22 जून को चीनी कमांडर ने किया दावा- PLA के जवान गलवान घाटी पर दावे वाली जगह से 800 मीटर दूर
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच 22 जून को कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी। पूर्वी लद्दाख में पांच मई से जारी टकराव को खत्म करने के मकसद से हुई इस वार्ता में चीन ने भारत को बताया था कि उसके जवान गलवान घाटी में दावे वाली जगह से करीब 800 मीटर दूर हैं। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से इस बात की जानकारी दी है। भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में जारी टकराव 15 मई को हिंसक हो गया था। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसा में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे।

पीपी 14 पर बना हुआ टकराव
सूत्रों की ओर से बताया गया है कि चीन का दावा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के एकदम करीब है और इसकी वजह से उन्हें काफी फायदा है। माना जा रहा है कि चीन इसका फायदा उठाकर गलवान घाटी में यथास्थिति को बदलने की कोशिशों में लगा हुआ है। 22 जून को जब भारतीय सेना के 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के मेजर जनरल लिन लियू के बीच मोल्डो में वार्ता हुई तो चीन ने बताया कि वह गलवान में अपनी दावे वाली जगह से करीब 800 मीटर दूर हैं। सूत्रों की मानें तो चीनी सेना की तरफ से जोर देकर यह बात कही जा रही थी कि वह पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 से 100 से 150 मीटर ही आगे आए हैं। पीपी 14 ही वह जगह है जहां पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच 15 जून को हिंसक टकराव हुआ था।
पांच मई को इंडियन आर्मी को पेट्रोलिंग से रोका
सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि पीपी 14 और पैंगोंग त्सो पर 22 जून को विस्तार से चर्चा हुई थी। चीनी सेना की तरफ से इस दौरान फॉरवर्ड एरियाज में इंडियन आर्मी की तैनाती को लेकर कुछ चिंता भी जाहिर की गई थी। भारत ने इस मीटिंग में एक बार फिर चीन ने कहा है कि वह अप्रैल वाली यथास्थिति को बहाल करे जब चीन की तरफ से किसी भी तरह का कोई निर्माण नहीं हुआ था। माना जा रहा है कि आगे आने वाले दिनों में कुछ और दौर वार्ता होगी जिसमें डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। चीनी सेना ने पांच मई को गलवान घाटी में इंडियन आर्मी की पेट्रोलिंग टीम को आगे जाने से रोका था और इसकी वजह से उस समय भी पीपी 14 पर हिंसा हुई थी। अब यह दोनों सेनाओं के बीच टकराव का बड़ा बिंदु बन गया है। पीपी 14 के अलावा पीपी 15 और पीपी 17A भी संवेदनशील इलाके हैं। देपसांग में चीनी सेना ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं और अब यह टकराव का नया बिंदु बन चुका है।












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