भारत और चीन के विदेश मंत्रियों ने की फोन पर बात, चीन ने सीमा विवाद को सुलझाने पर जताई सहमति
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि, चीन ने भारत के साथ सीमा पर झड़प का मुद्दा निष्पक्ष तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई है।

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चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह जितनी जल्दी संभव हो पीछे हटने और तनाव कम करने की कोशिश करेगा। इसी बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्ष चीनी विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर इस घटनाक्रम को लेकर बातचीत की है। गल्वान घाटी में हिंसा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को सख्त संदेश दिया है। जयशंकर ने यी से कहा- गलवान में जो हुआ, वह पूर्वनियोजित और योजनाबद्ध था, इसी के वजह से सारी घटनाएं हुईं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दे, भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण करने की भी दी सलाह। हालांकि भारत की ओऱ से भी चीन से इस मामले में की जांच करने के लिए कहा है। वांग ने जयशंकर से कहा कि भारत और चीन को उन महत्वपूर्ण सहमतियों का पालन करना चाहिए, जिन पर दोनों देशों के नेता सहमत हुए हैं। वांग ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मतभेदों को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र के माध्यम से संचार और समन्वय मजबूत करना चाहिए।
इसी बीच इस पूरे मामले पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार कहा कि, जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई हमें उकसाएगा, तो वह भ्रम में न रहे। भारत के पास हर हाल में यथोचित जवाब देने की ताकत है।
पीएम मोदी ने कहा कि, मतभेद विवाद न बनें। हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं। लेकिन हम अपने देश की अखंडता और संप्रभुता के साथ समझौता भी नहीं करते हैं। जब भी समय आया है हमने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि भारत शांतिपूर्ण देश है। इतिहास भी इस बात का गवाह है कि हमने विश्व में शांति फैलाई। पड़ोसियों के साथ दोस्ताना तरीके से काम किया। मतभेद हुए भी को कोशिश की है कि विवाद न हो। हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं लेकिन अपने देश की अखंडता के साथ समझौता भी नहीं करते।












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