आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर बड़ा हमला, गोडसे से कर डाली तुलना
नई दिल्ली। आरक्षण को लेकर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया कि राज्य सरकार नौकरी और पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है और आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है, उसके बाद विपक्ष लगातार आरक्षण को लेकर सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने आरक्षण को लेकर पीएम मोदी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार संविधान के खिलाफ है, ये लोग संविधान को नहीं मानते हैं। यही नहीं पीएल पुनिया ने नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर हमला बोला।

ये लोग संविधान को नहीं मानते
पीएल पुनिया ने कहा कि संविधान की मूल भावना है कि बराबरी लाने के लिए अतिरिक्त कोई योजना बना सकते हैं, आरक्षण उसमे से एक है, लेकिन ये लोग संविधान को मानते कहां हैं, ये संविधान के उपर सीधा सीधा हमला है। लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने जब दूसरी बार 2019 में संसद आए तो संविधान के उपर मत्था टेका था, 2014 में जब वह पहली बार संसद में आए तो संसद की सीढ़ी पर मत्था टेका था, सर नवा के वह संसद के भीतर गए थे। लेकिन उसके बाद जिस तरह से संविधान की प्रक्रिया को दरकिनार करके कानून पास कराए जा रहे हैं, वैसा देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ।
गोडसे ने भी पहले पैर छुए, फिर गांधी जी को मारी गोली
पुनिया ने कहा कि मत्था टेक टेककर तो नाथू राम गोडसे ने भी सबसे पहले गांधी जी के पैर छुए थे, उसके बाद उन्हें गोली मारी थी, तो ये इनकी पुरानी परंपरा है, इसपर मत जाइए। यह सीधा-सीधा है कि आज एससी, एसटी, ओबीसी के अधिकारों पर खुल्लमखुल्ला हमला हो रहा है, इसमे केंद्र में बैठे नरेंद्र मोदी से लेकर इनके सब लोग शामिल हैं। बता दें कि आरक्षण के फैसले के खिलाफ भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने भारत बंद का आह्वाहन किया है।

23 फरवरी को भारत बंद
प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने 23 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। चंद्रशेखर की ओर से कहा गया है कि फैसला आरक्षण के खिलाफ जाता है और वो इसका विरोध करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को अपने एक फैसले में कहा है कि एससी और एसटी को नौकरी और पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार बाध्य नहीं है क्योंकि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की है।












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