कांग्रेस और AAP, I.N.D.I.A. में कैसे और कबतक चल पाएंगे साथ?

विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया) में आम आदमी पार्टी की एंट्री ही शर्तों के आधार पर हुई है। बाकी पार्टियां तो इसकी शर्त मानने के लिए कब से तैयार थी, लेकिन कांग्रेस की वजह से शुरू में काफी समय तक मामला अटका रहा था।

बाद में कांग्रेस ने भी कुछ नेताओं के विरोध के बावजूद दिल्ली सेवा कानून वाले बिल पर केंद्र सरकार के खिलाफ जाने का फैसला किया तो आम आदमी पार्टी विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के लिए राजी हो गई। जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है तो पंजाब, दिल्ली, गुजरात और इसी तरह से तमाम प्रदेश यूनिट इस गठबंधन के लिए कभी भी खुद को तैयार करती नजर नहीं आई है।

congress and aap in india alliance

कबतक चलेंगे साथ?
ऐसे में जिस तरह से पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रदेश के कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को ड्रग्स के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया है, उससे यह सवाल फिर से उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कभी स्वाभाविक गठबंधन हो सकता है?

पंजाब में पूरी तरह से जंगल राज- कांग्रेस
आगे बढ़ने से पहले पंजाब कांग्रेस के एमएलए की गिरफ्तारी पर पार्टी के प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक की तीखी प्रतिक्रिया गौर करने लायक है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा वारिंग ने इसके विरोध में प्रदेश के राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद कहा है, 'पंजाब में पूरी तरह से जंगल राज है। पुलिस ने सही तरीके से कार्रवाई नहीं की है।'

अन्याय सहन करने वाले लोग भी हम नहीं हैं- मल्लिकार्जुन खड़गे
एक मिनट के लिए मान लें कि आम आदमी पार्टी के साथ किसी तरह का गठबंधन करने के विरोध में पंजाब और दिल्ली कांग्रेस ही ज्यादा आगे रही है। लेकिन, इस मसले पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रतिक्रिया भी कम गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा है, "अन्याय अगर कोई करता है तो बहुत दिन टिकता नहीं है.....कोई अन्याय हमारे ऊपर करेगा तो अन्याय सहन करने वाले लोग भी हम नहीं हैं।"

जिस मकसद से कांग्रेस के साथ आई थी AAP, वह हुई बीती बात
तथ्य ये है कि जिस वजह से आम आदमी पार्टी इंडिया ब्लॉक में शामिल हुई थी और खासकर के कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था, वह कहानी कब की खत्म हो चुकी है। इंडिया ब्लॉक के विरोध के बावजूद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वह कानून आसानी से संसद से पास कराकर लागू भी कर चुकी है। सवाल है कि फिर इन दोनों दलों की दोस्ती इन हालातों में कबतक और क्यों बरकरार रहेगी।

पंजाब में है आमने-सामने की लड़ाई
हम पहले पंजाब से ही शुरू करते हैं। पंजाब में 2022 का विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी कांग्रेस सरकार को ही सत्ता से बेदखल करके अप्रत्याशित बहुमत के साथ जीती थी। वहां कांग्रेस मुख्य विपक्ष की भूमिका में है। आए दिन दोनों दलों में टकराव देखने को मिलती है।

दिल्ली में कांग्रेस हुई साफ, AAP ने जमा ली धाक
आम आदमी पार्टी को सबसे पहले 2013 में दिल्ली में बड़ी सफलता मिली थी। तब भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन, आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाया था। हालांकि, कांग्रेस नेताओं की ओर से तभी से कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी को कांग्रेस के जनाधार पर ही खड़े होने का मौका मिला है। जानकारों की राय में आगे के चुनावों में यह बात और स्पष्ट होती गई। विधानसभा चुनावों में दिल्ली में बीजेपी का वोट शेयर लगभग अपनी जगह (थोड़ा ऊपर-नीचे) कायम रहा, लेकिन कांग्रेस साफ होती चली गई।

AAP इन राज्यों में भी कांग्रेस के लिए बन सकती है चुनौती
2022 के दिसंबर में आम आदमी पार्टी की वजह से कांग्रेस को गुजरात में भारी नुकसान की बातें सामने आईं। उससे पहले गोवा विधानसभा चुनावों में भी वैसी ही परिस्थितियां पैदा हो चुकी थी। आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोका है और हरियाणा के लिए इरादे जाहिर किए हैं, उससे कांग्रेस की प्रदेश इकाइयों के कान पहले ही खड़े हो चुके हैं।

दूसरी तरफ यह साफ है कि आम आदमी पार्टी ने राज्य-दर-राज्य चुनाव लड़कर खुद को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर स्थापित कर लिया है। यह उसका एक बहुत बड़ा लक्ष्य था, जो गुजरात चुनाव के बाद और कांग्रेस के अंदर के लोगों के मुताबिक उनकी पार्टी के दम पर हासिल हुआ है।

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