कैथोलिक धर्म की मान्यता के चलते कैंसर का इलाज कराने से किया इनकार, 8वें बच्चे को जन्म देने के 2 साल बाद निधन

नई दिल्ली। एम्स अस्पताल में बतौर वरिष्ठ नर्सिंग महिला अधिकारी कार्यरत केरल की महिला ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की जगह अपनी धार्मिक मान्यता को तरजीह देना महंगा पड़ा है। एम्स में कार्यरत सपना ट्रेसी जिनकी उम्र 43 वर्ष थी वह कैथोलिक धर्म में विश्वास रखती थीं और धर्म की मान्यता के चलते उन्होंने कैंसर का इलाज कराने से इनकार कर दिया। सपना को डॉक्टर ने सलाह दी थी कि वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को अबॉर्ट करा दें और तुरंत ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन कराएं, लेकिन डॉक्टर की सलाह को नहीं मानना उन्हें महंगा पड़ा और सोमवार को उनका थ्रिसूर में निधन हो गया। उन्होंने 8वें बच्चे को वर्ष 2015 में जन्म दिया था। सपना के सभी बच्चों की उम्र 15 वर्ष से कम है। युवावस्था में सपना और उनके पति चितिलापल्ली जोजू जोकि थ्रिसूर के चित्ततुकारा गांव से आते हैं वह जीसस यूथ एंड कैथोलिक कैरिस्मैटिक रीन्यूवल मूवमेंट का हिस्सा थे। उस वक्त सपना एम्स में नौकरी करती थीं, जबकि जोजू दिल्ली के ही चर्च में समाज सेवा के कार्य में लिप्त थे। हाल के दिनों में दोनों ही चर्च के अभियान को आगे बढ़ाने में काफी सक्रिय थे, वह परिवारों और कार्यरत महिलाओं को अबॉर्शन नहीं कराने के लिए प्रेरित करते थे। यहां तक कि फरीदाबाद स्थित केरल कैथोलिक चर्चा ने उन्हें बड़ा परिवार होने की वजह से सम्मानित किया था।

डॉक्टरों की सलाह नहीं मानी

डॉक्टरों की सलाह नहीं मानी

सपना के पति जोजू ने बताया कि सपना को कैंसर की बीमारी है इस बात की जानकारी तब मिली जब वह अपने आठवे बच्चे को जन्म देने वाली थीं, उनके गर्भ में तीन माह का बच्चा था, डॉक्टर यह चाहते थे कि वह तुरंत अबॉर्शन कराएं और अपनी जान बचाने के लिए कैंसर का ऑपरेशन कराएं। परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने भी उन्हे इस बात की सलाह दी कि वह डॉक्टरों की सलाह को मानें, लेकिन वह इस बात को लेकर दृढ़ थीं कि ऑपरेशन अबॉर्शन नहीं कराएंगी। डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी भी दी थी कि वह अपने सात बच्चों को अनाथ कर देंगी अगर वह अपना इलाज नहीं कराती हैं। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि सिर्फ मैं इस बच्चे को जन्म दे सकती हूं जो मेरे गर्भ में पल रहा है, कई अच्छे लोग हैं जो मेरे सातों बच्चों का खयाल रख सकते हैं।

अपनी सैलरी पर पालती थीं बच्चों को

अपनी सैलरी पर पालती थीं बच्चों को

सपना के पति बताते हैं कि सपना का इलाज चल रहा था, जब वह गर्भावस्था के दौरान छठे महीने में पहुंची तो डॉक्टर उनका रेडिएशन करके कीमोथेरेपी करना चाहते थे, लेकिन सपना ने इससे इनकार कर दिया, वह चाहती थीं कि बच्चे के जन्म के बाद ही कीमोथेरेपी हो। बच्चे के जन्म के कुछ महीने बाद ही उनका रेडिएशन हुआ और कीमोथेरेपी हुई। उनके अंदर काफी दृढ़ इच्छा शक्ति थी कि हमे बच्चे की जान को खतरे में नहीं डालना चाहिए फिर चाहे खुद की ही जान क्यों ना खतरे में हो। जिस तरह से उन्होंने आठवे बच्चे को जन्म दिया और सभी को अपनी सैलरी से पाल रही थीं, उसकी वजह से वह दिल्ली में हमारे पड़ोसियों के बीच किसी अजूबे की तरह थीं।

सपना जिंदा होती तो नौंवा बच्चा भी पैदा करते

सपना जिंदा होती तो नौंवा बच्चा भी पैदा करते

एक वर्ष पहले सपना को यह बताया गया कि उनका कैंसर उनके फेफड़ों तक पहुंच चुका है, जोजू ही पूरे परिवार की देखभाल कर रहे थे, वह पांचों लड़कों व तीन लड़कियों की देखभाल करते थे। जोजू कहते हैं कि उन्होंने हमेशा अपनी पत्नी का साथ दिया, हम जीवन का काफी अनमोल मानते थे, हमे उन्हें खत्म करने का कोई अधिकार नहीं है, मुझे इस बात का कोई दुख नहीं है कि मैंने अपनी पत्नी के फैसले का साथ दिया। हम दो लोगों के जीवन को नहीं बचा सकते थे, मुझे लगता है कि आबादी से विकास होता है, अगर सपना जिंदा होती तो हम नौंवे बच्चे को भी जन्म देते।

पहले से ही बच्चों को करा रहे थे तैयार

पहले से ही बच्चों को करा रहे थे तैयार

सपना के पति को इस बात का पहले से ही अंदाजा था कि सपना की मृत्यु हो सकती है, लिहाजा वह बच्चों की इसके लिए पहले से ही काउंसलिंग करा रहे थे और उन्हें तैयार कर रहे थे कि उनकी मां की मृ्त्यु हो सकती है। केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल फैमिली कमीशन के सचिव फ्रेडरिक पॉल मैडरसरी कहते हैं कि बच्चो को इस बात का अंदाजा था कि उनकी मां एक दिन नहीं रहेंगी, भगवान और अच्छे लोग उनका खयाल रखेंगे, मैंने उन्हें उम्मीदों से भर दिया था, दुख का कोई स्थान नहीं है। वह कहते हैं कि महिला का फैसला सही था और हमने उनके फैसले का समर्थन किया। हम जिम्मेदार के साथ बच्चों के लालन-पालन को बढ़ावा देते हैं, अगर माता-पिता स्वस्थ्य हैं और एक से अधिक बच्चे का वहन उठा सकते हैं तो इसमे कुछ भी गलत नहीं है कि वह सात या आठ या फिर और बच्चे पैदा करें, अगर कोई अधिक बच्चों का वहन उठा सकता है तो उसे अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए।

केरल में अधिक बच्चे पैदा करने का प्रोत्साहन

केरल में अधिक बच्चे पैदा करने का प्रोत्साहन

गौरलतब है कि 1960-70 में कैथोलिक चर्च ने केरल में परिवार नियोजन को बढ़ावा देना शुरू किया था। केरल में 19 फीसदी आबादी ईसाईयों की है। केरल में चर्च परिवारों को चार या चार से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यही वजह है कि यहां महिलाएँ अपने परिवार की संख्या को कम करने के लिए विदेश में नौकरी करने के लिए जाती हैं।

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