बिहार: कांग्रेस ने आरजेडी को लोकसभा सीटों के बंटवारे पर दिया 'जेएमएम' फॉर्मूला
नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस के साथ सीटों को लेकर आरजेडी ने जहां एक तरफ सख्त रूख अपनाया हुआ है। आरजेडी बिहार की 40 लोकसभा सीट में 20-22 सीटों के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ने पर अड़ी हुई हैं। वहीं कांग्रेस राज्य में दोबारा मजबूत होने की कोशिश कर रही है। इसी के तहत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की रविवार को पटना के गांधी मैदान में हुई रैली के बाद 15 सीटों अपना दावा किया है। अगले हफ्ते दोनों सीनियर पार्टियों के बीच होने संभावित बातचीत में लोकसभा सीटो के बंटवारे को लेकर निर्णायक हो सकती है।

'आरजेडी झारखंड मुक्ति मोर्चा की राह पर चले'
कांग्रेस के नेताओं ने रविवार को कहा कि आरजेडी को झारखंड मुक्ति मोर्चा की राह पर चलना चाहिए, जो पड़ोसी राज्य झारखंड में मुख्य विपक्षी पार्टी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधानसभा में 18 सीटें हैं और वो मुख्य विपक्षी पार्टी है। वो लोकसभा चुनाव में 4 सीटों पर लड़ने को तैयार है और उसने कांग्रेस के लिए 7 लोकसभा सीटे छोड़ी हैं। जबकि कांग्रेस के सूबे में सिर्फ 6 विधायक हैं।

'राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी'
बिहार कांग्रेस के महासचिव और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य संजीव सिंह ने कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर फिर से पुनर्निर्माण हो रहा है। राहुल गांधी की लोकप्रियता पूरे देश में बढ़ रही है। बिहार में हुई उनकी रैली एतिहासिक रही थीऔर 2 लाख से ज्यादा लोग इसमें आए थे। हाजीपुर में सीमांचल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के बाद कई ट्रेनों के रद्द होने के बावजूद इतनी भीड़ जुटना उनकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। राज्य के हित में आरजेडी कुछ सीटों का त्याग कर सकता है और कम सीटों की मांग कर सकता है। कांग्रेस ने अक्टूबर में गठबंधन के तहत 20-20 सीटों का फॉर्मूला दिया था। इसमें सुझाव दिया गया था कि कांग्रेस पार्टी कुछ अन्य सहयोगियों के लिए अपनी सीटें कम करेगी लेकिन फिर भी उन्हें आरजेडी का एक समान भागीदार माना जाएगा। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।

कांग्रेस ने 15-15 सीट का फॉर्मूला सुझाया
संजीव सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने आरजेडी को 15-15 सीटों पर लड़ने का प्रस्ताव दिया है। जबकि बाकी 10 सीटें महागठबंधन की अन्य पार्टियों के बीच बंटे। इस प्रस्ताव पर कोई हिचक नहीं होनी चाहिए क्योंकि सत्तारूढ़ एनडीए के साथी भाजपा और जेडीयू भी 17-17 सीटों पर लड़ने पर सहमत हैं। काग्रेस पहले की तुलना में अधिक मजबूत हैं
और इसलिए यह समय है जब हम फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं।

आरजेडी से अलग लड़ेगी चुनाव!
एक सीनियर नेता ने नाम का खुलासा ना करने पर कहा कि अगर आरजेडी को भरोसा नहीं है, तो कांग्रेस शरद यादव, पप्पू यादव, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन मांझी जैसे नेताओं के नेतृत्व वाले छोटे दलों के साथ चुनाव में उतर सकती है। दरअसल आरेजडी और आरएलएसपी के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा कांग्रेस नेताओं के इशारे पर महागठबंधन में शामिल हुए हैं और इसलिए वह देश की सबसे पुरानी पार्टी के प्रति अधिक वफादार हैं। आरजेडी के नेताओं ने भी अपने आरएलएसपी समकक्षों के साथ अपने कटु और मधुर संबंध बना कर रखे हैं।












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