केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF को झटका, 38 साल बाद KC(M) होगी गठबंधन से बाहर
नई दिल्ली- केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिग फ्रंट (यूडीएफ) को जोर का झटका लगा है। इस गठबंधन में शामिल जोस के मणि की अगुवाई वाली केरल कांग्रेस (मणि) ने गठबंधन से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही केरल कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष जोस के मणि ने राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देने का ऐलान किया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ के लिए एक और झटका ये है कि उन्होंने अपनी पार्टी को सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) में शामिल करने का भी इशारा किया है।

कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा झटका इसलिए भी है कि केरल कांग्रेस पिछले 38 वर्षों से यूडीएफ का हिस्सा थी। मणि यूडीएफ के समर्थन से ही राज्यसभा में पहुंचे थे, इसलिए उन्होंने इससे भी इस्तीफा देकर नैतिक तौर पर अपना कद ऊंचा रखने की कोशिश की है। मणि यूडीएफ में इसलिए नाराज चल रहे थे, क्योंकि उसने पीजे जोसेफ की अगुवाई वाले उनके विरोधी गुट का साथ देना शुरू कर दिया था। पार्टी पिछले साल ही केरल कांग्रेस के चेयरमैन केएम मणि के निधन के बाद दो धड़ों में बंट गई थी। मणि ने कहा है कि, 'अभी तक हमने एलडीएफ के साथ कोई चर्चा नहीं की है। हमने अपना एक पॉलिटिकल स्टैंड ले लिया है। अब हमें उनसे सुनना है। यूडीएफ में हमारी पीठ में छुपा घोंपा गया।' हालांकि सीपीएम ने उनसे कहा है कि वह पहले एलडीएफ में शामिल होने के लिए अपना कदम बढ़ाएं। उधर पीजे जोसेफ ने इस बदली राजनीति पर जोस को आड़े हाथों लिया है और कहा कि उन्हें साफ करना चाहिए की उनकी पीठ में छुरा किसने घोंपा है। 'वह यूडीएफ में अनुशासहीनता में शामिल थे। असल में सीपीएम ने ही हमेशा केएम मणि का अपमाना किया है....जोस ने हमें एक चुनौती दी है और हमने उसे स्वीकार कर लिया है।'
केरल कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष जोस के मणि ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि उनकी पार्टी को यूडीएफ में काफी नुकसान हो रहा था। उनके आत्म सम्मान पर बात आ रही थी। उन्होंने दावा किया है कि उनके फैसले के बाद केरल की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आने जा रहा है। हालांकि, केरल कांग्रेस (एम) के कोट्टयम से सांसद थॉमस चाजिकादान इस्तीफा नहीं देंगे। केरल कांग्रेस (एम) के इस फैसले का राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इससे राज्य में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूती मिलेगी।
केरल कांग्रेस मूलरूप से क्रिश्चियनों की पार्टी है और सेंट्रल त्रावणकोर में इसका मजबूत जनाधार है। सत्ताधारी एलडीएफ को उम्मीद है कि केरल कांग्रेस (एम) के यूडीएफ से टूटने से जो नया समीकरण बनेगा उससे उसका अल्पसंख्यक वोट बैंक और मजबूत होगा। इधर यूडीएफ के संयोजक एमएम हुसैन ने कहा है कि जोस के जाने से यूडीएफ को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि पहले केएम मणि की ओर से एलडीएफ में शामिल होने की कोशिशों का सीपीआई ने जोरदार विरोध किया था। सीपीआई सत्ताधारी गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में यह भी देखने वाली बात होगी कि अब वह किस तरह से प्रतिक्रिया देती है। (तस्वीर-जोस के मणि के फेसबुक से )












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