करने का आरोप लगाया और इसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भारत में फेसबुक प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं करने पर सोशल मीडिया दिग्गज की आंतरिक रिपोर्ट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि फेसबुक ने खुद को एक 'फेकबुक' में बदल दिया है। आरोपों पर फेसबुक इंडिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी के आरोपों पर फिलहाल फेसबुक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि फेसबुक सत्तारूढ़ भाजपा के सहयोगी के रूप में काम कर रहा है और उनके एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने फेसबुक की आंतरिक रिपोर्ट वाली खबर का उल्लेख करते हुए कहा, "हम भारत में चुनावों को प्रभावित करने में फेसबुक की भूमिका की जेपीसी जांच की मांग करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि फेसबुक की आंतरिक रिपोर्टों ने एक मिलियन से अधिक नकली खातों की पहचान की है, फिर भी इसने इसके बारे में कुछ नहीं किया। खेड़ा ने फेसबुक में काम कर चुकी व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हॉगेन के शोध दस्तावेजों का हवाला दिया और आरोप लगाया कि हिंदी और बंगाली में इस तरह के नफरत भरे पोस्ट करने वालों के खिलाफ कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई।
खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, "हम अपने चुनावों को प्रभावित करने में फेसबुक की भूमिका की जांच के लिए जेपीसी जांच की मांग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फेसबुक "लोगों की राय को फर्जी पोस्ट के माध्यम से आकार देने की कोशिश में हमारे लोकतंत्र से समझौता करने और कमजोर करने" की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं और उसके सहयोगियों ने फेसबुक के ढांचे और कामकाज में घुसपैठ की है।
उन्होंने कहा कि, फेसबुक को क्या अधिकार है कि वह एक खास विचारधारा के फर्जी पोस्ट, तस्वीरों और कहानी को फैला करा है। यह चौंकाने वाला है कि फेसबुक द्वारा केवल 0.2 प्रतिशत अभद्र भाषा के पोस्ट हटाए गए, जिसके पास भारत से सबसे अधिक पैसा कमाने के बावजूद हिंदी या बंगाली में पोस्ट को फ़िल्टर करने की व्यवस्था नहीं है। दरअसल, अमेरिकी मीडिया की एक खबर में कहा गया है कि फेसबुक के आंतरिक दस्तावेज बताते हैं कि कंपनी अपने सबसे बड़े बाजार भारत में भ्रामक सूचना, नफरत वाले भाषण और हिंसा पर जश्न से जुड़ी सामग्री की समस्या से संघर्ष कर रही है। इसमें यह उल्लेख भी किया गया है कि सोशल मीडिया के शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया है कि ऐसे समूह और पेज हैं जो भ्रामक, भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी सामग्री से भरे हुए हैं।
उनके मुताबिक, भारत में सिर्फ नौ फीसदी फेसबुक उपयोगकर्ता अंग्रेजी भाषा के हैं और उनके पास भी क्षेत्रीय भाषाओं के पोस्ट की जांच-परख करने की कोई व्यवस्था नहीं है। खेड़ा ने दावा किया कि पिछले साल दिल्ली में हुए दंगों और फिर इस वर्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी फेसबुक की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने सवाल किया, "सबकुछ जानते हुए भी फेसबुक ने अपनी आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर आरएसएस और बजरंग दल को 'खतरनाक संगठन' क्यों नहीं माना? भारत सरकार ट्विटर को लेकर अतिसक्रिय रही है, लेकिन अब वह इसको लेकर कुछ बोल क्यों नहीं रही है?" कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह सारे तथ्य सामने आने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।












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