मुश्किल में फंसी चित्रा त्रिपाठी! पहले गिरफ्तारी वारंट, अब जमानत याचिका खारिज, क्या होगी जेल? आखिर क्या हुआ?
Chitra Tripathi: देश की जानी-मानी पत्रकार और न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी की मुश्किलें इन दिनों बढ़ती हुईं नजर आ रहीं है। चित्रा त्रिपाठी पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण ,पोक्सो ( Pocso) मामले में केस दर्ज है। ये केस आसाराम बापू और एक 10 वर्ष की बच्ची से संबंधित वीडियो से जुड़ा है। इस मामले में चित्रा त्रिपाठी के कोर्ट के सामने हाजिर न होने के कारण उनके खिलाफ पहले गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। अब गुड़गांव की एक अदालत ने अग्रिम जमानत यानी एंटीसिपेटरी बेल की याचिका भी खारिज कर दी है।
गुड़गांव की एक अदालत ने 2013 के पोक्सो अधिनियम के मामले में चित्रा त्रिपाठी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। इससे पहले इसी मामले में चित्रा त्रिपाठी के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। अब कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से भी मना कर दिया है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की चित्रा त्रिपाठी की एंटीसिपेटरी बेल?
चित्रा त्रिपाठी की अग्रिम जमानत खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आवेदन में दिए गए कारण "अनुचित" थे। 14 नवंबर को अदालत ने चित्रा त्रिपाठी की गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया था क्योंकि वह अदालती कार्यवाही को काफी हल्के में ले रही थीं। चित्रा त्रिपाठी के साथ-साथ एक अन्य टीवी चैनल के समाचार एंकर सैयद सुहैल के खिलाफ भी वारंट जारी किया गया था।
चित्रा त्रिपाठी किस मामले में फंसीं हैं? क्या है उनके ऊपर आरोप?
चित्रा त्रिपाठी और एंकर सैयद सुहैल समेत आठ मीडिया पेशेवरों पर कथित तौर पर एक 10 वर्षीय लड़की का ''अश्लील तरीके'' से एक वीडियो प्रसारित करने और बाद में इंटरनेट पर अपलोड करने और इसे स्वयंभू संत आसाराम बापू के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले से जोड़ने के लिए मामला दर्ज किया गया था।
ये मामला भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी (आपराधिक साजिश), 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी (इलेक्ट्रॉनिक रूप में बच्चों को यौन रूप से स्पष्ट कृत्य आदि में चित्रित करने वाली सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण) और 66(2) (कंप्यूटर से संबंधित अपराध) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 23 जिसके तहत बच्चे की पहचान का खुलासा दंडनीय अपराध है, इसके तहत दर्ज किया गया था।
क्यों कोर्ट में पेश नहीं हुई थीं चित्रा त्रिपाठी?
चित्रा त्रिपाठी और सैयद सुहैल ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट के लिए आवेदन दायर किए थे। चित्रा त्रिपाठी ने कहा कि वह विधानसभा चुनाव को कवर करने और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार का साक्षात्कार करने के लिए महाराष्ट्र के नासिक जा रही थीं, जबकि सुहैल ने कहा कि उन्हें उपचुनाव के कारण उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेना था।
जमानत याचिका दायर करते हुए भी चित्रा त्रिपाठी ने अपनी अनुपस्थिति का यही कारण दोहराया था। 25 नवंबर को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार की अदालत ने जमानत खारिज कर दी थी क्योंकि जमानत के लिए आधार वही थे जो गैरहाजिर रहने के लिए थे।
अदालत ने कहा कि आवेदन को "उक्त आवेदन में बताए गए कारणों से असंतुष्ट होने के बाद अस्वीकार कर दिया गया था...और चूंकि वर्तमान आवेदन उन्हीं आधारों पर आधारित है, इसलिए इसे अस्वीकार किया जाना आवश्यक है क्योंकि इस अदालत ने उन कारणों को अनुचित पाया है।''
चित्रा त्रिपाठी ने अपने आवेदन को पुष्ट करने के लिए महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ इंटरव्यू की अपनी फ्लाइट टिकट और तस्वीरें प्रस्तुत की थीं। अदालत ने कहा कि इन राजनेताओं की स्थिति और व्यस्तता को देखते हुए इंटरव्यू पहले ही तय कर लिया जाता और अगर आरोपी को अदालत की प्रक्रिया का थोड़ा भी सम्मान होता तो वह तय तिथि से पहले किसी अन्य तिथि पर व्यक्तिगत रूप से छूट आवेदन पेश करके अपनी उपस्थिति से छूट प्राप्त कर सकती थी।
शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि पिछली दो तारीखों पर आरोपी चित्रा त्रिपाठी को स्वास्थ्य आधार पर उपस्थित होने से छूट दी गई थी, लेकिन अब आरोपी को उपस्थित होने से छूट देने का कोई उचित आधार नहीं बनता है। हालांकि चित्रा त्रिपाठी को इस मामले में जेल होगी या नहीं, फिलहाल इसपर कोई अपडेट नहीं है।












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