रिजल्ट से पहले कांग्रेस को सताई अपने 'विधायकों' की चिंता, छत्तीसगढ़ के लिए बनाया कर्नाटक वाला प्लान

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही है, हालांकि कांग्रेस प्रदेश में विधायकों की संभावित खरीद फरोख्त को लेकर चिंतित नजर आ रही है। इसीलिए पार्टी ने चुनाव में जीत दर्ज करने वाले विधायकों को अकेले नहीं छोड़ने का फैसला किया है। पार्टी ने इसके लिए एक टीम को विजयी विधायकों के साथ हमेशा साथ रखने की तैयारी की है। पार्टी ने ये भी रणनीति बनाई है कि सभी विधायकों को किसी सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया जाएगा जहां से उनतक पहुंचना संभव न हो।

'विजयी उम्मीदवारों को खरीदफरोख्त से बचाने का प्लान'

'विजयी उम्मीदवारों को खरीदफरोख्त से बचाने का प्लान'

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में ये रणनीति तैयार की गई है और जिला स्तर पर इसको अमल में लाने के लिए काम भी शुरू किया जा चुका है। राज्य के कांग्रेस कार्यालय, राजीव भवन में पार्टी प्रभारी पीएल पुनिया, पीसीसी प्रमुख भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव और कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ सभी 90 उम्मीदवारों की एक मीटिंग 28 नवंबर को हुई थी। इस बैठक में सभी से कहा गया है कि विजयी उम्मीदवार घोषणा के तुरंत बाद रायपुर पहुंचे।

कांग्रेस को सता रही खरीद-फरोख्त की चिंता

कांग्रेस को सता रही खरीद-फरोख्त की चिंता

पार्टी नेतृत्व विधायकों की खरीद-फरोख्त की बात से चिंता में है कि जीत दर्ज करने के बाद उनसे संपर्क की कोशिश की जा सकती है। पार्टी ने फैसला किया है कि जीत दर्ज करने के बाद विधायकों को रायपुर पहुंचना होगा। हालांकि अंतिम समय में ठिकाना बदला जा सकता है और गुप्त ठिकाने की जानकारी उन्हें सीधे दी जाएगी। साल 2014 में, अंतापुर उपचुनाव के दौरान आखिरी समय में उम्मीदवार मंटुराम पवार ने अपना नाम वापस ले लिया था और कांग्रेस को उस वक्त निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन करना पड़ा था, जो चुनाव हार गया।

सभी विधायकों को रायपुर जाने का निर्देश

सभी विधायकों को रायपुर जाने का निर्देश

इस मामले में एक सीडी सामने आई और कांग्रेस विधायक को खरीदने का दावा किया गया जिसके बाद पार्टी ने जांच की मांग की थी। इसके पहले 2003 में, उस वक्त के मुख्यमंत्री अजित जोगी सूबे में चुनाव हार गए थे और बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी कर रही थी। हालांकि उस वक्त बीजेपी विधायकों को लालच देने और उनको तोड़ने की बात सामने आई तो अजित जोगी का नाम इसमें उछला था। इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा की गई थी।

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