ऑपरेशन सिंदूर: एक बार फिर सामने आए भारत के दो दुश्मन, पाक के पीछे खड़ा चीन, तुर्की ने भी भेजे ड्रोन
पुलवामा जैसे आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई 2025 की रात को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया, जिसने सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े चीन और तुर्की के गठजोड़ को भी उजागर कर दिया। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने शुक्रवार को इस बात का खुलासा किया कि भारत को ऑपरेशन सिंदूर में एक नहीं, बल्कि दो बड़े सैन्य विरोधियों से एकसाथ निपटना पड़ा।
FICCI के एक कार्यक्रम में बोलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने कहा, “एक सीमा, दो दुश्मन पाकिस्तान तो सिर्फ सामने था, असली सपोर्ट चीन और तुर्की जैसे देशों से मिल रहा था। यह महज एक सैन्य झड़प नहीं थी, बल्कि भारत के खिलाफ हथियारों की एक 'लाइव टेस्टिंग लैब' बन गई थी।”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की सेना ने जिन हथियारों का इस्तेमाल किया, उनमें 81% सैन्य उपकरण चीनी निर्माण के थे। इसके अलावा, तुर्की ने भी पाकिस्तान को अपने घातक बायकार्टर ड्रोन मुहैया कराए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत को अब एक नए प्रकार की त्रिकोणीय चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
चीनी हथियारों की 'लाइव लैब' बना भारत-पाक संघर्ष
सेना के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “चीन ने देखा कि उसे अपने हथियारों को भारत जैसे देशों के हथियारों के खिलाफ आज़माने का मौका मिला है। यह उनके लिए एक 'लाइव लैब' है।”
उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाइयों में एयर डिफेंस सिस्टम की अहम भूमिका होगी। "इस बार हमारे नागरिक इलाकों पर हमले नहीं हुए, लेकिन अगली बार हमले आम जनता तक पहुंच सकते हैं, इसलिए हमें पहले से ज्यादा मजबूत वायु सुरक्षा प्रणाली तैयार करनी होगी।"
ऑपरेशन सिंदूर: 7 से 10 मई तक चला चार दिन का सैन्य टकराव
पुलवामा के पास पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की थी। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकवादी और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन, मिसाइल, फाइटर जेट और हैवी आर्टिलरी का इस्तेमाल किया, जिससे हालात युद्ध जैसे बन गए। अंततः 10 मई को दोनों देशों में टकराव कम करने पर सहमति बनी।












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