सलमान खुर्शीद के 'खून के धब्बे' वाले बयान से कांग्रेस ने पल्ला झाड़ा
नई दिल्ली। कांग्रेस ने पार्टी नेता सलमान खुर्शीद के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। आज एक प्रेस वार्ता में पीएल पुनिया ने कहा कि पार्टी खुर्शीद के बयान से असहमत है। पुनिया ने कहा कि हर किसी को पता होना चाहिए कि स्वतंत्रता से पहले और बाद में दोनों कांग्रेस ही एक पार्टी है जिसने जनता के सभी वर्गों को साथ ही साथ धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को लेकर एक समतावादी समाज बनाने की दिशा में काम किया है। गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में आयोजित वार्षिकोत्सव में छात्रों से संवाद किया था। इसी दौरान उनसे सीधे सवाल जवाब किए गए थे। इसी दौरान आमिर मिंटोई नाम के छात्र ने सलमान खुर्शीद से सवाल पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो धब्बे हैं, इन धब्बों को आप किन अल्फ़ाज़ों से धोना चाहेंगे?

खुर्शीद छात्र के सवालों से बचते नजर नए, लेकिन सवालों से बचते हुए भी सलमान खुर्शीद यह गए की कांग्रेस का नेता होने के नाते मुसलमानों के ख़ून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर हैं। सलमान खुर्शीद ने छात्रों से अपील की थी कि गुजरे वक्त के कुछ सीखो।
दरअसल, छात्र ने सलमान खुर्शीद से कहा की- साल 1947 में देश की आजादी के बाद ही 1948 में एएमयू एक्ट में पहले संशोधन, 1950 प्रेसिडेंशल ऑर्डर, जिसमें मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छिना गया। इसके बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुज़फ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़ आदि में मुसलमानों के नरसंहार हुआ। इसके अलावा बाबरी मस्जिद के दरवाजे खुलना, बाबरी मस्जिद में मूर्तियों का रखना और फिर बाबरी मस्जिद की शहादत जो कि कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में हुई।
इन घटनाओं का हवाला देते हुए छात्र ने सलमान खुर्शीद से सवाल किया था। इसी कार्यक्रम में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने 'इसी यूनिवर्सिटी के वीसी लॉज में पैदाइश हुई थी, लेकिन मुझे इस बात का अफसोस है कि मेरी तरबियत यहां से नहीं हुई।'












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