कांग्रेस में अब एक परिवार को एक ही टिकट? चिंतन शिविर में गांधी परिवार का भी इम्तिहान

एक परिवार, एक टिकट?

नई दिल्ली, 11 मई: कांग्रेस पार्टी राजस्थान के उदयपुर में चिंतन शिविर करने जा रही है। कांग्रेस आलाकमान ने 13 से 15 मई तक उदयपुर में तीन दिन का नव संकल्प चिंतन शिविर करने का फैसला किया है। इस शिविर में कुछ अहम बातें भी तय होनी हैं, जिसमें एक परिवार को चुनाव के लिए एक ही टिकट दिए जाने का फॉर्मूला भी है।

 कांग्रेस का पाखंड

सोनिया गांधी के बारे में कहा जाता है कि वो एक सबको सुनती हैं और सीखने की कोशिश करती हैं। सोनिया गांधी समझती हैं कि असहमति को लंबे समय तक नहीं रहने देना चाहिए और ना ही इसे खारिज करना चाहिए। सोनिया गांधी ने बेटे राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद सार्वजनिक रूप से असंतोष के प्रति कठोरता दिखाई है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने कहा भी कि पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और अब समय आ गया है कि पार्टी के नेता एकजुट होकर कुछ वापस करें।

सोनिया गांधी ने उदयपुर में 13-15 मई तक होने वाले चिंतन शिविर को संभालने वाली टीम को सावधानी से चुना है। सम्मेलन में भाग लेने वाले 400 प्रतिनिधियों में असंतुष्ट जी-23 के कुछ सदस्यों को शामिल करने पर विचार किया गया है। उनमें से कुछ को महत्वपूर्ण भूमिकाएँ भी सौंपी गई हैं, जैसे भूपिंदर हुड्डा जो कृषि पर समिति का नेतृत्व करेंगे। हालांकि ध्यान देने की बात ये भी है कि चिंतन शिविर की अहम जिम्मेदारी राहुल गांधी के वफादार लोगों के हाथों में है।

कांग्रेस और सोनिया गांधी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नेता पार्टी के साथ रहें और भाजपा या आप में ना जाएं। चिंतन शिविर में पार्टी के सदस्यों को वफादारी की शपथ दिलाए जाने की भी संभावना है। सोनिया चाहती हैं कि शिविर में उपस्थित लोग यह सुनिश्चित करें कि वे और उनके समर्थक पार्टी के साथ रहें।

एक परिवार, एक टिकट को भी लेकर भी फैसला

पार्टी में ज्यादातर नेता टिकट नहीं मिलने के चलते नाराज होते हैं। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि एक परिवार एक टिकट के फॉर्मूले को लागू किया जाए। इससे भाजपा के वंशवाद की राजनीति के आरोप को कुंद करने में भी कांग्रेस को मदद मिलेगी। इसमें दुविधा ये है कि फिर गांधी परिवार से भी केवल एक सदस्य ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकेगा।

एक परिवार एक टिकट का फॉर्मूला आने पर 2024 में प्रियंका गांधी के चुनावी मैदान में उतरने की संभावना को भी खत्म कर सकता है क्योंकि राहुल तो चुनाव लड़ेंगे ही। ऐसे में क्या गांधी परिवार को नियम से बाहर रखा जाएगा। यह भी हो सकता है कि प्रियंका या राहुल में से किसी को राज्यसभा जाए।

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