मोदी सरकार में गिरा सांप्रदायिक हिंसा का ग्राफ

नई दिल्ली। केंद्र में मोदी सरकार सांप्रदायिक तनाव बढ़ान के लिए हमेशा से विपक्षी दलों के निशाने पर रही है। लेकिन गृह मंत्रालय के ताजे आंकड़े मोदी सरकार को राहत देने वाले हैं। ताजा आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछली साल की तुलना में इस सरकार में 20 फीसदी सांप्रदायिक तनाव कम हुए है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने एक बयान में कहा था कि इस सरकार में सांप्रदायिक हिंसा की घटना में कमी आयी है।

communal violence

पिछले साल अक्टूबर माह तक के आंगड़ों पर नजर डाले तो देशभर में 561 मामले दर्ज किए गये जिनमें दो गुटों के बीच झड़प हुए। वहीं 694 ऐसे मामले दर्ज किए गए जिनमें हिंसक झड़प हुई। 2013 का पूरा साल यूपीए सरकार के हाथों में था जिसमें कुल 823 सांप्रदायिक हिंसा के मामले दर्ज किए गये। जोकि पिछली साल की तुलना में कहीं ज्यादा थी। 2012 में कुल 668 सांप्रदायिक हिंसा के मामले दर्ज किए गये थे।

आंकड़ों पर करीब से नजर डालें तो केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद कुछ खास फर्क नहीं पड़ा है। 2014 में शुरु के पांच महीनों में 270 सांप्रदायिक हिंसा के मामले दर्ज किए गये जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। जबकि मोदी सरकार के पहले पांच महीनों पर नजर डालें तो कुल 290 मामले दर्ज किए गये। हालांकि जिन प्रदेशों में यह मामले दर्द किए गये वो भाजपा सरकार द्वारा शासित नहीं है।

जिन प्रदेशों में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गये वो उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र है, जहां सरकारें सांप्रदयिक वारदातों को रोकने में विफल रही। गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डाले तो देशभर में दर्ज कुल सांप्रदायिक घटनाओं में से 60 फीसदी घटनाएं सिर्फ इन चार प्रदेशों में दर्ज की गयी।

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