नीतीश कुमार के कंधों पर आई विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी! जानें क्या है कांग्रेस का प्लान
नीतीश कुमार की दिल्ली यात्रा ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष की रणनीति के संकेत दे दिए हैं।

लोकसभा 2024 के चुनावों को सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। कांग्रेस नरेंद्र मोदी के खिलाफ देश के विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों दिल्ली की राजनीति में काफी सक्रिय है। नीतीश कुमार ने कल कांग्रेस समेत कई अन्य दलों के नेताओं से मुलाकात की।
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार (12 अप्रैल) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी उनके साथ मौजूद रहे। इस मुलाकात के बाद नीतीश कुमार आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिले।
केजरीवाल से मुलाकात से पहले नीतीश कुमार ने कहा कि, हम अधिक से अधिक पार्टियों को पूरे देश में एक जुट करने का प्रयास कर रहे हैं। हम आगे एक साथ काम करेंगे ये तय हो गया है। जिसके बाद ये खबर सामने आ रही है कि, कांग्रेस ने नीतीश कुमार को पार्टियों को एकजुट करने की जिम्मेदारी दी है।

यूपीए के नए कॉर्डिनेटर बने नीतीश कुमार?
जिसके बाद नीतीश को यूपीए के नए कोर्डिनेटर के तौर पर देखा जा रहा है। यूपीए में पहले जहां एनसीपी चीफ शरद पवार को एक कोर्डिनेटर की भूमिका में देखा जाता था। लेकिन शरद पवार के जेपीसी और अडानी को लेकर दिए गए उनके हालिया बयानों ने उनकी भूमिका पर कई प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
ऐसे में कांग्रेस किसी ऐसे नेता को कोर्डिनेटर की भूमिका में चाहती है। जो शरद पवार से बड़ा कद रखता हो और बीजेपी का धुर विरोधी हो। इस समय नीतीश कुमार इस भूमिका के लिए सबसे सही नेता हैं। इस जिम्मेदारी मिलने के बाद नीतीश कुमार को यूपीए का एक नया कोर्डिनेटर माना जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्षी दलों से बात करेंगे। जिसके बाद अप्रैल के अंत में विपक्षी दलों एक बड़ी बैठक होगी। अब सवाल यह है कि, अगर नीतीश कुमार को विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी दी गई है। तो उनके सामने कई चुनौतियां भी होगीं।

क्या है कांग्रेस का प्लान
कांग्रेस का प्लान है कि, वह यूपी , बिहार , महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विपक्षी दलों को एक जुट करें। इसके पीछे की मुख्य वजह इन राज्यों को कुल लोकसभा सीटें हैं। यूपी में अकेले 80 लोकसभा की सीटें हैं। बिहार में 40 , महाराष्ट्र में 48 और पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा की सीटें हैं।
इन चार राज्यों में कुल मिलाकर 210 लोकसभा सीटें हैं। 2019 में बीजपी ने यूपी में 62+2 सीटें जीतीं, महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना के साथ मिलकर 41 सीटें जीती थी। इसी तरह बिहार में 40 सीटों पर 39 सीटों पर बीजेपी और सहयोगी पार्टियां जीत हासिल की थी।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 18 सीटें जीती थी। इन चार राज्यों से बीजेपी के खाते में 164 सीटें आई थीं। जो उसे सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा करती है। अब गौर करने वाली बात यह भी है कि, दो राज्यों में बिहार और महाराष्ट्र में बीजेपी के सहयोगी रही शिवेसना (उद्धव) और जेडीयू अलग हो चुके हैं।

अमित शाह के 300+ के मिशन को झटका!
बिहार में जेडीयी और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरें के अलग होने के कारण अमित शाह के 300 प्लस के नारे को ये राज्य बड़ा झटका दे सकते हैं। कांग्रेस की कोशिश हैं इन राज्यों के क्षेत्रीय दलों को एक जुट किया जा सके। जिसके जिम्मेदारी नीतीश कुमार को सौंपी गई है। साफ छवि के नेता नीतीश कुमार के अधिकतर पार्टियों के साथ अच्छे संबंध हैं।
जिन नेताओं को मनाने का जिम्मा नीतीश कुमार को दिया गया है। इनमें पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी, दिल्ली के सीएम और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और सपा चीफ अखिलेश यादव शामिल हैं।

नीतीश के लिए ये दो बड़े नेता है चैलेंज
ममता बनर्जी ने हाल ही में राहुल गांधी के खिलाफ खूब बयानबाजी की है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी विपक्ष के नेता रहे तो बीजेपी को हराया नहीं जा सकता है। ऐसे में यूपी और पश्चिम बंगाल में नीतीश कुमार को ममता और अखिलेश को यूपीए में लाना बहुत बड़ा चैलेंज होगा।
इसी बीच नीतीश कुमार ने आज लेफ्ट नेताओं के साथ मुलाकात की है। वहीं आने वाले दिनों में वे अन्य कई दलों के साथ बैठक करते दिख सकते हैं। जिनमें तेलंगाना के बीआरएस चीफ केसीआर, जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दल पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेस के नेता भी शामिल होंगे।












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