कौन हैं सिविल जज शिवा, जिन्होंने सड़क पर जाकर दिया न्याय, बीमार बुजुर्ग दंपती नहीं आ पा रहा था कोर्ट रूम
Civil Judge E. Sai Shiva: तेलंगाना के बोधन में एक मिसाल बनती घटना ने न्याय प्रणाली की मानवीय तस्वीर पेश की। एक दहेज उत्पीड़न केस की सुनवाई के दौरान, प्रथम श्रेणी अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट (JFCM) ई. साई शिवा ने संवेदना और इंसानियत का परिचय देते हुए अदालत को चारदीवारी तक सीमित नहीं रहने दिया।
रुद्रूर मंडल के रायकुर गांव के निवासी, सय्यम्मा और गंगाराम, अपनी बहू द्वारा लगाए गए दहेज प्रताड़ना के आरोपों के चलते महीनों से अदालत के चक्कर काट रहे थे। उम्र का तकाज़ा और शरीर की दुर्बलता के बावजूद, दोनों हर सुनवाई पर समय से पहुंचते। सोमवार को जब वे कोर्ट पहुंचे, तो अत्यधिक कमजोरी के कारण कोर्टरूम तक चलना उनके लिए संभव नहीं था।

यह देख कर न्यायाधीश ई. साई शिवा ने परंपरा से हटकर कदम उठाया-वे खुद कोर्टरूम से बाहर आए, वृद्ध दंपत्ति के पास पहुँचे और उनकी हालत समझी। वहीं खुले में दोनों पक्षों की बात सुनी और सुनवाई पूरी की। तमाम तथ्यों और गवाही को सुनने के बाद, उन्होंने पाया कि बुजुर्ग दंपति निर्दोष हैं। तत्पश्चात, केस को खारिज कर दिया गया।
इस फैसले और न्यायाधीश के मानवीय दृष्टिकोण ने कोर्ट में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। वृद्ध दंपत्ति की आँखें भर आईं और उन्होंने नम आंखों से न्यायाधीश को धन्यवाद दिया। सोशल मीडिया पर भी यह दृश्य छा गया, लोग जज की संवेदनशीलता और न्यायप्रियता की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने कहा यह "इंसाफ और इंसानियत का चेहरा"












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