केरल में कांग्रेस की राह इस बार नहीं होगी आसान, 'सहयोगी' से ही मिल रही है बड़ी चुनौती!
Kerala Lok Sabha Election 2024: केरल में सत्ताधारी एलडीएफ ने दावा किया है कि वह राज्य में बीजेपी-कांग्रेस 'गठबंधन' को हराने की लड़ाई लड़ रहा है। सीपीआई नेता बिनॉय विस्वम के मुताबिक दोनों ही पार्टियों का केरल में एक ही स्टैंड है, वामपंथी दलों का विरोध करना। सीपीआई या लेफ्ट पार्टियां वास्तव में उसी बीजेपी-विरोधी विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं, जिसकी अगुवाई कांग्रेस कर रही है।
सीपीआई नेता ने कांग्रेस को चुनौती दी है कि अगर लोकसभा चुनावों के बाद त्रिशंकु संसद की स्थिति पैदा होती है तो लेफ्ट के सांसद बीजेपी में नहीं शामिल होंगे, लेकिन सवाल किया है कि कितने कांग्रेस सांसद इसकी गारंटी दे सकते हैं। दरअसल, इस बयान के माध्यम से सीपीआई ने कांग्रेस सांसद और तिरुवनंतपुरम से पार्टी प्रत्याशी शशि थरूर को घेरने की कोशिश की है।

लेफ्ट ने कांग्रेस पर लगाया बीजेपी से साठगांठ का आरोप
अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कासरगोड जिले के पैवलिके ग्राम पंचायत का उदाहरण दिया है। उनके मुताबिक वहां एलडीएफ और बीजेपी के 8-8 सदस्य थे। कांग्रेस और मुस्लीम लीग के 2-2 सदस्य थे। उनका कहना है कि एलडीएफ के खिलाफ बीजेपी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कांग्रेस के एक सदस्य ने वोट किया। उनका दावा है कि कांग्रेस ने मुस्लीम लीग से भी ऐसा ही करने को कहा, लेकिन उसके सदस्यों ने नहीं किया।
कांग्रेस नेतृत्व को दी शशि थरूर की उम्मीदवारी वापस लेने की चुनौती
इसके बाद सीपीआई नेता ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या वो शशि थरूर की उम्मीदवारी वापस ले सकते हैं, जिन्होंने हमास को आतंकवादी बताया था। उन्होंने कहा, 'थरूर ने कहा था कि मुस्लिम भाइयों को बाबरी मस्जिद को दूसरे स्थान पर ले जाने के बारे में सोचना चाहिए था। थरूर ने हमास की तुलना में इजरायल को पसंद किया। क्या यही कांग्रेस का स्टैंड है? अगर ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस थरूर की उम्मीदवारी वापस लेने को तैयार है।'
इस बार मुश्किल त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं थरूर
थरूर के मुकाबले बीजेपी ने इस बार तिरुवनंतपुरम सीट पर केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को उतारा है। वहीं वामपंथी गठबंधन ने सीपीआई के पूर्व राज्य सचिव और एक बार के सांसद पन्नियन रवींद्रन पर दांव लगाया है। एलडीएफ हर हाल में इस सीट पर अपनी वापसी की कोशिशों में लगा है। लेकिन, इससे राष्ट्रीय स्तर पर उसकी सहयोगी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
केरल में 'सहयोगी' ही न तोड़ दें कांग्रेस की उम्मीद
क्योंकि, राजीव चंद्रशेखर और कुछ अन्य उम्मीदवारों की बदौलत इस बार भाजपा केरल में खाता खोलने की उम्मीद कर रही है। पार्टी ने गठबंधन से लेकर जनसंपर्क तक के लिए काफी संघर्ष किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी डबल डिजिट में सीटें मिलने की उम्मीदें जता चुके हैं। ऐसे में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी की ओर से उसके उस वोट बैंक पर निशाना साधने की कोशिश की जा रही है, जिस को लेकर अबतक कांग्रेस पूरी तरह से निश्चिंत रही है।












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