एडवोकेट सौरभ कृपाल के बचाव में उतरे CJI डीवाई चंद्रचूड़, सेक्सुअल ओरिएंटेशन पर कही ये बात
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सेक्सुअल ओरिएंटेशन से किसी व्यक्ति की प्रोफेशनल लाइक पर कोई असर नहीं होता है। उन्होंने सौरभ कृपाल का बचाव किया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर से कॉलेजियम सिस्टम का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि हर व्यवस्था परफेक्ट नहीं होती है, लेकिन यह सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था है जिसे न्यायपालिका ने तैयार किया है। एक कार्यक्रम के दौरा बोलते हुए सीजेआई ने कहा कि समलैंगिक वकील को जज के पद पर नियुक्त किए जाने का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किस लिंग को वरीयता देता है इसका बतौर जज उसके फैसले से कोई लेना-देना नहिीं है, ना ही इससे उस व्यक्तिकी की बतौर जज क्षमता प्रभावित होती है। दरअसल वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाने की सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार सिफारिश की है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लेकिन जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने इस फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का सेक्सुअल ओरिएंटशन क्या है उससे उस व्यक्ति की न्यायिक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है।
सीजेआई ने कहा कि आप जिस उम्मीदवार (सौरभ कृपाल) की बात कर रहे हैं, आईबी की रिपोर्ट में उनसे जुड़ी जो बात कही गई थी, वह पहले से ही सार्वजनिक है। उन्होंने पहले भी सार्वजनिक तौर पर अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में बात की है। ऐसे में जब आईबी ने इस बारे में जानकारी दी तो यह पहले से ही विदित थी।
गौर करने वाली बात है कि कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि सुप्रीम कोर्ट को सौरभ कृपाल से जुड़ी जानकारी को साझा नहीं करना चाहिए था, क्योंकि यह सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच का संवाद था। कुछ मामले ऐसे होते हैं जिसे प्राइवेट रखना चाहिए। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि उनका एक मत है जो हो सकता है, मेरा एक मत है जो हो सकता है। दोनों की अलग-अलग राय होने में कोई दिक्कत नहीं है। हमे अलग-अलग राय को डील करना चाहिए। न्यायपालिका में भी अलग-अलग राय होती है।
हमने यह जानकारी इसलिए साझा की थी कि ताकि लोगों में कॉलेजियम की पारदर्शिता को लेकर विश्वास बढ़े, जिसको लेकर इसपर सवाल उठता रहता है कि इसमे पारदर्शिता नहीं है। जिस उम्मीदवार का आप जिक्र कर रहे हैं, वह पहले से पब्लिक डोमेन में हैं, उनके बारे में पहले से ही लोगों को जानकारी है। हमने आईबी की कोई जानकारी साझा नहीं की है। आईबी की रिपोर्ट में इस उम्मीदवार की सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में जानकारी दी गई थी, जोकि पहले से सार्वजनिक है। किसी भी व्यक्ति की सेक्सुअल ओरिएंटेशन उसकी क्षमता पर सवाल नहीं खड़ी करती है, ना ही उसकी जजमेंट देने के फैसले को प्रभावित करती है। बता दें कि जनवरी माह में सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने कहा था कि 11 नवंबर 2021 को सौरभ कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे खारिज कर दिया था।












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