जानिए कौन हैं आनंदी बेन पटेल जिन्हें मोदी ने बनाया सीएम
अहमदाबाद। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री का पद संभालने जा रहे हैं और अब उनके बाद खबरें हैं कि आनंदी बेन पटेल गुजरात की अगली मुख्यमंत्री का पदभार संभालेंगी।
आनंदी बेन पटेल फिलहाल गुजरात सरकार में सड़क एवं भवन निर्माण, राजस्व, शहरी विकास और शहरी आवास, आपदा प्रबंधन और कैपिटल प्रोजेक्ट्स से जुड़े मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रही हैं।
आनंदी बेन पटेल गुजरात के संभावित मुख्यमंत्रियों की दौड़ में सबसे आगे हैं। आनंदी बेन पटेल गुजरात सरकार की एक प्रभावशाली मंत्रियों में से एक हैं।
आनंदी बेन पटेल, केशुभाई पटेल और वर्तमान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही गुजरात के बीजेपी कैडर की एक अहम नेता रही हैं। फिलहाल आनंदी बेन पटेल गुजरात की सबसे लंबे कार्यकाल वाली विधायक का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं।
आनंदी बेन पटेल ने राज्यसभा के सांसद के तौर पर वर्ष 1994 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वर्ष 1998 में गुजरात विधानसभा चुनाव जीतकर उनका रुख राज्य की तरफ हो गया था।
वर्तमान में वह गुजरात की अकेली ऐसी महिला विधायक हैं जो लगातार चार बार विजयी होकर गुजरात विधानसभा तक पहुंची हैं। गुजरात सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री उनका चौथा कार्यकाल जारी है।
शायद ही किसी को मालूम हो कि गुजरात की अगली सीएम के तौर पर जिस आनंदी बेन पटेल के नाम की चर्चा जोरों पर हो रही है एक बार उन्होंने झील में डूब रही बच्चियों की जान बचाई थी। इस काम के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
आगे की स्लाइड्स में आनंदी बेन पटेल की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातों के बारे में जानिए।

मोदी की करीबी
आनंदी का पूरा नाम आनंदी बेन जेठाभाई पटेल है। राज्य के लिए यह कोई नया चेहरा नहीं है। आनंदी राज्य की राजस्व मंत्री होने के साथ-साथ मोदी की भी करीबी मानी जाती हैं। आनंदी बेन का जन्म 21 नवंबर 1941 को गुजरात के मेहसाणा जिले के खारोद गांव में हुआ था।

अनुशासन के लिए मशहूर
अनुशासन प्रिय आनंदी बेन 7 0 के दशक में अहमदाबाद के मोहिनीबा कन्या विद्यालय की पूर्व प्रधानाचार्या भी रह चुकी हैं। गुजरात भाषा की अच्छी प्रवक्ता 71 वर्षीय आनंदी और मोदी की लोकप्रियता की बात करें तो राज्य में इन दोनों नेताओं को अपनी कार्यकुशलता के लिए जाना जाता है।

सन् 1988 से एक दूसरे से परिचित
मोदी सन् 1988 से आनंदी बेन को जानते हैं जब ये भाजपा में शामिल हुई थीं। आनंदी उस समय से चर्चा में आई जब इन्होंने अकाल पंडितों के लिए न्याय मांगने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। वर्ष 1995 में शंकर सिंह वाघेला ने जब बगावत की थी, तो उस कठिन दौर में भी आनंदीबेन और मोदी ने साथ-साथ पार्टी के लिए काम किया था।

अनुभव भी कमाल
बेदाग छवि वाली आनंदी बेन के पास अनुभव की कमी नहीं है। आनंदी गुजरात की सबसे लंबे कार्यकाल वाली विधायक का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। इसके अलावा 1998 में कैबिनेट में आने के बाद से वे शिक्षा और महिला एवं बाल कल्याण जैसे मंत्रालयों का जिम्मा संभाल चुकी हैं।

मिल चुका है वीरता पुरस्कार
आनंदी निडर और साहसी भी हैं। इन्हें वर्ष 1987 में वीरता पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। एक छात्रा को डूबने से बचाने के लिए आनंदी खुद झील में कूद गई थीं।

किसानों तक पहुंचाई टेक्नोलॉजी की ताकत
आनंदी बेन पटेल ने बतौर शहरी विकास और राजस्व मंत्री ई-जमीन कार्यक्रम, जमीन के स्वामित्व डाटा और जमीन के रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत करके जमीन के सौदों में होने वाली धांधली की आशंका को कम कर दिया। इनकी इस योजना से गुजरात के 52 प्रतिशत किसानों के अंगूठे के निशानों और तस्वीरों का कंप्यूटरीकरण कर दिया गया।

विधवाओं को बताई शिक्षा की ताकत
आनंदी बेन ने बीएसई की पढ़ाई पूरी करने के बाद महिला विकास गृह को ज्वॉइन किया। यहां पर आनंदी बेन ने 50 से भी ज्यादा विधवाओं के कल्याण के लिए वोकेशनल कोर्से शुरू किए।

राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
आनंदी बेन को वर्ष 1989 में राष्ट्रपति की ओर से सर्वश्रेष्ठ अध्यापक, 1988 में राज्यपाल की ओर से गुजरात के बेस्ट टीचर का पुरस्कार भी दिया जा चुका है।












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