सीएम को हारते हुए नहीं देखना चाहते राहुल गांधी, इसलिए दी ये सलाह
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ऐलान किया है कि वो चामुंडेश्वरी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, जबकि कांग्रेस आलाकमान नहीं चाहता कि सिद्धारमैया इस सीट से चुनावी मैदान में उतरें।
नई दिल्ली। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सीट पर पेंच फंस गया है। दरअसल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ऐलान किया है कि वो चामुंडेश्वरी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, जबकि कांग्रेस आलाकमान नहीं चाहता कि सिद्धारमैया इस सीट से चुनावी मैदान में उतरें। चामुंडेश्वरी विधानसभा सीट को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस नेतृत्व के बीच चल रही 'तर्कबाजी' के बीच फिलहाल सीएम की सीट को लेकर असमंजस बना हुआ है।

कांग्रेस को डर, कहीं हार ना जाएं सिद्धारमैया
सूत्रों के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चामुंडेश्वरी सीट पर चुनाव लड़कर जीतना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए आसान नहीं होगा। कांग्रेस ने सिद्धारमैया को किसी ओर सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी है। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि चामुंडेश्वरी सीट से चुनाव लड़ना कांग्रेस पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। अब कांग्रेस पार्टी ने सीट का फैसला खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर ही छोड़ दिया है।

चामुंडेश्वरी सीट पर 70 हजार वोक्कालिगा वोट
सिद्धारमैया के दावों से अलग कांग्रेस आलाकमान सीएम की सीट को लेकर परेशान नजर आ रहा है। पार्टी का मानना है कि चामुंडेश्वरी सीट पर सिद्धारमैया को चुनाव हराने के लिए विपक्ष किसी भी हद तक जा सकता है। इसके अलावा इसी सीट पर जेडीएस के उम्मीदवार जीटी देवगौड़ा एक मजबूत प्रत्याशी हैं और चामुंडेश्वरी सीट पर उनका अच्छा खासा प्रभाव भी है। 2.5 लाख वोटरों वाली चामुंडेश्वरी सीट पर करीब 70 हजार वोक्कालिगा वोट हैं, जिनके बीच जीटी देवगौड़ा खासे लोकप्रिय नेता हैं।

सिद्धारमैया ने दिया एसएम कृष्णा का उदाहरण
कांग्रेस आलाकमान ने सीएम सिद्धारमैया को सुझाव दिया है कि वो बागलकोट की बादामी सीट से चुनाव लड़ें। बादामी विधानसभा में कुरुबा मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है और सिद्धारमैया भी इसी जाति से आते हैं। हालांकि सीएम सिद्धारमैया कांग्रेस की बात से सहमत नहीं हैं। सिद्धारमैया ने एसएम कृष्णा का उदाहरण देते हुए कहा कि 2004 में एसएम कृष्णा को मदडुर विधानसभा क्षेत्र से शिफ्ट करते हुए चमराजापेट सीट से चुनाव लड़ाया गया और इसके बदले में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा।












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