कोलगेट- मनमोहन मासूम होंगे,पर घूसखोर तो फंसे
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अब यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि कोलेगट में तगड़ा घोटाला हुआ। यह भी लगता है कि इसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घूस नहीं ली होगी। पर, जो दोषी हैं उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए तो इसमें बुराई ही क्या है। इस सारे मामले की जांच हो तो क्या बुराई है।
अरबों का वारा न्यारा
मनमोहन सिंह ने स्वयं घूस ली होगा ऐसी नहीं लगता, पर नेताओं ने तो रेबड़ियों की कोयला खदान हासिल किए। उसमें अरबों का वारा न्यारा हुआ। उच्चतम न्यायालय ने सारे आवंटन रद्द किये। इसकी जिम्मेवारी किस पर जायेगी?
नरसिंह राव से पूछताछ
इसके पहले नरसिंह राव के साथ ऐसा हो चुका है। मनमोहन सिंह उनकी सरकार में वित्त मंत्री थे।
लेकिन देश यह तो जरुर चाहेंगे कि इसमें भ्रष्टाचार का जितना सच है वह सामने आये और उसके अनुसार दोषियों को सजा हो। वह कोई भी हो।
सोनिया की मार्च
पर,कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया के नेतृत्व में उनकी पार्टी ने सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के घर तक जिस तरह से मार्च किया एवं उनके प्रति पूर्ण विश्वास एवं एकजुटता दर्ज कराई,उससे लगता है कि वे पहले ही मान चुके हैं कि कोलगेट में कुछ गलत नहीं है लकिन यह कदम सामान्य नहीं था।
चेहरा उतरा था
वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ने ठीक ही कहा कि सीबीआई से पूछताछ के बाद मनमोहन सिंह जब पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे उनका चेहरा पूरी तरह उतरा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे वे बोलते-बोलते रो पड़ेगे।
दुखद हालत
देश का 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्तित्व को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी बनाया जाए, सम्मन जारी हो तथा सीबीआई उनसे पूछताछ करे, यह किसी दृष्टि से अच्छी स्थिति नही है। यह दुखद है।
लेकिन कोयला ब्लॉक आवंटन में जिस ढंग का भ्रष्टाचार हुआ वह जगजाहिर है। उस दौरान मनमोहन सिंह के हाथों ही कोयला मंत्रालय था। हिण्डालको को कोयला ब्लॉक आवंटन में प्रधानमंत्री कार्यायल के अधिकारियों पर आरोप लग चुका है और हस्ताक्षर मनमोहन सिंह का ही था। जब कोयला सचिव पी. सी. पारेख को आरोपी बनाया गया था उनने कहा कि अगर मुझे आरोपी बनाया गया तो मनमोहन सिंह को भी बनाया जाना चाहिए। आखिर सचिव के नाते मैं तो उनका सहयोग कर रहा था। उनने अपनी पुस्तक में काफी कुछ अपने नजरिये से सामने लाया है।
मुझे आरोपी बनाया गया तो मनमोहन सिंह को भी बनाया जाना चाहिए
अवधेश कुमार यह भी कहते हैं कि शिबू सोरेन द्वारा कोल इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक बदलने के लिए दबाव की चर्चा है, अन्य बड़े अधिकारियों के डिपुटेशन का मामला था।
यह प्रधानमंत्री का कार्यालय ही था जिसके मंत्री ने कोयला ब्लॉक संबंधी सीबीआई का शपथ पत्र बदलवाया जिसकी उच्चतम न्यायालय ने निंदा की और सरकार को सीबीआई की स्वायत्तता का कदम उठाना पड़ा।
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